पीसीसी अध्यक्ष को लेकर कांग्रेस में सियासी संग्राम! अंदरूनी कलह चरम पर, सोशल मीडिया से हाईकमान तक पहुंचा विवाद
पीसीसी की कुर्सी बनी रणभूमि! कांग्रेस में गुटबाजी खुलकर आई सामने:उमेश पटेल के नाम पर तेज हुई सियासी लड़ाई
रायपुर(छत्तीसगढ़ उजाला)-छत्तीसगढ़ कांग्रेस में प्रदेश अध्यक्ष (पीसीसी) को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। कांग्रेस नेता अरुण मालाकार पर हुई अनुशासनात्मक कार्रवाई के बाद पार्टी के भीतर दबा असंतोष अब खुलकर सामने आने लगा है। सोशल मीडिया पर नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच तीखी बयानबाजी शुरू हो गई है, जबकि पीसीसी अध्यक्ष की दौड़ में उमेश पटेल के नाम को लेकर भी समर्थकों के बीच खींचतान तेज हो गई है। मामला अब कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी Sachin Pilot तक पहुंच गया है।
कार्रवाई के बाद फूटा कार्यकर्ताओं का गुस्सा
अरुण मालाकार पर हुई कार्रवाई के विरोध में उनके समर्थकों ने फेसबुक और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर खुलकर पार्टी नेतृत्व के फैसले का विरोध किया। समर्थकों का आरोप है कि कार्रवाई एकतरफा है और बिना सभी पक्षों को सुने निर्णय लिया गया। उनका कहना है कि संगठन में अलग-अलग नेताओं के लिए अलग-अलग मापदंड अपनाए जा रहे हैं, जिससे कार्यकर्ताओं में नाराजगी बढ़ रही है।
प्रदेश नेतृत्व की कार्यशैली पर उठे सवाल
विवाद बढ़ने के साथ ही प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व की कार्यशैली भी सवालों के घेरे में आ गई है। कई नेताओं का कहना है कि यदि अनुशासन के नाम पर कार्रवाई की जा रही है तो नियम सभी पर समान रूप से लागू होने चाहिए। चुनिंदा नेताओं पर कार्रवाई से संगठन में असंतोष और गुटबाजी बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
पीसीसी अध्यक्ष को लेकर सोशल मीडिया में जंग
इसी बीच प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के संभावित चेहरे को लेकर भी सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई है। उमेश पटेल के समर्थन और विरोध में लगातार पोस्ट किए जा रहे हैं। समर्थक उन्हें संगठन की कमान सौंपने की मांग कर रहे हैं, जबकि दूसरे गुट अलग राय रख रहे हैं। इससे साफ संकेत मिल रहे हैं कि पीसीसी नेतृत्व को लेकर कांग्रेस के भीतर मतभेद गहराते जा रहे हैं।
सचिन पायलट तक पहुंची शिकायत
पूरे घटनाक्रम की शिकायत कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी Sachin Pilot तक पहुंच चुकी है। असंतुष्ट नेताओं और कार्यकर्ताओं ने उनसे हस्तक्षेप कर निष्पक्ष समीक्षा कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते विवाद का समाधान नहीं हुआ तो इसका असर संगठन की एकजुटता और चुनावी तैयारियों पर पड़ सकता है।
वरिष्ठ नेताओं की नजर, कांग्रेस के सामने नई चुनौती
सूत्रों के मुताबिक पार्टी के वरिष्ठ नेता पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं। माना जा रहा है कि बढ़ते असंतोष को शांत करने के लिए जल्द ही संगठन स्तर पर पहल की जा सकती है। हालांकि, इस पूरे विवाद पर अब तक कांग्रेस की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनावी तैयारियों के बीच इस तरह का अंदरूनी विवाद कांग्रेस के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है। यदि असंतुष्ट नेताओं और कार्यकर्ताओं को समय रहते नहीं साधा गया तो इसका असर संगठनात्मक मजबूती और आगामी राजनीतिक रणनीति पर पड़ सकता है। वहीं पार्टी नेतृत्व अनुशासन बनाए रखने को अपनी प्राथमिकता बता रहा है।



