कोटमी बस स्टैंड बना हादसों का अड्डा! तालाब जैसे गड्ढों में दफन विकास, रोज जोखिम उठाने को मजबूर हजारों लोग
कोटमी से कटघोरा–कोरबा मुख्य मार्ग की बदहाली पर उठे सवाल, हादसों के बाद भी नहीं हो रही मरम्मत, आखिर जिम्मेदार कब लेंगे सुध?
जी.पी.एम.(छत्तीसगढ़ उजाला)-कटघोरा से कोरबा को जोड़ने वाले प्रमुख मार्ग पर स्थित कोटमी बस स्टैंड इन दिनों बदहाल सड़क और विशाल गड्ढों के कारण लोगों के लिए बड़ी मुसीबत बन गया है। बस स्टैंड के बीच सड़क पर बने बड़े-बड़े गड्ढे अब तालाब का रूप ले चुके हैं। बारिश के दौरान इनमें पानी भर जाने से सड़क पूरी तरह जलमग्न दिखाई देती है और वाहन चालकों को यह समझ ही नहीं आता कि सड़क कहां है और गड्ढा कहां। यही वजह है कि यहां आए दिन छोटे-बड़े सड़क हादसे हो रहे हैं।
यह मार्ग जिले के सबसे व्यस्त मार्गों में से एक है। प्रतिदिन हजारों लोग, यात्री बसें, स्कूल वाहन, एंबुलेंस, मालवाहक और दोपहिया-चारपहिया वाहन इसी रास्ते से गुजरते हैं। लेकिन सड़क की हालत ऐसी है कि हर सफर लोगों के लिए खतरे से खाली नहीं है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार वाहन गड्ढों में फंस जाते हैं, दोपहिया चालक गिरकर घायल हो जाते हैं और बसों में सफर कर रहे यात्रियों को भी भारी झटकों का सामना करना पड़ता है।
ग्रामीणों और व्यापारियों का आरोप है कि लंबे समय से सड़क की मरम्मत की मांग की जा रही है, लेकिन आज तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। बरसात शुरू होते ही सड़क की हालत और खराब हो गई है। गड्ढों में भरे पानी के कारण रात के समय दुर्घटना का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते इस सड़क की मरम्मत नहीं हुई तो कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि रोजाना हजारों लोगों की आवाजाही वाले इस बस स्टैंड की बदहाली आखिर किसे दिखाई नहीं दे रही? क्षेत्र के जनप्रतिनिधि, जिम्मेदार अधिकारी और प्रशासन इस मार्ग से गुजरते हैं, लेकिन सड़क की हालत में सुधार के लिए अब तक कोई ठोस पहल नजर नहीं आई। विकास और बेहतर सड़क व्यवस्था के दावों के बीच कोटमी बस स्टैंड की यह तस्वीर उन दावों की हकीकत बयां कर रही है।
हैरानी की बात यह है कि स्थानीय नागरिक कई बार प्रशासन के दरवाजे खटखटा चुके हैं। सड़क की बदहाली को लेकर लिखित शिकायतें और आवेदन भी दिए गए, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी अब तक सिर्फ आश्वासन देते रहे। न सड़क की मरम्मत हुई और न ही समस्या के स्थायी समाधान के लिए कोई ठोस कदम उठाया गया। लोगों का आरोप है कि जब तक कोई बड़ा हादसा नहीं होगा, तब तक शायद प्रशासन की नींद नहीं खुलेगी।
अब सवाल सिर्फ सड़क का नहीं, बल्कि लोगों की सुरक्षा और प्रशासनिक जवाबदेही का भी है। आखिर कब तक कोटमी बस स्टैंड पर लोग अपनी जान जोखिम में डालकर सफर करने को मजबूर रहेंगे?



