छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा: अमित शाह और विजय शर्मा की नीतियों का सफल मॉडल….
छत्तीसगढ़ उजाला

रायपुर (छत्तीसगढ़ उजाला)। छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र दशकों से नक्सलवाद (वामपंथी उग्रवाद) का गढ़ रहा है। लेकिन 2024-2026 के बीच केंद्र और राज्य सरकार की समन्वित रणनीति ने इस समस्या को लगभग समाप्त कर दिया। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा तय 31 मार्च 2026 की डेडलाइन से पहले ही बस्तर को नक्सल-मुक्त घोषित किया जा चुका है। राज्य के गृह मंत्री विजय शर्मा की सक्रिय नीतियों ने इस सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
अमित शाह की रणनीति: डेडलाइन और समन्वित हमला
जनवरी 2024 में अमित शाह ने नक्सलवाद समाप्त करने की 31 मार्च 2026 की डेडलाइन तय की। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए उन्होंने:
सुरक्षा बलों को पूर्ण स्वतंत्रता और आधुनिक तकनीक (ड्रोन, इंटेलिजेंस) उपलब्ध कराई।
“सरेंडर या समाप्ति” नीति अपनाई — हथियार डालने वालों को पुनर्वास और आर्थिक मदद।
विकास कार्यों को सुरक्षा कैंपों के साथ जोड़ा।
परिणाम (2024-2026):
531+ नक्सली मारे गए (बस्तर में मुख्य रूप से)।
3,000+ नक्सली सरेंडर किए।
2,000+ गिरफ्तार।
Politburo और Central Committee के 24 प्रमुख सदस्य (कुछ मारे गए, कुछ सरेंडर)।
बड़े लीडरों का सफाया: Nambala Kesava Rao (Basavaraju) और Madvi Hidma जैसे टॉप कमांडर।
अमित शाह ने जगरदलपुर में घोषणा की कि भारत अब नक्सल-मुक्त है। उन्होंने CAPF कैंपों को विकास केंद्रों में बदलने की घोषणा की।
विजय शर्मा की भूमिका: राज्य स्तर पर सख्ती और पुनर्वास
छत्तीसगढ़ के उप-मुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा ने अमित शाह की राष्ट्रीय नीति को स्थानीय स्तर पर प्रभावी बनाया:
103 नए सुरक्षा कैंप बस्तर में स्थापित (8,000 वर्ग किमी क्षेत्र कवर)।
स्थानीय इंटेलिजेंस और मध्यस्थता से बड़े पैमाने पर सरेंडर।
पुनर्वास नीति: सरेंडर करने वालों को ₹50,000 तत्काल मदद + ₹10,000 मासिक स्टाइपेंड (3 वर्ष) + रोजगार/आवास।
विकास को सुरक्षा से जोड़ा — सड़कें, स्कूल, अस्पताल, मोबाइल टावर और राशन दुकानें।
आंकड़ों में सफलता (2024-2026):
मारने वाले: 2024 → 217, 2025 → 256+, 2026 (आरंभिक) → 26+ (कुल 500+)
सरेंडर: 2024 → 792, 2025 → 1,573, 2026 → 391+ (कुल 3,000+)
गिरफ्तार: 2,000+
हथियार बरामद: 1,300+
सुरक्षा बलों के शहीद: 42 (काफी कम)
नागरिक मौतें: 119 (पहले की तुलना में बहुत कम)
नीतियों का समन्वय: सुरक्षा + विकास + पुनर्वास
सुरक्षा: बड़े पैमाने पर ऑपरेशन, कैंप और इंटेलिजेंस।
विकास: PM-Awas Yojana, सड़कें, रेल लाइनें, बिजली-पानी।
पुनर्वास: आर्थिक मदद + मुख्यधारा में शामिल करना।
परिणाम: बस्तर के अधिकांश इलाके अब नक्सल-मुक्त। केवल कुछ बिखरे हुए कैडर बचे हैं।
निष्कर्ष
अमित शाह की दूरदर्शी डेडलाइन और विजय शर्मा की क्रियान्वयन क्षमता ने छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद को लगभग समाप्त कर दिया। यह सुरक्षा बलों की वीरता, राजनीतिक इच्छाशक्ति और विकास मॉडल का संयुक्त परिणाम है। अब बस्तर विकास की नई राह पर है — सड़कें, स्कूल और रोजगार पहुंच रहे हैं।
यह सफलता पूरे देश के लिए उदाहरण है कि दृढ़ इच्छाशक्ति से कोई भी समस्या हल की जा सकती है।
संदर्भ: आंकड़े सरकारी रिपोर्ट्स, अमित शाह और विजय शर्मा के बयानों तथा समाचार स्रोतों पर आधारित हैं।




