
बिलासपुर(छत्तीसगढ़ उजाला)=छत्तीसगढ़ में आर्थिक अपराधों और कथित सिंडिकेट नेटवर्क पर शिकंजा कसते हुए प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने गुरुवार तड़के बिलासपुर में बड़ी कार्रवाई की। शहर के चर्चित सर्राफा कारोबारी विवेक अग्रवाल के घर और कारोबारी ठिकानों पर एक साथ दबिश देकर ED की टीम ने घंटों तक गहन जांच की। कार्रवाई के बाद शहर के कारोबारी और राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है।
जानकारी के अनुसार, मैग्नेटो मॉल के पीछे साईं मंदिर के पास स्थित विवेक अग्रवाल के निवास पर सुबह करीब 10 से ज्यादा अधिकारियों की टीम पहुंची। टीम सीधे अंदर दाखिल हुई और बंद कमरे में जांच शुरू कर दी। पूरे परिसर के बाहर सुरक्षा कड़ी कर दी गई थी, ताकि किसी भी प्रकार की जानकारी बाहर न जा सके।
सूत्रों का कहना है कि ED अधिकारियों ने घर के भीतर मौजूद दस्तावेज, डिजिटल डिवाइस, बैंकिंग रिकॉर्ड और निवेश से जुड़े कागजातों की बारीकी से जांच की।
कार्रवाई केवल घर तक सीमित नहीं रही। ED की दूसरी टीम मध्यनगरी चौक स्थित शहर के प्रतिष्ठित ज्वेलरी प्रतिष्ठान श्रीराम ज्वेलर्स भी पहुंची। यह फर्म बिलासपुर के बड़े सर्राफा कारोबारियों में गिनी जाती है।
प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, एजेंसी जमीन निवेश, बड़ी वित्तीय ट्रांजैक्शन और संदिग्ध लेन-देन से जुड़े दस्तावेजों को खंगाल रही है। कारोबारी नेटवर्क और फंड फ्लो को लेकर भी जांच गहराई से की जा रही है।
इस पूरे मामले में विवेक अग्रवाल के बड़े भाई विकास अग्रवाल उर्फ ‘सब्बू’ का नाम एक बार फिर चर्चा में आ गया है। विकास अग्रवाल पहले से कथित शराब घोटाला मामले में आरोपी बताए जाते हैं और उनके विदेश—विशेष रूप से दुबई—में होने की जानकारी सामने आती रही है।
सूत्रों के अनुसार, विकास अग्रवाल को करीब 2000 करोड़ रुपये के कथित शराब सिंडिकेट से जुड़ा महत्वपूर्ण सदस्य माना जाता है। उनका नाम अनवर ढेबर से जुड़े नेटवर्क में भी सामने आ चुका है। माना जा रहा है कि इसी वजह से ED अब परिवार से जुड़े आर्थिक संबंधों, निवेश और ट्रांजैक्शन चैन की परतें खोलने में जुटी है।
सूत्रों की मानें तो कार्रवाई का तत्काल आधार भारतमाला प्रोजेक्ट के दौरान जमीन अधिग्रहण में कथित अनियमितताएं हैं। हालांकि जांच का दायरा अब सिर्फ जमीन सौदों तक सीमित नहीं दिख रहा।
ED कथित शराब सिंडिकेट, निवेश नेटवर्क, बेनामी संपत्ति और आर्थिक लेन-देन के बीच संभावित संबंधों की भी जांच कर रही है। इससे यह मामला अब बहुस्तरीय आर्थिक नेटवर्क की जांच में बदलता नजर आ रहा है।
पूरी कार्रवाई बेहद गोपनीय तरीके से की जा रही है। अधिकारियों ने मीडिया या बाहरी लोगों को अंदर आने की अनुमति नहीं दी। दस्तावेजों की स्कैनिंग, इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस की जांच और वित्तीय रिकॉर्ड की पड़ताल लगातार जारी है।
हालांकि ED की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है, लेकिन शहर में इस कार्रवाई को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है।
इसी कार्रवाई से जुड़े तार दुर्ग तक भी पहुंचे हैं। ED की टीम ने दुर्ग के महेश कॉलोनी में बिल्डर और ‘राम रसोई’ संचालक चतुर्भुज राठी के घर भी दबिश दी है। यहां भी वित्तीय दस्तावेजों और कारोबारी लेन-देन की जांच जारी बताई जा रही है।
बिलासपुर और दुर्ग में एक साथ हुई कार्रवाई से साफ संकेत मिल रहे हैं कि ED किसी बड़े नेटवर्क और कथित सिंडिकेट संरचना तक पहुंचने की कोशिश कर रही है। आने वाले दिनों में इस जांच से कई और बड़े नाम सामने आ सकते हैं।
अब नजर इस बात पर टिकी है कि बिलासपुर की इस हाई-प्रोफाइल रेड से आखिर कौन-कौन से खुलासे सामने आते हैं। यह कार्रवाई केवल कारोबारी जगत ही नहीं, बल्कि प्रदेश की राजनीति और आर्थिक तंत्र में भी बड़ी हलचल पैदा कर सकती है।



