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EOW जांच पर ‘ब्रेक’! 314 अफसरों पर शिकायतें, अनुमति के जाल में फंसी कार्रवाई

रायपुर(छत्तीसगढ़ उजाला)-छत्तीसगढ़ में भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई अब कागजों तक सीमित होती दिख रही है। Economic Offences Wing (EOW) के पास 314 अधिकारियों के खिलाफ शिकायतें लंबित हैं, लेकिन अनुमति के अभाव में एक भी मामले में ठोस जांच आगे नहीं बढ़ पा रही। सवाल सीधा है—क्या सिस्टम खुद ही अपने खिलाफ कार्रवाई से बच रहा है?
धारा 17(क): जांच की सबसे बड़ी दीवार
Prevention of Corruption Act Section 17A अब जांच के रास्ते की सबसे बड़ी बाधा बन चुकी है। नियम के मुताबिक किसी भी अधिकारी के खिलाफ जांच शुरू करने से पहले संबंधित विभाग से अनुमति जरूरी है।
नतीजा—
शिकायतें दर्ज हैं…
फाइलें तैयार हैं…
लेकिन जांच शुरू ही नहीं।
314 शिकायतें… कार्रवाई ‘शून्य
आंकड़े चौंकाने वाले हैं। 314 अधिकारियों के खिलाफ शिकायतें EOW के पास लंबित हैं। कई मामलों में प्रारंभिक परीक्षण और दस्तावेजी तैयारी पूरी हो चुकी है, फिर भी एक भी केस में व्यापक जांच आगे नहीं बढ़ी।
यह सिर्फ देरी नहीं, बल्कि सिस्टम की गंभीर निष्क्रियता को उजागर करता है।
जिस पर आरोप, वही देगा अनुमति!
जिन अधिकारियों पर भ्रष्टाचार के आरोप हैं, उन्हीं के विभाग से जांच की अनुमति लेनी पड़ती है।
यानी…
अनुमति देने वाला भी वही सिस्टम, रोकने वाला भी वही सिस्टम!
ऐसे में निष्पक्ष जांच की उम्मीद कैसे की जाए?
छोटे नहीं, बड़े अफसर भी घेरे में
यह मामला केवल निचले स्तर तक सीमित नहीं है। शिकायतों के दायरे में IAS, IPS सहित कई वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल बताए जा रहे हैं।मतलब—मामला अब सीधे सत्ता और सिस्टम के शीर्ष तक पहुंच चुका है।
पारदर्शिता पर बड़ा सवाल
फाइलें तैयार हैं, लेकिन अनुमति नहीं।
जांच रुकी है, जवाबदेही भी रुकी है।
इससे सरकार के पारदर्शिता मॉडल पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
सरकार से सीधी मांग
आवेदन में स्पष्ट मांग की गई है—धारा 17(क) की अनुमति प्रक्रिया को सरल किया जाए,तय समयसीमा लागू हो,विभागों को स्पष्ट निर्देश दिए जाएं,लंबित मामलों में तुरंत जांच शुरू हो
साथ ही चेतावनी भी दी गई है—अगर व्यवस्था नहीं बदली, तो भ्रष्टाचार के मामले हमेशा फाइलों में ही दबे रह जाएंगे।
बड़ा सवाल… जवाब बाकी
क्या भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई सिर्फ कागजों तक सीमित है?
क्या धारा 17(क) जांच रोकने का हथियार बन गई है?
और सबसे अहम—क्या सरकार इस ‘अनुमति के जाल’ को तोड़ पाएगी?
छत्तीसगढ़ में अब यह सिर्फ जांच नहीं, सिस्टम की साख की परीक्षा बन चुकी है

प्रशांत गौतम

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