गौरेला पेंड्रा मरवाहीछत्तीसगढ

“कैंपा फंड में संगठित लूट: फर्जी हस्ताक्षरों से ₹8 लाख की बंदरबांट, 3 साल बाद ‘कागजी भुगतान’ ने खोली पोल !”

जी. पी. एम. (छत्तीसगढ़ उजाला)-वन विभाग के मरवाही वन परिक्षेत्र में कैंपा फंड के नाम पर सामने आए बड़े वित्तीय घोटाले ने विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बिना किसी वास्तविक कार्य के, फर्जी हस्ताक्षरों के सहारे करीब ₹8 लाख की राशि निकालकर बंदरबांट करने का सनसनीखेज मामला उजागर हुआ है। खुलासे के बाद विभाग में हड़कंप मचा हुआ है।
3 साल बाद बनाए गए फर्जी दस्तावेज
जांच में सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह सामने आया है कि वर्ष 2021-22 में बताए गए कार्यों के लिए 2025 में प्रमाणक तैयार किए गए। कई दस्तावेजों में हस्ताक्षर मेल नहीं खा रहे, जिससे साफ संकेत मिलता है कि भुगतान प्रक्रिया पूरी तरह फर्जी और योजनाबद्ध थी।
“जमीन पर काम शून्य, कागजों में भुगतान पूरा”
शिकायत के अनुसार, जिन कार्यों के नाम पर राशि निकाली गई, वे जमीनी स्तर पर हुए ही नहीं। 36 महीने बाद कागजों में भुगतान दर्शाकर सरकारी धन की बंदरबांट कर ली गई—जो एक संगठित साजिश की ओर इशारा करता है।
बाबू-रेंजर की भूमिका संदिग्ध
सूत्रों का दावा है कि इस पूरे घोटाले में बाबू और रेंजर स्तर के कर्मचारियों की भूमिका संदिग्ध है। कूटरचना कर फर्जी हस्ताक्षरों के जरिए राशि निकालने की बात सामने आ रही है।
एक नहीं, कई घोटालों की कड़ी
इस मामले के तार पहले सामने आए कई अन्य घोटालों से भी जुड़ते नजर आ रहे हैं, जिनमें शामिल हैं—
नरवा विकास योजना में गड़बड़ी
ईस्ट-वेस्ट रेल कॉरिडोर मुआवजा राशि घोटाला
वन प्रबंधन सुरक्षा निधि में हेरफेर
ग्रीन क्रेडिट प्लांटेशन में अनियमितता
गोबर क्रय घोटाला
अन्य कैंपा योजनाओं में वित्तीय गड़बड़ी
इन सभी मामलों में आरोप तो लगे, लेकिन कार्रवाई अब तक शून्य रही—जिससे पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
भुपेंद्र साहू पर भी आरोप, कार्रवाई नहीं
सूत्रों के मुताबिक, कैंपा प्रभारी रहते भुपेंद्र साहू के कार्यकाल में भी कई अनियमितताओं की शिकायतें हुईं, लेकिन उन पर आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इससे विभाग की निष्पक्षता और जवाबदेही पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
अफसरों की चुप्पी, बढ़ता संदेह
जब जिम्मेदार अधिकारियों से इस पूरे मामले पर जवाब मांगा गया, तो उन्होंने चुप्पी साध ली। यह चुप्पी अब खुद कई सवाल खड़े कर रही है—क्या घोटाले की जड़ें विभाग के भीतर तक फैली हैं?
जांच तेज, लेकिन भरोसा कम
वरिष्ठ अधिकारियों ने फर्जी हस्ताक्षरों के जरिए भुगतान की शिकायत मिलने की पुष्टि की है और जांच तेज करने की बात कही है। हालांकि, लगातार सामने आ रहे मामलों और अब तक कार्रवाई न होने के कारण लोगों का भरोसा कमजोर पड़ता दिख रहा है।
मरवाही से उठी ये गूंज अब पूरे छत्तीसगढ़ में सुनाई दे रही है। सवाल वही—क्या इस बार दोषियों पर गिरेगी गाज, या फिर एक और घोटाला फाइलों में दबकर रह जाएगा?

प्रशांत गौतम

Related Articles

Back to top button