गौरेला पेंड्रा मरवाहीछत्तीसगढ

मरवाही वनमंडल में ‘हरियाली’ के नाम पर महाघोटाला: CAMPA, नरवा और ग्रीन क्रेडिट योजनाओं में करोड़ों की हेराफेरी

गौरेला–पेंड्रा–मरवाही (छत्तीसगढ़ उजाला)
मरवाही वनमंडल एक बार फिर गंभीर आरोपों के घेरे में है। विभागीय सूत्रों और लगातार मिल रही शिकायतों के अनुसार, यहां योजनाओं के नाम पर बड़े पैमाने पर अनियमितताएं और वित्तीय गड़बड़ियां सामने आई हैं। आरोप है कि कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों ने मिलकर योजनाओं को कागजों तक सीमित रखते हुए करोड़ों रुपए की राशि का दुरुपयोग किया।
बताया जा रहा है कि स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि मरवाही वनमंडल पूरे प्रदेश में भ्रष्टाचार और कुप्रबंधन का उदाहरण बनता जा रहा है। जांच की मांगें उठने के बावजूद अब तक ठोस कार्रवाई न होना सिस्टम की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहा है।
इन योजनाओं में गड़बड़ी के आरोप
CAMPA मद
लेंटाना उन्मूलन परियोजना
नरवा विकास योजना
ग्रीन क्रेडिट योजना
सूत्रों के मुताबिक, 2018 से 2025 के बीच कई कार्य सिर्फ दस्तावेजों में पूर्ण दिखाकर राशि आहरित कर ली गई, जबकि जमीनी स्तर पर कार्य नगण्य बताए जा रहे हैं।

ग्रीन क्रेडिट योजना में बड़े स्तर पर फर्जीवाड़े के आरोप सामने आए हैं—
500 हेक्टेयर में प्लांटेशन का दावा, लेकिन वास्तविकता संदिग्ध
पहले से तैयार (मनरेगा) पौधों को ही नया रोपण दिखाया गया
60 रुपये प्रति पौधा के हिसाब से लगभग 3 लाख पौधों की फर्जी एंट्री
करीब 1.80 करोड़ रुपये की राशि आहरित
साइट पर न RCC पोल, न वायर, न सिंचाई की व्यवस्था
लगभग 70% पौधे जमीन से गायब बताए जा रहे हैं
आरोप यह भी है कि नर्सरी और प्लांट तैयार करने के नाम पर फर्जी खरीदी दिखाकर राशि निकाली गई।
कागजों में जंगल, जमीन पर सन्नाटा
जिन क्षेत्रों में प्लांटेशन दिखाया गया, वे कई जगह पथरीले और अनुपयुक्त पाए गए। कई स्थलों पर तो रोपण का कोई भौतिक प्रमाण तक नहीं मिला।

इस कथित घोटाले में कई स्तरों के अधिकारी-कर्मचारी सवालों के घेरे में हैं—
वनमंडल स्तर के अधिकारी
SDO स्तर के अधिकारी
विभिन्न रेंज के रेंजर
शाखा प्रभारी और कार्यालयीन स्टाफ
मुख्य लिपिक शैल गुप्ता
CAMPA शाखा प्रभारी भूपेंद्र साहू
नर्सरी प्रभारी, डिप्टी रेंजर, फॉरेस्ट गार्ड एवं मैदानी अमला

जब कागजों में जंगल तैयार हो रहे हैं,और जमीन पर पौधे तक नजर नहीं आ रहे…तो इस “भ्रष्टाचार के जंगल” का असली जिम्मेदार कौन है?
अब देखना होगा कि जिम्मेदार एजेंसियां इन गंभीर आरोपों पर क्या कार्रवाई करती हैं, या फिर यह मामला भी फाइलों में ही दबकर रह जाएगा।

प्रशांत गौतम

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