मरवाही वनमंडल में ‘संरक्षण या सौदेबाजी’? दागी कर्मियों को मलाईदार पोस्टिंग, कार्रवाई क्यों नहीं—DFO पर उठे बड़े सवाल

गौरेला–पेंड्रा–मरवाही(छत्तीसगढ़ उजाला)
मरवाही वनमंडल एक बार फिर विवादों में है। यहां दागी और विवादित वन कर्मियों को संरक्षण देने तथा नियमों को ताक में रखकर पोस्टिंग का खेल खेलने के गंभीर आरोप सामने आए हैं। मामले में पूर्व और वर्तमान DFO दोनों की कार्यशैली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
10 साल से जमे प्रभारी, आदेश भी बेअसर!
सूत्रों के मुताबिक कैंपा शाखा के प्रभारी भूपेंद्र साहू पिछले करीब 10 वर्षों से एक ही स्थान पर जमे हुए हैं। उनके खिलाफ गबन और फर्जीवाड़े की कई शिकायतें होने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
बताया जा रहा है कि उन्हें हटाने के लिए आधा दर्जन आदेश जारी किए गए, लेकिन न तो आदेशों का पालन हुआ और न ही जिम्मेदार अधिकारियों ने सख्ती दिखाई। इससे विभागीय सिस्टम पर सवाल खड़े हो गए हैं।
“ऊपर से संरक्षण” का आरोप
आरोप है कि कुछ कर्मचारियों को ऊपरी स्तर से संरक्षण प्राप्त है, जिसके चलते वे लंबे समय से मलाईदार और महत्वपूर्ण शाखाओं में जमे हुए हैं। इतना ही नहीं, आरोप यह भी है कि कुछ ने अपने कार्यकाल में अघोषित संपत्ति अर्जित की, लेकिन जांच आगे नहीं बढ़ पाई।
विवादित कर्मचारियों की सूची लंबी
मरवाही वनमंडल में ऐसे कई नाम सामने आए हैं, जो विवादों और शिकायतों के बावजूद अपने पदों पर बने हुए हैं—
राकेश राठौर
उदय तिवारी–साधवानी (नरश्री प्रभारी)
शिव शंकर तिवारी (नरश्री प्रभारी, चिचगोना)
महेंद्र तिवारी
राजीव सिसोदिया
बताया जा रहा है कि इन कर्मचारियों के खिलाफ शिकायतों के आधार पर DFO मरवाही द्वारा आदेश भी जारी किए गए, लेकिन आज तक उनका पालन नहीं हुआ और सभी अपने पदों पर बने हुए हैं।
DFO की कार्यशैली पर सवाल
लगातार सामने आ रहे मामलों के बाद अब DFO मरवाही की कार्यशैली पर गंभीर प्रश्नचिन्ह लग गए हैं। स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो यह मामला वन विभाग में संरक्षण तंत्र और प्रशासनिक लापरवाही का बड़ा उदाहरण बन सकता है।
जांच और कार्रवाई की मांग तेज
मामले को लेकर अब निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई की मांग तेज हो गई है। लोगों की नजर अब इस बात पर टिकी है कि क्या प्रशासन इस पूरे मामले में ठोस कदम उठाएगा या फिर मामला ठंडे बस्ते में चला जाएगा।



