जंगल कट रहे, अधिकारी सो रहे!
मरवाही वनमंडल में माफियाओं का कहर, DFO मूकदर्शक — अवैध कटाई जोरों पर

गौरेला-पेंड्रा-मरवाही(छत्तीसगढ़ उजाला)-जिले के मरवाही वनमंडल में इन दिनों अवैध लकड़ी कटाई और तस्करी का धंधा खुलेआम फल-फूल रहा है। आरोप है कि वन विभाग के जिम्मेदार अधिकारी और कर्मचारी अपने-अपने मुख्यालयों में न रहकर शहरों में निवास कर रहे हैं, जिसके कारण जंगलों की निगरानी लगभग ठप हो गई है और तस्करों के हौसले बुलंद हैं।
सूत्रों के अनुसार मरवाही वनमंडल के खोड़री, गौरेला, मरवाही और पेंड्रा परिक्षेत्र में अवैध कटाई और लकड़ी तस्करी की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। बताया जा रहा है कि कई परिक्षेत्र सहायकों (डिप्टी रेंजर) और परिसर रक्षकों (बीट गार्ड) का अपने-अपने मुख्यालय में रहना लगभग बंद हो गया है। अधिकांश कर्मचारी गौरेला, पेंड्रा और मरवाही के शहरी क्षेत्रों में स्थायी रूप से रह रहे हैं।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि शाम 6 बजे के बाद अधिकांश बीट गार्ड अपने मुख्यालय से गायब रहते हैं, जिससे जंगल पूरी तरह तस्करों के भरोसे छोड़ दिया जाता है। इसी का फायदा उठाकर लकड़ी माफिया रात के अंधेरे में पेड़ों की कटाई कर आसानी से लकड़ी की तस्करी कर रहे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि इस पूरे मामले में वन विभाग के कुछ कर्मचारियों की मिलीभगत से भी इनकार नहीं किया जा सकता, क्योंकि बार-बार शिकायत किए जाने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है।
गंभीर आरोप यह भी लग रहे हैं कि जब इस संबंध में उच्च अधिकारियों को शिकायत की जाती है तो उस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती। ऐसे में मरवाही वनमंडल के डीएफओ की भूमिका पर भी सवाल उठने लगे हैं, जिन पर पूरे मामले में मूकदर्शक बने रहने का आरोप लगाया जा रहा है।
स्थानीय लोगों ने मांग की है कि मामले की उच्चस्तरीय जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि जंगलों की हो रही अवैध कटाई पर रोक लग सके और वन संपदा को बचाया जा सके।




