गौरेला पेंड्रा मरवाहीछत्तीसगढ

“मुख्यमंत्री का सख्त संदेश— ‘भ्रष्टाचार बख्शा नहीं जाएगा’, फिर मरवाही वनमंडल में आरोपों पर चुप्पी क्यों? प्रभावशाली सप्लायर आखिर बचा कैसे— विभागीय संरक्षण या सिस्टम की कमजोरी?”

गौरेला–पेंड्रा–मरवाही (GPM)।
जिले में 100 करोड़ रुपये से अधिक के विकास कार्यों की घोषणाओं और भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त संदेशों के बीच अब वनमंडल मरवाही में एक प्रभावशाली सप्लायर की भूमिका को लेकर सवाल तेज हो गए हैं। निर्माण कार्यों की गुणवत्ता, भुगतान प्रक्रिया और फाइल स्वीकृति में पारदर्शिता को लेकर स्थानीय स्तर पर गंभीर चर्चाएं चल रही हैं।
कैम्पा मद के कार्यों पर उठे सवाल
वित्तीय वर्ष 2024–25 में कैम्पा मद से मुनारा निर्माण, मॉडल रेंज कार्यालय, डिपो आवास और ग्रामीण सड़कों के लिए करोड़ों रुपये स्वीकृत किए गए। इन कार्यों का उद्देश्य वन क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे को मजबूत करना था।
हालांकि कुछ ग्रामीणों और विभागीय सूत्रों का दावा है कि कई स्थानों पर कार्यों की गुणवत्ता अपेक्षित मानकों के अनुरूप नहीं है, जबकि कुछ प्रोजेक्ट अधूरे दिखाई दे रहे हैं। इन दावों की आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है, लेकिन पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग लगातार बढ़ रही है।
“प्रभाव” बनाम प्रक्रिया
स्थानीय चर्चाओं में एक प्रभावशाली सप्लायर और संबंधित अधिकारियों के बीच कथित करीबी तालमेल की बात सामने आ रही है। आरोप हैं कि फाइलों की गति और भुगतान प्रक्रिया पर बाहरी प्रभाव हावी रहा।
हालांकि इन आरोपों पर संबंधित पक्षों की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। प्रशासनिक हलकों में यह सवाल जरूर उठ रहा है कि यदि सभी प्रक्रियाएं नियमों के अनुरूप हैं, तो स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच से परहेज क्यों?
विभागीय संरक्षण या महज संयोग?
जनता के बीच यह चर्चा भी तेज है कि क्या उक्त सप्लायर को विभागीय संरक्षण प्राप्त है या फिर यह महज अफवाहों का परिणाम है। स्थिति स्पष्ट करने के लिए स्वतंत्र तकनीकी मूल्यांकन और विस्तृत वित्तीय ऑडिट को आवश्यक बताया जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि पारदर्शी जांच ही वास्तविक स्थिति सामने ला सकती है और इससे या तो आरोपों की पुष्टि होगी या फिर संबंधित पक्षों को क्लीन चिट मिल सकेगी।
ऑडिट और FIR की मांग
स्वतंत्र तकनीकी जांच
विस्तृत वित्तीय ऑडिट
विभागीय जवाबदेही तय करने और आवश्यक होने पर FIR दर्ज करने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि कार्य नियमानुसार हुए हैं, तो जांच से सच्चाई सामने आएगी और आरोप स्वतः समाप्त हो जाएंगे।
अब निगाहें प्रशासनिक कार्रवाई पर
जिले में विकास कार्यों की बड़ी घोषणाओं के बीच अब जनता की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या आरोपों की निष्पक्ष जांच होगी? क्या जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की जाएगी? और यदि अनियमितता पाई जाती है तो क्या जिम्मेदारों पर कार्रवाई होगी?
वनमंडल मरवाही का यह मामला अब सिर्फ एक सप्लायर तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह पूरे सिस्टम की पारदर्शिता और जवाबदेही की परीक्षा बनता जा रहा है।

प्रशांत गौतम

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