गौरेला पेंड्रा मरवाहीछत्तीसगढ

रेशम अनुसंधान विकास एवं प्रशिक्षण विभाग की गंभीर लापरवाही उजागर


छह साल में जीपीएम जिले की महिला समूहों को सिर्फ एक प्रशिक्षण
भ्रष्टाचार, प्रशासनिक उपेक्षा और नियमों की अनदेखी की भेंट चढ़ा रेशम विभाग
गौरेला–पेण्ड्रा–मरवाही (छत्तीसगढ़ उजाला)
आदिवासी एवं पिछड़े क्षेत्रों में स्वरोजगार, महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के उद्देश्य से गठित रेशम अनुसंधान विकास एवं प्रशिक्षण विभाग जीपीएम जिले में अपने मूल उद्देश्यों से पूरी तरह भटकता नजर आ रहा है।फरवरी माह में जिले के गठन को पूरे छह वर्ष होने जा रहे हैं, लेकिन रेशम विभाग की कार्यप्रणाली आज भी पुराने जिले बिलासपुर के सहारे चल रही है।
जिले में आज तक नहीं खुला रेशम विभाग का कार्यालय
जिले के गठन के बाद भी रेशम विभाग का अलग कार्यालय जीपीएम में स्थापित नहीं किया गया |
संयुक्त संचालक, रेशम अनुसंधान विकास एवं प्रशिक्षण कार्यालय
कोसा कारखाना परिसर, कोनी, बिलासपुर से ही किया जा रहा है।इसका सीधा असर जिले के पांचों शासकीय रेशम केंद्रों पर पड़ रहा है, जो या तो बदहाली का शिकार हैं या केवल कागजों में संचालित दिखाए जा रहे हैं।
छह साल में सिर्फ एक प्रशिक्षण, वह भी खानापूर्ति
सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार बीते छह वर्षों में जीपीएम जिले में महिला स्व-सहायता समूहों और बेरोजगार युवाओं के लिए केवल एक ही प्रशिक्षण आयोजित किया गया—
प्रशिक्षण स्थल: बारी उमरांव
महिला समूह: नवागांव रेशम कृमि पालन महिला समूह
प्रशिक्षण प्रकार: 10 दिवसीय धागा करण प्रशिक्षण
अवधि: 16 जनवरी 2024 से 25 जनवरी 2024
लाभान्वित महिलाएं: मात्र 20
इतने बड़े जिले में केवल 20 महिलाओं को प्रशिक्षण देना विभाग की महिला सशक्तिकरण के प्रति उदासीनता को साफ दर्शाता है।86 हजार की राशि जारी, 80 हजार खर्च… GST गायब,प्रशिक्षण आयोजन के लिए सहायक संचालक रेशम कार्यालय, बिलासपुर द्वारा 86 हजार रुपये की राशि जारी की गई।
खर्च का विवरण कई सवाल खड़े करता है—
चाय-नाश्ता एवं भोजन
राशि: 50 हजार रुपये
फर्म: अभिषेक शुद्ध शाकाहारी भोजनालय, पेंड्रा
बिल: बिना GST
कोकून (रेशम कीट बीज) खरीदी
राशि: 30 हजार रुपये
संस्था: छत्तीसगढ़ खादी एवं ग्रामोद्योग विभाग, रायपुर
बिल: बिना GST
बड़ा सवाल
सरकारी भुगतान बिना GST कैसे किया गया?
क्या वित्तीय नियम केवल कागजों तक सीमित हैं?
सील में आज भी “बिलासपुर”, बड़े घोटाले की आशंका
नवागांव रेशम कृमि पालन महिला समूह की सील में आज भी जिला “बिलासपुर” अंकित है, जबकि—जीपीएम जिला बने चार साल से अधिक हो चुके हैं,शासकीय रिकॉर्ड में जिला परिवर्तन अनिवार्य है,यह स्थिति कागजी हेराफेरी, गलत दस्तावेजीकरण और संभावित बड़े आर्थिक घोटाले की ओर इशारा करती है।
पांच रेशम केंद्र बदहाल, एक तीन साल से बंद
जीपीएम जिले के सभी पांच शासकीय रेशम केंद्र अब भी सहायक संचालक रेशम, बिलासपुर के अधीन हैं।
जमीनी हालात बेहद चिंताजनक हैं—अधिकांश केंद्र महिला समूहों के नाम स्वीकृत संचालन पुरुषों द्वारा मनमाने ढंग से
पथर्री रेशम केंद्र तीन वर्षों से बंद, फिर भी कागजों में चालू
केंद्र परिसर आवारा मवेशियों का डेरा बने देखरेख के अभाव में उत्पादन लगातार गिरावट पर
कर्मचारी नदारद, निरीक्षण केवल कागजों में
स्थानीय लोगों और सूत्रों का आरोप है—
रेशम केंद्रों पर कर्मचारी नियमित रूप से मौजूद नहीं
महिला समूहों की गतिविधियां नगण्य
गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण पूरी तरह शून्य
निरीक्षण सिर्फ फाइलों में दिखाया जाता है
अधिकारियों का जिले से दूरी बनाए रखना
सूत्रों के अनुसार—वरिष्ठ रेशम अधिकारी संजय तिवारी दो–तीन महीने में एक बार ही दौरा करते हैं,सहायक संचालक भजन लाल उईके साल–साल भर निरीक्षण के लिए नहीं आते
जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ते अधिकारी
जब इस पूरे मामले में सहायक संचालक भजन लाल उईके से बात की गई तो उन्होंने कहा—“मुझे इस मामले की कोई जानकारी नहीं है।”सूत्र बताते हैं कि फील्ड की जिम्मेदारी प्रभारी सूर्यसुंशी को सौंपी गई है, लेकिन वे भी मौके पर निरीक्षण के लिए नहीं पहुंचते।
अब भी कायम हैं बड़े सवाल
बिना GST भुगतान कैसे हुआ?
जिले के नाम की सील अब तक अपडेट क्यों नहीं?
बंद रेशम केंद्र कागजों में कैसे चालू दिखाए जा रहे हैं?
करोड़ों के बजट का लाभ महिलाओं तक क्यों नहीं पहुंचा?
जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई कब होगी?
अब निगाहें शासन–प्रशासन पर
इस गंभीर खुलासे के बाद अब देखना यह होगा कि शासन–प्रशासन रेशम विभाग की कार्यप्रणाली पर ठोस और निष्पक्ष कार्रवाई करता है या फिर आदिवासी जिले की महिलाओं और युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने का सपना फाइलों में ही दबकर रह जाएगा।

प्रशांत गौतम

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