गौरेला पेंड्रा मरवाहीछत्तीसगढ

गौरेला–पेंड्रा–मरवाही – शासकीय भूमि पर अवैध कब्जे का खेल, कार्रवाई के बाद फिर शुरू हुआ निर्माण—मिलीभगत पर उठे गंभीर सवाल


गौरेला–पेंड्रा–मरवाही (छत्तीसगढ़ उजाला)-जिले के ग्राम पंचायत पदगवां में शासकीय भूमि पर अवैध कब्जे का मामला प्रशासनिक कार्रवाई के बावजूद थमता नजर नहीं आ रहा है। गुरुवार को प्रशासन और पंचायत के संयुक्त प्रयास से शासकीय भूमि को कब्जे से मुक्त कराने की कार्रवाई की गई, लेकिन इसके कुछ ही समय बाद उसी भूमि पर दोबारा निर्माण शुरू हो जाना पूरे मामले को संदिग्ध बना रहा है।
जानकारी के अनुसार ग्राम के खसरा नंबर 874/2 की भूमि, जो स्पष्ट रूप से शासकीय खाते में दर्ज है, वर्षों से एक स्थानीय व्यक्ति के अवैध कब्जे में थी। कब्जाधारी ने न केवल इस भूमि पर निर्माण कार्य शुरू कर दिया, बल्कि नियमों को ताक पर रखते हुए हाल ही में इसे तीसरे व्यक्ति को बेच भी दिया। हैरानी की बात यह है कि खरीदार ने भी बिना किसी वैधानिक अनुमति के निर्माण कार्य प्रारंभ कर दिया, जिससे गांव में तनाव की स्थिति बन गई।
मामले की गंभीरता को देखते हुए ग्राम पंचायत के सरपंच और सभी पंचों की सहमति से इसे प्रशासन के संज्ञान में लाया गया। इसके बाद तहसीलदार और पटवारी ने मौके पर पहुंचकर राजस्व अभिलेखों की जांच की। जांच में यह स्पष्ट हुआ कि संबंधित भूमि शासकीय है और न तो इसका विक्रय संभव है और न ही निजी निर्माण की अनुमति दी जा सकती है। इसके बाद तहसीलदार द्वारा निर्माण कार्य तत्काल बंद कराने के निर्देश दिए गए।
लेकिन कार्रवाई के कुछ ही समय बाद उसी भूमि पर फिर से निर्माण कार्य शुरू हो जाना कई गंभीर सवाल खड़े करता है। सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि जब प्रशासन द्वारा कार्य बंद कराया गया था, तो फिर किसके संरक्षण में दोबारा निर्माण शुरू हुआ? क्या इसमें ग्राम पंचायत स्तर पर किसी की भूमिका है, या फिर प्रशासनिक उदासीनता अथवा मिलीभगत सामने आ रही है?
ग्रामीणों का कहना है कि यदि शासकीय भूमि पर इस तरह खुलेआम कब्जा और निर्माण जारी रहा, तो इससे शासन की नीयत और कानून व्यवस्था पर सीधा सवाल खड़ा होता है। ग्रामीणों ने मांग की है कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराई जाए, दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो और अवैध निर्माण को तत्काल एवं स्थायी रूप से रोका जाए।
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जिला प्रशासन इस गंभीर मामले को कितनी प्राथमिकता देता है और शासकीय भूमि को अवैध कब्जे से मुक्त कराने के लिए क्या ठोस और निर्णायक कदम उठाए जाते हैं।

प्रशांत गौतम

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