
बिलासपुर(छत्तीसगढ़ उजाला)-छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने शिक्षाकर्मियों से जुड़ा एक अहम फैसला सुनाते हुए पंचायत नियमों के तहत नियुक्त 1188 शिक्षाकर्मियों की सभी याचिकाएं खारिज कर दी हैं। इस फैसले से शिक्षाकर्मियों को बड़ा कानूनी झटका लगा है। अदालत ने साफ कहा कि पंचायत शिक्षाकर्मी तब तक ‘शासकीय सेवक’ नहीं माने जा सकते, जब तक उनका स्कूल शिक्षा विभाग में संविलियन नहीं हो जाता।
यह महत्वपूर्ण निर्णय जस्टिस नरेंद्र कुमार व्यास की सिंगल बेंच ने “आभा नामदेव व अन्य बनाम छत्तीसगढ़ राज्य” प्रकरण की सुनवाई के दौरान दिया।
हाईकोर्ट ने कहा –
1. शिक्षाकर्मी सरकारी सेवक नहीं, जब तक संविलियन न हो
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पंचायतों द्वारा नियुक्त शिक्षाकर्मियों की सेवा शर्तें और कैडर, नियमित सरकारी शिक्षकों से अलग थे। इस कारण 1 जुलाई 2018 को संविलियन होने से पहले तक उन्हें सरकारी कर्मचारी नहीं माना जा सकता।
2. क्रमोन्नति लाभ का कोई अधिकार नहीं
याचिकाकर्ताओं ने मांग की थी कि पंचायत शिक्षक के रूप में 10 वर्ष की सेवा पूरी होने पर प्रथम और द्वितीय क्रमोन्नति दी जाए।
उन्होंने सामान्य प्रशासन विभाग के 10 मार्च 2017 के सर्कुलर और सोना साहू केस का हवाला दिया था।
कोर्ट ने कहा कि—
1999 की क्रमोन्नति योजना और वर्ष 2017 का सर्कुलर केवल नियमित सरकारी कर्मचारियों पर लागू होता है।
पंचायत शिक्षाकर्मियों पर यह लागू नहीं किया जा सकता।
3. पिछली पंचायत सेवा को सरकारी लाभ में नहीं जोड़ा जा सकता
कोर्ट ने राज्य सरकार की दलील से सहमति जताई कि
संविलियन नीति में साफ लिखा है कि सभी सेवा लाभ संविलियन की तारीख से ही मिलेंगे।
इसलिए पंचायत सेवा के वर्षों को क्रमोन्नति या अन्य सरकारी लाभों के लिए नहीं जोड़ा जा सकता।
राज्य सरकार की दलीलें कोर्ट ने मानीं
अतिरिक्त महाधिवक्ता ने बताया कि—
शिक्षाकर्मी स्थानीय निकाय (पंचायत) द्वारा नियुक्त थे।
उनका कैडर नियमित सरकारी शिक्षकों से पूरी तरह अलग था।
नियुक्ति प्रक्रिया, सेवा शर्तें और नियम भी अलग थे।
कोर्ट ने भी माना कि यही कारण है कि पंचायत शिक्षाकर्मियों को संविलियन से पहले सरकारी कर्मचारी नहीं माना जा सकता।
कुल 1188 याचिकाएं खारिज
विस्तृत कानूनी विश्लेषण के बाद न्यायालय ने सभी 1188 याचिकाएं खारिज करते हुए कहा कि—
> “पंचायत सेवा अवधि के आधार पर शिक्षाकर्मी किसी भी प्रकार के शासकीय सेवक वाले लाभ—विशेषकर क्रमोन्नति—के पात्र नहीं हैं।”
फैसले का प्रभाव
यह आदेश बड़ी संख्या में शिक्षाकर्मियों को प्रभावित करेगा, जो पंचायत शिक्षक के रूप में बिताए गए वर्षों को सरकारी सेवा लाभ में जोड़ने की उम्मीद कर रहे थे।
हाईकोर्ट का यह फैसला भविष्य में होने वाली शिक्षाकर्मियों की सभी समान याचिकाओं के लिए भी मिसाल का काम करेगा।



