कबीरधाम (कवर्धा)छत्तीसगढ

अमानक स्पीड ब्रेकर बने खतरा : बढ़ रहे स्पाइन इंजरी और गर्भस्थ शिशु पर खतरे, विशेषज्ञों ने दी कड़ी चेतावनी
— हाईकोर्ट के आदेशों की हो रही अनदेखी, नागरिकों ने उठाई सख़्त कार्रवाई की मांग


चंद्र शेखर शर्मा, कवर्धा।
(छत्तीसगढ़ उजाला)-कबीरधाम जिले में सड़कों पर धड़ल्ले से बनाए जा रहे अमानक गति-रोधक (स्पीड ब्रेकर) लोगों के लिए गंभीर खतरा बनते जा रहे हैं। बिना किसी इंजीनियरिंग मानक, ऊँचाई-चौड़ाई की सीमा और चेतावनी संकेतों के ये ब्रेकर वाहन चालकों को अचानक झटका देते हैं, जिसके कारण स्पाइन इंजरी के मामलों में लगातार वृद्धि दर्ज की जा रही है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि यह खतरा गर्भवती महिलाओं और उनके गर्भस्थ शिशु तक के लिए जानलेवा साबित हो सकता है।

स्पाइन इंजरी बढ़ी, ऑपरेशन तक की नौबत

कवर्धा के प्रमुख अस्थिरोग विशेषज्ञ डॉ. अतुल जैन बताते हैं कि अमानक ब्रेकर सबसे ज्यादा दोपहिया सवारों, बुज़ुर्गों और गठिया के मरीजों के लिए खतरनाक हैं।
उन्होंने कहा—
“अचानक लगने वाले झटकों से सर्वाइकल और लम्बर स्पाइन पर अत्यधिक दबाव पड़ता है, जिससे डिस्क प्रोलैप्स, नस दबना, सायटिका और पुराना कमर दर्द बढ़ रहा है। कई मामलों में मरीजों को सर्जरी तक करानी पड़ रही है, गंभीर स्थिति में लकवे का खतरा भी पैदा हो सकता है।”

डॉ. जैन ने यह भी बताया कि हाल के वर्षों में L4–L5 स्लीप डिस्क और रीढ़ की चोटों में तेजी से बढ़ोतरी हुई है और इसका मुख्य कारण खराब तरीके से बने ब्रेकर ही हैं।

गर्भवती महिलाओं के लिए “जानलेवा झटके”

शहर की प्रसिद्ध स्त्रीरोग विशेषज्ञ डॉ. रानी संगीत जैन के अनुसार—
“गर्भावस्था में ब्रेकर पर अचानक झटका लगने से गर्भ में पल रहे शिशु को चोट लग सकती है। कई बार ऐसे झटके जच्चा और बच्चा दोनों के लिए खतरे का कारण बन जाते हैं। गर्भवती महिलाओं को ऐसे ब्रेकरों पर विशेष सावधानी जरूरी है।”

बिना संकेत वाले ब्रेकर बन रहे हादसों का कारण

स्थानीय निवासी सतीश कुमार का कहना है कि कई स्थानों पर ब्रेकर रात में बिल्कुल दिखाई नहीं देते, क्योंकि उन पर न पेंट है न चेतावनी बोर्ड। हाल ही में डॉ. मिश्रा हॉस्पिटल के पास ओला सवार गिरकर घायल हो गया, वाहन भी क्षतिग्रस्त हुआ।

चारपहिया वाहन चालक हेमंत का कहना है—
“मानक ब्रेकर से कोई दिक्कत नहीं, लेकिन शहर में लगे ब्रेकरों में न नियम है, न संकेत। इन्हें रात में देखना मुश्किल होता है, अचानक ब्रेक लगाने पर वाहन असंतुलित हो जाते हैं।”

हादसों का खतरा बढ़ा, प्रशासन पर लापरवाही का आरोप

स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि हाईकोर्ट के स्पष्ट आदेश होने के बावजूद प्रमुख सड़कों, राज्य मार्गों और शहर की गलियों को अमानक ब्रेकरों से पाट दिया गया है।

लोगों ने चेतावनी दी—
“ये ब्रेकर हादसों को न्यौता दे रहे हैं, लेकिन प्रशासन आंखें मूंदे बैठा है। कोर्ट के आदेश, कानून की गरिमा और जनता की सुरक्षा—तीनों को ताक पर रख दिया गया है।”

सवाल उठ रहा है—क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है? जवाब कौन देगा?

नागरिकों ने जिला प्रशासन और संबंधित विभागों से फौरन एक्शन, अमानक ब्रेकरों को हटाने और मानक अनुसार नए ब्रेकर बनाने की मांग की है।

प्रशांत गौतम

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