
बिलासपुर, 13 नवंबर 2025। राज्य सूचना आयुक्त की नियुक्ति को लेकर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए नियुक्ति प्रक्रिया पर लगी रोक को हटा दिया है और राज्य सरकार के निर्णय को पूर्णतः वैध ठहराया है। अदालत ने स्पष्ट कहा कि सर्च कमेटी द्वारा निर्धारित 25 वर्ष के अनुभव की शर्त न तो मनमानी है और न ही अवैध।
जस्टिस नरेंद्र कुमार व्यास की सिंगल बेंच ने कहा कि किसी पद के लिए बड़ी संख्या में आवेदन आने पर शॉर्टलिस्टिंग चयन प्रक्रिया का स्वाभाविक और आवश्यक हिस्सा होती है। इसलिए सर्च कमेटी द्वारा निर्धारित अनुभव की शर्त विधिक रूप से उचित है।
गौरतलब है कि अनिल तिवारी, राजेंद्र कुमार पाठक और डॉ. दिनेश्वर प्रसाद सोनी ने अलग-अलग याचिकाएं दायर कर इस नियुक्ति प्रक्रिया को चुनौती दी थी। उनका तर्क था कि चयन प्रक्रिया शुरू होने के बाद अनुभव की नई शर्त जोड़ना “खेल के बीच नियम बदलने” जैसा है और आरटीआई एक्ट 2005 की धारा 15(5) व 15(6) में अनुभव की न्यूनतम अवधि का कोई उल्लेख नहीं है, ऐसे में 25 वर्ष की अनिवार्यता विधिक प्रावधानों के खिलाफ है।
हालांकि, सर्च कमेटी ने 9 मई 2025 को यह निर्णय लिया था कि केवल वे उम्मीदवार इंटरव्यू के लिए योग्य होंगे जिनके पास विधि, विज्ञान, प्रौद्योगिकी, समाजसेवा, प्रबंधन, पत्रकारिता, जनसंपर्क, प्रशासन या शासन के क्षेत्र में कम से कम 25 वर्षों का अनुभव हो और जिनकी आयु 65 वर्ष से कम हो।
राज्य सरकार ने अपने पक्ष में कहा कि सर्च कमेटी का निर्णय आरटीआई अधिनियम की भावना के अनुरूप है, जिसमें सूचना आयुक्त के लिए “व्यापक ज्ञान और अनुभव” आवश्यक बताया गया है। सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि योग्यताओं और अनुभव के मानदंड तय करना सर्च कमेटी का अधिकार है।
हाईकोर्ट के इस फैसले से राज्य सूचना आयुक्त की नियुक्ति प्रक्रिया अब आगे बढ़ सकेगी।




