छत्तीसगढरायपुर

“यूनिटी मार्च” में भाजपा की एकता पर बिखराव — अनुशासन हुआ लापता!
विधायक सुशांत शुक्ला और नेत्री हर्षिता पांडे के बीच तीखी बहस, केंद्रीय मंत्री को करना पड़ा हस्तक्षेप


रायपुर(छत्तीसगढ़ उजाला)-भारतीय जनता पार्टी के “यूनिटी मार्च” का उद्देश्य जहां संगठन में एकता और अनुशासन का संदेश देना था, वहीं कार्यक्रम के दौरान ऐसा नजारा देखने को मिला जिसने पार्टी की एकता पर सवाल खड़े कर दिए। आयोजन के दौरान भाजपा विधायक सुशांत शुक्ला और महिला मोर्चा की प्रदेश नेत्री हर्षिता पांडे के बीच मंच के नीचे तीखी बहस हो गई। स्थिति इतनी बिगड़ गई कि केंद्रीय मंत्री को बीच में आकर दोनों नेताओं को समझाना पड़ा।

कैसे शुरू हुआ विवाद

सूत्रों के अनुसार, “यूनिटी मार्च” में जुलूस के दौरान आगे चलने की जगह और नेतृत्व को लेकर विधायक सुशांत शुक्ला और हर्षिता पांडे के बीच मतभेद हुआ। देखते ही देखते बहस तेज हो गई और दोनों ओर से समर्थक भी बीच में उतर आए। सड़क पर ही दोनों पक्षों के बीच तीखी नोकझोंक और बहसबाजी होती रही।

मौके पर मौजूद वरिष्ठ नेताओं ने तत्काल स्थिति संभालने की कोशिश की, मगर तब तक मामला पार्टी की अनुशासन रेखा से काफी आगे निकल चुका था। अंततः केंद्रीय मंत्री ने हस्तक्षेप कर दोनों नेताओं को शांत कराया और अनुशासन बनाए रखने की हिदायत दी।

मंच पर एकता का संदेश, सड़क पर विवाद

मंच से जहां “एकता और अनुशासन” का संदेश दिया जा रहा था, वहीं सड़क पर पार्टी के दो प्रमुख नेताओं के बीच टकराव ने पूरे आयोजन को चर्चा का विषय बना दिया। कार्यकर्ताओं के बीच इस घटना को लेकर नाराजगी देखने को मिली। कई कार्यकर्ताओं ने कहा कि इस तरह की घटनाएं पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचाती हैं और संगठन की गरिमा को ठेस पहुंचाती हैं।

प्रदेश नेतृत्व सख्त

घटना के बाद प्रदेश भाजपा नेतृत्व ने इस मामले को गंभीरता से लिया है। सूत्रों के अनुसार, संगठन ने घटना की रिपोर्ट तलब की है और जल्द ही संबंधित नेताओं से स्पष्टीकरण मांगा जा सकता है।
पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारियों का कहना है कि भाजपा में अनुशासन सर्वोपरि है, और सार्वजनिक मंच पर ऐसे व्यवहार को कतई स्वीकार नहीं किया जाएगा।

कार्यकर्ताओं में चर्चा

“यूनिटी मार्च” के दौरान हुई यह बहस अब सोशल मीडिया पर भी चर्चा का विषय बन गई है। कार्यकर्ता सवाल उठा रहे हैं कि जब पार्टी “एकता” का संदेश देने निकली थी, तब भीतर ही अंदरूनी मतभेदों ने क्यों सिर उठाया।

प्रशांत गौतम

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