महादेव सट्टा सिंडिकेट का सरगना सौरभ चंद्राकर भारत पहुंचा, CBI कोर्ट में होगी पेशी; अब खुलेगा ‘प्रोटेक्शन मनी’ का राज!
करोड़ों के ऑनलाइन सट्टे से लेकर पुलिस और तत्कालीन सत्ता के गलियारों तक पहुंची रकम की जांच तेज, CBI की पूछताछ में बिचौलियों, हवाला नेटवर्क और कथित संरक्षण व्यवस्था की परतें खुलने की उम्मीद
रायपुर(छत्तीसगढ़ उजाला)-छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित महादेव ऑनलाइन सट्टा मामले में एक बार फिर बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। ऑनलाइन सट्टा सिंडिकेट के प्रमुख संचालक सौरभ चंद्राकर के ओमान की राजधानी मस्कट से भारत पहुंचने के बाद अब इस पूरे नेटवर्क की जांच निर्णायक मोड़ पर पहुंचती दिखाई दे रही है। सोमवार को उसे रायपुर की विशेष CBI अदालत में पेश किया जाना है। इसके बाद जांच एजेंसी उससे रिमांड पर पूछताछ कर सकती है।
सौरभ चंद्राकर की वापसी के साथ ही महादेव सट्टा मामले में कथित तौर पर चल रही करोड़ों रुपये की ‘प्रोटेक्शन मनी’ व्यवस्था एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गई है। CBI की ताजा प्रेस विज्ञप्ति में उल्लेख किया गया है कि ऑनलाइन सट्टे से अर्जित रकम का एक हिस्सा सरकारी कर्मचारियों और लोकसेवकों को संरक्षण राशि के रूप में दिया जाता था। जांच का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यही है कि आखिर इस रकम का पूरा हिसाब क्या था, किन लोगों तक पैसा पहुंचाया जाता था और इस कथित संरक्षण व्यवस्था के पीछे कौन-कौन लोग सक्रिय थे?
सट्टे की कमाई, हवाला और प्रोटेक्शन मनी का नेटवर्क
महादेव ऑनलाइन ऐप का कारोबार क्रिकेट, फुटबॉल सहित विभिन्न खेलों पर ऑनलाइन सट्टा खिलाने वाले पैनलों और फ्रेंचाइजी के माध्यम से देशभर में फैलाया गया था। अलग-अलग राज्यों में एजेंट और ब्रांच संचालक लोगों से दांव की रकम एकत्र करते थे। इस रकम को कथित तौर पर म्यूल बैंक खातों के जरिए कई स्तरों पर घुमाया जाता था और फिर हवाला नेटवर्क के माध्यम से विदेश भेजा जाता था।
जांच एजेंसियों के अनुसार, इस अवैध कारोबार से होने वाली कमाई का एक हिस्सा कथित तौर पर सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों तक संरक्षण राशि के रूप में पहुंचाया जाता था। इसका उद्देश्य पुलिस कार्रवाई और प्रशासनिक बाधाओं से कारोबार को सुरक्षित रखना बताया गया है।
इस पूरी व्यवस्था में रकम पहुंचाने के लिए बिचौलियों, संपर्क सूत्रों और हवाला कारोबारियों की अलग-अलग कड़ियां सक्रिय होने की बात सामने आई है। यही वजह है कि अब सौरभ चंद्राकर से पूछताछ केवल सट्टे के कारोबार तक सीमित नहीं रहने वाली, बल्कि कथित संरक्षण तंत्र की पूरी श्रृंखला की पड़ताल भी महत्वपूर्ण होगी।
पुलिस अधिकारियों के नाम और हर महीने लाखों रुपये पहुंचने के दावे
महादेव सट्टा मामले में जांच से जुड़े बयानों और सामने आए दस्तावेजों में पुलिस विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारियों के नाम और कथित मासिक भुगतान का उल्लेख किया गया है। इन दावों के अनुसार तत्कालीन ASP अभिषेक माहेश्वरी को 35 लाख रुपये प्रतिमाह, तत्कालीन IG आनंद छाबड़ा को 20 लाख रुपये, तत्कालीन IG आरिफ शेख को 20 लाख रुपये, तत्कालीन SSP प्रशांत अग्रवाल को 20 लाख रुपये और ASP संजय ध्रुव को 25 लाख रुपये प्रतिमाह दिए जाने की बात कही गई है।
इन कथित भुगतानों के सामने आने के बाद महादेव मामले में पुलिस और प्रशासनिक तंत्र की भूमिका को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए थे। हालांकि, इन रकमों और संबंधित व्यक्तियों की भूमिका को जांच में सामने आए आरोपों एवं बयानों के संदर्भ में ही देखा जाना जरूरी है। इनका उल्लेख अपने आप में किसी व्यक्ति के विरुद्ध दोष सिद्ध होने का प्रमाण नहीं है।
मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुंची कथित भुगतान व्यवस्था
महादेव मामले की जांच में तत्कालीन मुख्यमंत्री कार्यालय से जुड़े कुछ नाम भी सामने आए थे। जांच से संबंधित दावों में तत्कालीन उप सचिव सौम्या चौरसिया के नाम पर एक करोड़ रुपये और पूर्व OSD डॉ. सूरज कुमार कश्यप के नाम पर 35 लाख रुपये की कथित रकम का उल्लेख किया गया है।
इसके अलावा तत्कालीन मुख्यमंत्री के राजनीतिक सलाहकार विनोद वर्मा को भी महादेव ऐप के प्रमोटरों से बड़ी रकम मिलने के आरोप सामने आए थे।
इन नामों के सामने आने से मामला केवल ऑनलाइन सट्टे के अवैध कारोबार तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसकी कथित पहुंच पुलिस मुख्यालय से लेकर तत्कालीन मुख्यमंत्री कार्यालय तक होने के आरोपों ने राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल पैदा कर दी।
महादेव सिंडिकेट की कथित भुगतान व्यवस्था में रकम प्राप्त करने वालों के साथ-साथ उसे पहुंचाने वाले लोगों की भूमिका भी जांच के दायरे में रही है।
जांच से जुड़े बयानों में अभिषेक माहेश्वरी तक संदीप दीक्षित, रोहित उप्पल, राहुल उप्पल और प्रशांत त्रिपाठी के माध्यम से रकम पहुंचाए जाने का उल्लेख है। वहीं IPS अधिकारियों आरिफ शेख और प्रशांत अग्रवाल के कथित भुगतान का हिसाब रखने की जिम्मेदारी भी अभिषेक माहेश्वरी पर होने की बात सामने आई है।
इसी तरह अभिषेक पल्लव तक आरक्षक भीम यादव, संजय ध्रुव तक आरक्षक अमित दुबे और तत्कालीन उप सचिव सौम्या चौरसिया तक मनीष उपाध्याय के माध्यम से रकम पहुंचाए जाने के दावे जांच से जुड़े दस्तावेजों में दर्ज बताए गए हैं।
जून 2023 में पुलिस कार्रवाई से बचने के लिए सुनील कुमार जैन के माध्यम से राहुल और रोहित को नकद रकम दिए जाने का भी उल्लेख है। वहीं रवि उप्पल, प्रशांत त्रिपाठी और सुनील कुमार जैन के जरिए हवाला माध्यम से अधिकारियों तक रकम पहुंचाने की बात भी सामने आई है।
इससे स्पष्ट होता है कि जांच का एक महत्वपूर्ण पहलू कथित भुगतान श्रृंखला को जोड़ना है। आखिर किसने रकम जुटाई, किसने पहुंचाई, किसने हिसाब रखा और इस पूरी व्यवस्था को किस स्तर से संचालित किया गया?
508 करोड़ रुपये का आरोप, विधानसभा चुनाव से पहले मचा था सियासी भूचाल
नवंबर 2023 में छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के पहले चरण के मतदान से ठीक पहले महादेव ऐप का मामला राष्ट्रीय राजनीति में सुर्खियों में आ गया था। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने असीम दास को 5.39 करोड़ रुपये नकद के साथ पकड़ा था।
इसके बाद महादेव ऐप से जुड़े शुभम सोनी के ईमेल और बयान के आधार पर तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को 508 करोड़ रुपये दिए जाने का आरोप सामने आया था। शुभम सोनी ने अपने वीडियो में भी तत्कालीन मुख्यमंत्री और उनके करीबी लोगों तक रकम पहुंचाने का दावा किया था।
हालांकि, असीम दास बाद में अपने बयान से पलट गया था। इसके बावजूद 508 करोड़ रुपये का कथित भुगतान इस मामले का सबसे चर्चित और राजनीतिक रूप से संवेदनशील पहलू बना हुआ है। इस आरोप की वास्तविकता और इसमें शामिल लोगों की भूमिका जांच का विषय है।
26 मार्च 2025 को CBI की बड़ी कार्रवाई, कई रसूखदारों के ठिकानों पर छापे
महादेव ऑनलाइन सट्टा मामले की जांच आगे बढ़ाते हुए 26 मार्च 2025 को CBI ने छत्तीसगढ़ सहित कई राज्यों में बड़े पैमाने पर छापेमारी की थी। इस कार्रवाई में तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, पूर्व IAS अनिल टुटेजा, सौम्या चौरसिया सहित कई लोगों से जुड़े ठिकानों की तलाशी ली गई थी।
इसके अलावा IPS अधिकारी आनंद छाबड़ा, आरिफ शेख, प्रशांत अग्रवाल और अभिषेक पल्लव से जुड़े ठिकाने भी जांच एजेंसी की कार्रवाई के दायरे में आए थे।
इस कार्रवाई ने साफ संकेत दिया था कि जांच का दायरा केवल महादेव ऐप के संचालकों और प्रमोटरों तक सीमित नहीं है। एजेंसी कथित तौर पर सट्टे के कारोबार को संरक्षण देने वाले नेटवर्क, वित्तीय लेनदेन और उससे जुड़े संपर्क सूत्रों की भी पड़ताल कर रही है।
दो CBI मामलों में चार्जशीटेड है सौरभ, अब पूछताछ पर टिकी निगाहें
CBI की प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक सौरभ चंद्राकर दो CBI मामलों में चार्जशीटेड है। इसके अलावा ED के एक मामले में भी उसके खिलाफ अभियोजन शिकायत दाखिल की गई है।
जुलाई 2026 में CBI ने भ्रष्टाचार से जुड़े मामले में छह आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। वहीं सिंडिकेट के 66 सदस्यों के खिलाफ पांच अन्य चार्जशीट भी दाखिल किए जाने की जानकारी सामने आई थी।
अब सौरभ चंद्राकर से पूछताछ में कई महत्वपूर्ण सवालों के जवाब तलाशे जाएंगे। कथित प्रोटेक्शन मनी का पूरा हिसाब क्या था? किन अधिकारियों और कर्मचारियों तक रकम पहुंचाई जाती थी? इस भुगतान व्यवस्था को कौन संचालित करता था? हवाला का नेटवर्क किन लोगों के नियंत्रण में था? और इस पूरे सिंडिकेट को राजनीतिक एवं प्रशासनिक स्तर पर कथित संरक्षण कहां से मिलता था?
सौरभ की वापसी से फिर खुल सकती है महादेव की पूरी फाइल
महादेव ऑनलाइन सट्टा मामला केवल करोड़ों रुपये के अवैध कारोबार का मामला नहीं रह गया है। इसने बैंकिंग लेनदेन, हवाला, बिचौलियों, पुलिस अधिकारियों और तत्कालीन राजनीतिक सत्ता से जुड़े गंभीर आरोपों को भी जांच के केंद्र में ला दिया है।
अब तक इस मामले में अलग-अलग आरोपियों, बिचौलियों और कथित संपर्क सूत्रों के बयान सामने आते रहे हैं। लेकिन सौरभ चंद्राकर को इस पूरे सिंडिकेट का प्रमुख चेहरा माना जाता है। ऐसे में जांच एजेंसी के सामने उसकी पूछताछ को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सबसे बड़ा सवाल अब यह नहीं है कि महादेव ऐप का साम्राज्य कितना बड़ा था, बल्कि यह है कि इस साम्राज्य को चलाने के लिए कथित तौर पर संरक्षण देने वाला पूरा तंत्र कितना गहरा था? सौरभ चंद्राकर की पूछताछ में क्या केवल सट्टे के कारोबार का हिसाब सामने आएगा या फिर प्रोटेक्शन मनी की वे परतें भी खुलेंगी, जिनकी आंच पुलिस और तत्कालीन सत्ता के गलियारों तक पहुंचने के आरोप लगते रहे हैं? छत्तीसगढ़ की निगाहें अब CBI की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।




