बोर्ड परीक्षा में बेहतर परिणाम के लिए प्राचार्य बनाएं विशेष कार्ययोजना: कलेक्टर विजय दयाराम के.
50 प्रतिशत से कम परिणाम वाले विद्यालयों पर कलेक्टर नाराज, कमजोर विद्यार्थियों के लिए लगेंगी अतिरिक्त कक्षाएं; हर माह दो बार होगी पालक-शिक्षक बैठक
गौरेला-पेंड्रा-मरवाही(छत्तीसगढ़ उजाला)-जिले में हाईस्कूल एवं हायर सेकेंडरी बोर्ड परीक्षाओं के परिणाम बेहतर बनाने के लिए प्रशासन ने तैयारी तेज कर दी है। कलेक्टर विजय दयाराम के. ने विद्यालयों के प्राचार्यों को विशेष कार्ययोजना तैयार कर उसे प्रभावी ढंग से लागू करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि विद्यार्थियों के शैक्षणिक स्तर में सुधार लाना और परीक्षा परिणाम बेहतर करना सभी विद्यालयों की प्राथमिकता होनी चाहिए। तिमाही परीक्षा में 50 प्रतिशत से कम परिणाम वाले विद्यालयों के प्रदर्शन पर नाराजगी जताते हुए कलेक्टर ने संबंधित प्राचार्यों को गंभीरता से प्रयास करने और आगामी परीक्षाओं में बेहतर परिणाम सुनिश्चित करने की हिदायत दी।
बुधवार, 14 अक्टूबर को जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डाइट), पेंड्रा में आयोजित समीक्षा बैठक में कलेक्टर ने जिले के हाईस्कूल एवं हायर सेकेंडरी विद्यालयों के तिमाही परीक्षा परिणामों की विद्यालयवार समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने कमजोर परीक्षा परिणाम वाले विद्यालयों में पढ़ाई की स्थिति सुधारने, विद्यार्थियों की नियमित निगरानी करने और कमजोर विद्यार्थियों को अतिरिक्त शैक्षणिक सहयोग उपलब्ध कराने पर जोर दिया।
समीक्षा के दौरान गुरुकुल पेंड्रारोड में बड़ी संख्या में विद्यार्थियों के अनुत्तीर्ण होने पर कलेक्टर ने संबंधित प्राचार्य के प्रति नाराजगी व्यक्त की। इसके साथ ही टीकरकला, जोगीसार, मिश्रीदेवी, पीएम श्री पेंड्रा, भर्रीडांड़, सेजेस सेमरा, पकरिया, साधवानी और कन्या मरवाही सहित अन्य कमजोर परिणाम वाले विद्यालयों के प्रदर्शन पर भी चिंता जताई।
कलेक्टर ने संबंधित प्राचार्यों को अगली समीक्षा बैठक तक परीक्षा परिणामों में सुधार लाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि विद्यालयों में केवल औपचारिक गतिविधियां संचालित करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना और उनकी वास्तविक सीखने की क्षमता में सुधार करना आवश्यक है। शिक्षकों को प्रत्येक विद्यार्थी की प्रगति पर ध्यान देते हुए कमजोरियों को दूर करने के लिए ठोस प्रयास करने होंगे।
कलेक्टर विजय दयाराम के. ने निर्देश दिए कि तिमाही परीक्षा के आधार पर कमजोर विद्यार्थियों की पहचान कर उनके लिए अतिरिक्त कक्षाएं संचालित की जाएं। जिन विषयों में विद्यार्थियों का प्रदर्शन कमजोर है, उन विषयों में अतिरिक्त अभ्यास, नियमित मूल्यांकन और शिक्षकों के मार्गदर्शन की व्यवस्था की जाए।
उन्होंने कहा कि प्रत्येक विद्यार्थी की शैक्षणिक प्रगति की नियमित समीक्षा होनी चाहिए, ताकि समय रहते उसकी कमियों को दूर किया जा सके। बोर्ड परीक्षाओं से पहले विद्यार्थियों को बेहतर तैयारी का अवसर उपलब्ध कराना जरूरी है। इसके लिए सभी प्राचार्य अपने विद्यालयों में स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित कर कार्ययोजना के अनुरूप कार्य करें।
इन बैठकों के माध्यम से अभिभावकों को बच्चों की पढ़ाई, उपस्थिति और परीक्षा परिणामों की वास्तविक स्थिति से अवगत कराया जाएगा। साथ ही, शिक्षकों और अभिभावकों के समन्वय से विद्यार्थियों की पढ़ाई में सुधार लाने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
कलेक्टर ने कहा कि दृढ़ इच्छाशक्ति, निरंतर प्रयास और बेहतर रणनीति के माध्यम से निर्धारित लक्ष्य हासिल किए जा सकते हैं। उन्होंने सभी प्राचार्यों को पूरी गंभीरता और जिम्मेदारी के साथ परीक्षा परिणाम सुधारने के लिए कार्य करने को कहा। साथ ही, जिले के सभी विद्यालयों की सतत मॉनिटरिंग ईडीयू के माध्यम से किए जाने की जानकारी दी।
बैठक में जिला शिक्षा अधिकारी रजनीश तिवारी ने विद्यार्थियों की ग्रेडिंग प्रणाली के संबंध में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि प्राप्त अंकों के आधार पर विद्यार्थियों को अलग-अलग ग्रेड प्रदान किए जाएंगे। निर्धारित व्यवस्था के अनुसार 80 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को ए ग्रेड, 61 से 80 प्रतिशत तक अंक प्राप्त करने वालों को बी ग्रेड, 41 से 60 प्रतिशत तक अंक प्राप्त करने वालों को सी ग्रेड तथा 40 प्रतिशत से कम अंक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को डी ग्रेड दिया जाएगा।
बैठक में जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी मुकेश रावटे, डाइट के प्रभारी प्राचार्य एन.के. तिवारी, विकासखंड शिक्षा अधिकारी पेंड्रा आर.एन. चंद्रा, मरवाही के विकासखंड शिक्षा अधिकारी संजय वर्मा, आलोक शुक्ला सहित जिले के सभी हाईस्कूल एवं हायर सेकेंडरी विद्यालयों के प्राचार्य उपस्थित रहे।
बोर्ड परीक्षा के परिणामों में सुधार को लेकर हुई इस समीक्षा बैठक में कलेक्टर ने स्पष्ट संदेश दिया कि कमजोर परीक्षा परिणाम वाले विद्यालयों को अब अतिरिक्त प्रयास करने होंगे। विद्यार्थियों की नियमित निगरानी, अतिरिक्त कक्षाओं और अभिभावकों की सहभागिता के जरिए जिले में शैक्षणिक गुणवत्ता बढ़ाने पर जोर रहेगा।



