गरबा आयोजनों में फूहड़ गानों पर अखिल भारतीय जनसंघ की आपत्ति, पारंपरिक भक्ति संगीत को प्राथमिकता देने की मांग

गोपाल भिसे बोले—गरबा मां दुर्गा की आराधना का पर्व, इसकी धार्मिक और सांस्कृतिक गरिमा बनाए रखना जरूरी; आयोजनों में सुरक्षा और मर्यादा सुनिश्चित करने की अपील
छत्तीसगढ़ उजाला।
नवरात्रि का पावन पर्व मां दुर्गा की आराधना, शक्ति की उपासना और भारतीय संस्कृति की समृद्ध परंपराओं का प्रतीक है। इस दौरान आयोजित होने वाले गरबा कार्यक्रमों का विशेष धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व है। हालांकि, गरबा आयोजनों में पारंपरिक देवी गीतों और भक्ति संगीत के स्थान पर कथित रूप से फूहड़, अश्लील एवं द्विअर्थी फिल्मी गानों के इस्तेमाल को लेकर अखिल भारतीय जनसंघ ने कड़ी आपत्ति जताई है। संगठन ने आयोजकों से गरबा की मूल भावना, धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक मर्यादा को बनाए रखने की अपील की है।
इस विषय पर चिंता व्यक्त करते हुए अखिल भारतीय जनसंघ के युवा मोर्चा के प्रदेश महामंत्री गोपाल भिसे ने कहा कि गरबा केवल नृत्य या मनोरंजन का कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह शक्ति स्वरूपा मां अंबा की आराधना और भारतीय सांस्कृतिक परंपरा से जुड़ा एक महत्वपूर्ण आयोजन है। ऐसे आयोजनों में देवी भजनों, पारंपरिक गुजराती गरबा गीतों और भक्तिमय संगीत को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि धार्मिक आयोजनों में सस्ती लोकप्रियता और व्यावसायिक लाभ के उद्देश्य से फूहड़, अश्लील अथवा द्विअर्थी गानों का इस्तेमाल करना उचित नहीं है। इससे पर्व की गरिमा प्रभावित होती है और नई पीढ़ी के सामने त्योहारों के मूल धार्मिक एवं सांस्कृतिक स्वरूप को लेकर गलत संदेश जाता है।
गरबा आयोजकों से पारंपरिक गीतों को प्राथमिकता देने की मांग
गोपाल भिसे ने गरबा आयोजकों से अपील की कि पंडालों में पारंपरिक गुजराती गरबा, देवी गीतों और भक्तिमय संगीत को प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने कहा कि गरबा का वातावरण ऐसा होना चाहिए, जहां श्रद्धालु पूरी आस्था के साथ मां दुर्गा की आराधना कर सकें और परिवार के साथ उत्सव में भाग ले सकें।
उन्होंने आयोजकों से फूहड़, अश्लील और द्विअर्थी फिल्मी गानों पर रोक लगाने, कार्यक्रम स्थल पर अनुशासन बनाए रखने तथा धार्मिक एवं सांस्कृतिक मर्यादाओं का पालन सुनिश्चित करने की मांग की। साथ ही, आयोजकों से अपील की कि गरबा पंडालों में महिलाओं और परिवारों की सुरक्षा के लिए भी पर्याप्त व्यवस्था की जाए।
पहचान सत्यापन और सुरक्षा व्यवस्था पर भी जताई चिंता
गरबा आयोजनों में आने वाले लोगों की पहचान और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी गोपाल भिसे ने अपनी बात रखी। उन्होंने मांग की कि आयोजक प्रवेश व्यवस्था को सुव्यवस्थित बनाएं और सभी प्रतिभागियों की पहचान सत्यापित करने के लिए उचित व्यवस्था करें। संगठन ने आधार कार्ड के माध्यम से पहचान की पुष्टि करने की मांग करते हुए कहा कि आयोजनों में सुरक्षा और अनुशासन को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
उन्होंने गरबा आयोजनों में कथित तौर पर लव जिहाद की आशंका का मुद्दा उठाते हुए आयोजकों से सतर्कता बरतने की अपील की। हालांकि, किसी भी व्यक्ति के प्रवेश से संबंधित निर्णय लागू कानूनों और प्रशासन के दिशा-निर्देशों के अनुरूप ही लिया जाना चाहिए।
प्रशासन से स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने की मांग
अखिल भारतीय जनसंघ ने स्थानीय प्रशासन से भी गरबा आयोजनों के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की है। संगठन का कहना है कि ध्वनि, संगीत, सुरक्षा और आयोजन की व्यवस्था से जुड़े नियमों का पालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए, ताकि धार्मिक आयोजनों की गरिमा बनी रहे और किसी प्रकार की अव्यवस्था की स्थिति निर्मित न हो।
गोपाल भिसे ने कहा कि यदि आयोजक सांस्कृतिक मर्यादाओं की अनदेखी करते हुए फूहड़ संगीत का इस्तेमाल जारी रखते हैं, तो अखिल भारतीय जनसंघ ऐसे आयोजनों का कड़ा विरोध करेगा।
संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण का आह्वान
उन्होंने कहा कि नवरात्रि केवल उत्सव मनाने का अवसर नहीं, बल्कि अपनी धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक विरासत और परंपराओं को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने का भी माध्यम है। इसलिए गरबा आयोजनों में मनोरंजन के साथ-साथ भक्ति, अनुशासन और मर्यादा का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए।
अखिल भारतीय जनसंघ ने आयोजकों, श्रद्धालुओं और प्रशासन से मिलकर गरबा आयोजनों को भक्तिमय, सुरक्षित और सांस्कृतिक मूल्यों के अनुरूप बनाने की अपील की है। संगठन का कहना है कि भारतीय संस्कृति और धार्मिक परंपराओं की गरिमा बनाए रखना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।




