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छत्तीसगढ़ शराब घोटाला: कांग्रेस के पूर्व कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल पर ED का बड़ा एक्शन, ₹9.06 करोड़ की संपत्ति अटैच

राजीव भवन तक 860 से 880 करोड़ रुपये की नकदी पहुंचाने का ED का दावा, रायपुर की विशेष PMLA अदालत में पूरक अभियोजन शिकायत दाखिल; मामले में कुल अटैच, जब्त और फ्रीज संपत्तियों का आंकड़ा 610.34 करोड़ रुपये के करीब पहुंचा

रायपुर (छत्तीसगढ़ उजाला)। छत्तीसगढ़ के कथित शराब घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पूर्व कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल के खिलाफ रायपुर की विशेष पीएमएलए अदालत में पूरक अभियोजन शिकायत दाखिल की है। जांच एजेंसी ने रामगोपाल अग्रवाल से संबंधित रायपुर स्थित दो अचल संपत्तियों को भी अस्थायी रूप से कुर्क किया है, जिनका कुल मूल्य 9.06 करोड़ रुपये बताया गया है। इस मामले में ED ने दावा किया है कि कथित शराब सिंडिकेट से प्राप्त 860 से 880 करोड़ रुपये की नकदी रायपुर स्थित कांग्रेस कार्यालय राजीव भवन तक पहुंचाई गई थी। हालांकि, ये सभी आरोप जांच एजेंसी के दावों पर आधारित हैं और इन पर अंतिम निर्णय न्यायालय में होना है।

ED के रायपुर जोनल कार्यालय ने 9 अक्टूबर को धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत रामगोपाल अग्रवाल के खिलाफ पूरक अभियोजन शिकायत दाखिल की। इससे एक दिन पहले, 8 अक्टूबर को एजेंसी ने रायपुर स्थित उनकी बताई गई दो अचल संपत्तियों के लिए अस्थायी कुर्की आदेश जारी किया था।

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, ED ने रामगोपाल अग्रवाल को 11 अगस्त को गिरफ्तार किया था और वह फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं। एजेंसी की कार्रवाई कथित शराब घोटाले से अर्जित अपराधजनित आय के इस्तेमाल और उसके संभावित लाभार्थियों की पहचान करने की जांच का हिस्सा है

छत्तीसगढ़ के कथित शराब घोटाले की जांच EOW/ACB रायपुर द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू हुई थी। इस मामले में अनिल टुटेजा, अनवर ढेबर, अरुण पति त्रिपाठी, कवासी लखमा सहित अन्य लोगों के नाम सामने आए हैं।

ED का आरोप है कि वर्ष 2019 से 2023 के बीच एक कथित शराब सिंडिकेट ने राज्य के आबकारी विभाग और छत्तीसगढ़ स्टेट मार्केटिंग कॉर्पोरेशन लिमिटेड (CSMCL) की व्यवस्था का दुरुपयोग कर अवैध कमाई की। जांच एजेंसी के अनुसार, देशी शराब की आपूर्ति, नकली होलोग्राम के माध्यम से बिना हिसाब-किताब वाली शराब की बिक्री, डिस्टिलर्स से कथित कमीशन वसूली और विदेशी शराब के लाइसेंस सिस्टम के जरिए 2,883 करोड़ रुपये से अधिक की अपराधजनित आय अर्जित की गई।

ED का दावा है कि इस कथित नेटवर्क के माध्यम से अर्जित रकम का इस्तेमाल विभिन्न स्तरों पर किया गया। एजेंसी अब इस राशि के लेन-देन, वितरण और इससे लाभ उठाने वाले लोगों की भूमिका की जांच कर रही है।

जांच के दौरान ED ने कथित नकदी लेन-देन को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। एजेंसी के मुताबिक, शराब सिंडिकेट से प्राप्त नकदी का बड़ा हिस्सा लक्ष्मी नारायण बंसल उर्फ पप्पू बंसल के पास रहता था। आरोप है कि रामगोपाल अग्रवाल के निर्देश पर यह रकम रायपुर के शंकर नगर स्थित कांग्रेस कार्यालय राजीव भवन पहुंचाई जाती थी।

ED का दावा है कि राजीव भवन में यह नकदी रामगोपाल अग्रवाल के अधीन कार्यरत अकाउंटेंट देवेंद्र दादसेना को सौंपी जाती थी। जांच एजेंसी के अनुसार, इस माध्यम से लगभग 860 से 880 करोड़ रुपये पहुंचाए गए। इसमें से करीब 72 करोड़ रुपये रामगोपाल अग्रवाल के नियंत्रण में रहने तथा उनके निर्देश पर इस्तेमाल या वितरित किए जाने का आरोप है।

यह जांच का अहम पहलू माना जा रहा है, क्योंकि एजेंसी कथित अवैध कमाई के स्रोत के साथ-साथ उसके अंतिम इस्तेमाल और लाभार्थियों की भूमिका का पता लगाने में जुटी है। हालांकि, नकदी के लेन-देन और संबंधित व्यक्तियों की भूमिका को लेकर ED के आरोपों पर न्यायालय में न्यायिक परीक्षण होना बाकी है।

ED ने रायपुर के अनुपम नगर और कटोरा तालाब स्थित दो फ्लैटों को अस्थायी रूप से अटैच किया है। इन दोनों संपत्तियों का कुल मूल्य 9.06 करोड़ रुपये बताया गया है।

जांच एजेंसी के अनुसार, कार्रवाई के समर्थन में डिजिटल रिकॉर्ड, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) और PMLA की धारा 50 के तहत दर्ज बयानों का सहारा लिया गया है। एजेंसी इन साक्ष्यों के आधार पर कथित वित्तीय लेन-देन और संबंधित संपत्तियों के बीच संबंधों की जांच कर रही है।

अस्थायी कुर्की का उद्देश्य कथित अपराध से जुड़ी संपत्तियों को जांच और कानूनी प्रक्रिया के दौरान सुरक्षित रखना है। संपत्तियों को लेकर अंतिम कानूनी स्थिति संबंधित न्यायिक प्रक्रिया और सक्षम प्राधिकरण के निर्णय के अधीन होगी।

ED के मुताबिक, इस मामले में इससे पहले एक मुख्य अभियोजन शिकायत और छह पूरक अभियोजन शिकायतें दाखिल की जा चुकी थीं। एजेंसी का कहना है कि अब तक मामले में 601.28 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्तियां अटैच, जब्त या फ्रीज की जा चुकी थीं।

रामगोपाल अग्रवाल से संबंधित 9.06 करोड़ रुपये की दो संपत्तियों पर कार्रवाई के बाद यह आंकड़ा बढ़कर लगभग 610.34 करोड़ रुपये हो गया है। जांच एजेंसी का कहना है कि मामले में अन्य संभावित लाभार्थियों की पहचान करने और कथित अपराधजनित आय के इस्तेमाल का पता लगाने के लिए जांच जारी है।

छत्तीसगढ़ के कथित शराब घोटाले में ED की इस कार्रवाई ने एक बार फिर कथित वित्तीय लेन-देन, संपत्तियों और संभावित लाभार्थियों की भूमिका को चर्चा में ला दिया है। पूर्व कांग्रेस कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल के खिलाफ पूरक अभियोजन शिकायत दाखिल होने और करोड़ों रुपये की संपत्तियां कुर्क किए जाने के बाद अब मामले में न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

हालांकि, यह स्पष्ट करना जरूरी है कि ED द्वारा लगाए गए आरोप अभी न्यायालय में अंतिम रूप से सिद्ध नहीं हुए हैं। अभियोजन शिकायत में लगाए गए आरोपों पर संबंधित पक्षों को अपना बचाव प्रस्तुत करने का अवसर मिलेगा और दोष या निर्दोष होने का अंतिम निर्णय न्यायालय द्वारा साक्ष्यों के परीक्षण के बाद ही किया जाएगा।

प्रशांत गौतम

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