महिला जनप्रतिनिधि से कथित अभद्रता के आरोपी को थाने से मुचलका, बेमेतरा पुलिस की कार्रवाई पर उठे सवाल
साजा में भाजपा नेत्री एवं नगर पंचायत उपाध्यक्ष प्रेरणा लाल शौर्यजीत सिंह की शिकायत पर दर्ज हुई थी FIR; पुलिस अधीक्षक को फोन किया गया, लेकिन कॉल अटेंड नहीं होने से नहीं मिल सका पक्ष
बेमेतरा (छत्तीसगढ़ उजाला)। साजा नगर पंचायत की उपाध्यक्ष एवं भाजपा महिला मोर्चा की प्रदेश विशेष आमंत्रित सदस्य प्रेरणा लाल शौर्यजीत सिंह के साथ कथित गाली-गलौज और जान से मारने की धमकी के मामले में अब पुलिस की कार्रवाई को लेकर सवाल उठने लगे हैं। महिला जनप्रतिनिधि की शिकायत पर FIR दर्ज होने के बाद आरोपी महेंद्र राठी को थाने से मुचलका दिए जाने की जानकारी सामने आई है। इसके बाद पुलिस की कार्रवाई और आरोपी को मुचलके पर छोड़े जाने के कानूनी आधार को लेकर चर्चा शुरू हो गई है।
मामले में सवाल उठ रहा है कि जब एक महिला जनप्रतिनिधि ने रास्ता रोककर अभद्रता करने और जान से मारने की धमकी देने की शिकायत दर्ज कराई थी, तो पुलिस ने किन परिस्थितियों में और किस कानूनी प्रावधान के तहत आरोपी को थाने से मुचलका देकर छोड़ा? क्या शिकायत में लगाए गए आरोपों और घटना की परिस्थितियों का समुचित आकलन किया गया? पुलिस प्रशासन की ओर से इन सवालों पर स्थिति स्पष्ट किया जाना जरूरी है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, 9 अक्टूबर 2026 की रात करीब साढ़े नौ बजे कोड़िया रोड स्थित शनि मंदिर के पास यह घटना हुई। शिकायतकर्ता प्रेरणा लाल शौर्यजीत सिंह के मुताबिक, वह अपने पति के साथ रायपुर से साजा लौट रही थीं। इसी दौरान महेंद्र राठी ने कथित तौर पर उनकी गाड़ी रुकवाई और उनके साथ गाली-गलौज करते हुए जान से मारने की धमकी दी।
शिकायत के आधार पर साजा पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 296 और 351(3) के तहत FIR दर्ज कर जांच शुरू की थी। अब आरोपी को थाने से मुचलका दिए जाने की जानकारी के बाद पुलिस की आगे की कार्रवाई को लेकर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, मामले में लगाए गए आरोपों की पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही हो सकेगी।
पुलिस अधीक्षक को किया गया फोन, नहीं हो सका संपर्क
मामले में पुलिस की कार्रवाई को लेकर स्थिति स्पष्ट करने और आरोपी को मुचलके पर छोड़े जाने का आधार जानने के लिए बेमेतरा पुलिस अधीक्षक को फोन किया गया, लेकिन उन्होंने कॉल अटेंड नहीं किया। इस कारण उनसे इस मामले में पुलिस का आधिकारिक पक्ष नहीं मिल सका।
किसी आरोपी को मुचलके पर छोड़ा जाना अपने आप में आरोपों को खारिज करना नहीं है। यह कार्रवाई किन कानूनी प्रावधानों और परिस्थितियों के तहत की गई, इसकी जानकारी सामने आना जरूरी है। ऐसे में पुलिस प्रशासन को मुचलका दिए जाने का आधार और जांच की वर्तमान स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
भाजपा नेत्री के मामले में पुलिस की कार्रवाई का आधार क्या?
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे अहम सवाल यही है कि FIR दर्ज होने के बाद आरोपी को थाने से मुचलका देने का आधार क्या रहा? क्या पुलिस ने शिकायत में दर्ज आरोपों, उपलब्ध साक्ष्यों और घटना की परिस्थितियों का समुचित आकलन किया है?
फिलहाल, मामले में निष्पक्ष जांच और कानून के अनुरूप कार्रवाई की अपेक्षा की जा रही है। पुलिस अधीक्षक से संपर्क का प्रयास किए जाने के बावजूद उनका पक्ष नहीं मिल सका। अब देखना होगा कि पुलिस प्रशासन इस मामले में उठ रहे सवालों पर क्या स्पष्टीकरण देता है और जांच को लेकर आगे क्या कदम उठाए जाते हैं।




