CGPSC मुख्य परीक्षा पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: पुनर्मूल्यांकन की मांग खारिज, 1:3 अनुपात को लेकर दायर याचिकाओं पर भी हस्तक्षेप से इनकार
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) की राज्य सेवा परीक्षा-2025 की मुख्य परीक्षा के परिणाम और साक्षात्कार के लिए अभ्यर्थियों के चयन को लेकर दायर याचिकाओं पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट ने उत्तर पुस्तिकाओं के पुनर्मूल्यांकन की मांग और चयन प्रक्रिया को चुनौती देने वाली याचिकाएं खारिज कर दी हैं। मामले की सुनवाई जस्टिस बी.डी. गुरु की एकल पीठ में हुई।
608 अभ्यर्थी ही न्यूनतम अर्हता अंक हासिल कर सके
मामले में CGPSC की ओर से बताया गया कि मुख्य परीक्षा में प्रत्येक प्रश्न-पत्र में न्यूनतम निर्धारित अंक हासिल करना अनिवार्य था। अनारक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों के लिए न्यूनतम 33 प्रतिशत, जबकि आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों के लिए 23 प्रतिशत अंक निर्धारित किए गए थे। आयोग के अनुसार इन निर्धारित अर्हता मानकों को पूरा करने वाले अभ्यर्थियों की संख्या केवल 608 रही। इन्हीं अभ्यर्थियों को साक्षात्कार के लिए पात्र माना गया।
1:3 अनुपात को लेकर उठाया गया था सवाल
याचिकाकर्ताओं निखिलेश सोनी, नीरज कुमार व अन्य की ओर से तर्क दिया गया था कि 265 पदों के मुकाबले नियमों के अनुसार लगभग तीन गुना यानी 795 अभ्यर्थियों को साक्षात्कार के लिए बुलाया जाना चाहिए था। याचिकाकर्ताओं ने चयन प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए उत्तर पुस्तिकाओं की दोबारा जांच के लिए स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति गठित करने और पूरी चयन प्रक्रिया निरस्त करने की मांग की थी।
हाईकोर्ट ने कहा—अर्हता पूरी करने वालों को नहीं किया गया बाहर
हाईकोर्ट ने माना कि याचिकाकर्ता यह साबित नहीं कर सके कि न्यूनतम अर्हता अंक प्राप्त करने वाले किसी अभ्यर्थी को साक्षात्कार से बाहर रखा गया है। ऐसे में केवल 1:3 अनुपात पूरा नहीं होने के आधार पर पूरी चयन प्रक्रिया को गलत नहीं ठहराया जा सकता।
अदालत के सामने ऐसा कोई ठोस आधार भी प्रस्तुत नहीं किया गया, जिससे यह साबित हो कि आयोग ने निर्धारित पात्रता मानकों को दरकिनार कर किसी योग्य अभ्यर्थी को साक्षात्कार से वंचित किया।
नियमों में पुनर्मूल्यांकन का प्रावधान नहीं
उत्तर पुस्तिकाओं के पुनर्मूल्यांकन और पुनर्गणना की मांग पर भी हाईकोर्ट ने हस्तक्षेप से इनकार किया। आयोग ने अपने पक्ष में बताया कि संबंधित भर्ती नियमों और विज्ञापन में उत्तर पुस्तिकाओं के पुनर्मूल्यांकन या पुनर्गणना का कोई प्रावधान नहीं है। हाईकोर्ट ने इसी आधार पर दोबारा मूल्यांकन का निर्देश देने से इनकार किया।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि मूल्यांकन जैसे शैक्षणिक मामलों में न्यायालय विषय विशेषज्ञ की भूमिका नहीं निभा सकता। जब तक मूल्यांकन प्रक्रिया में कोई ठोस और स्थापित अवैधानिकता सामने न आए, न्यायिक हस्तक्षेप का दायरा सीमित रहता है।
चयन प्रक्रिया में नहीं मिली ऐसी गड़बड़ी, जिससे प्रक्रिया रद्द हो
याचिकाकर्ताओं की ओर से चयन प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए थे, लेकिन अदालत के समक्ष ऐसी ठोस सामग्री प्रस्तुत नहीं की जा सकी, जिसके आधार पर पूरी चयन प्रक्रिया को निरस्त करने का आधार बनता। हाईकोर्ट ने याचिकाओं को खारिज करते हुए आयोग की ओर से अपनाई गई प्रक्रिया में हस्तक्षेप नहीं किया।
26 नवंबर 2025 को जारी हुआ था विज्ञापन
CGPSC ने राज्य सेवा परीक्षा-2025 के तहत 265 पदों पर भर्ती के लिए 26 नवंबर 2025 को विज्ञापन जारी किया था। मुख्य परीक्षा 6 से 9 जून 2026 के बीच आयोजित हुई और इसका परिणाम 31 अगस्त 2026 को घोषित किया गया। परिणाम में कुल 608 अभ्यर्थियों को साक्षात्कार के लिए पात्र पाया गया।
इस फैसले के साथ फिलहाल 265 पदों के लिए 608 अभ्यर्थियों को साक्षात्कार में बुलाए जाने और उत्तर पुस्तिकाओं के पुनर्मूल्यांकन की मांग को लेकर चल रही कानूनी चुनौती पर हाईकोर्ट स्तर पर विराम लग गया है।




