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मंत्री से कराया पोस्टिंग आदेश, ‘बड़े साहब’ हुए नाराज!अधीनस्थ अधिकारियों की पोस्टिंग को लेकर विभाग में चर्चा—“पोस्टिंग करवानी थी तो मुझसे मिलना था”

रायपुर(छत्तीसगढ़ उजाला)-सरकारी महकमों में पद और पोस्टिंग को लेकर हमेशा से ही चर्चाओं का दौर चलता रहा है। लेकिन प्रदेश के एक विभाग में इन दिनों अधीनस्थ अधिकारियों की पोस्टिंग को लेकर जो चर्चा चल रही है, उसने विभागीय गलियारों में एक अलग ही माहौल बना दिया है। चर्चा है कि कुछ अधिकारियों ने अपनी मनचाही पोस्टिंग के लिए सीधे मंत्री स्तर पर संपर्क किया और वहां से आदेश भी जारी करवा लिया। इसके बाद विभाग के एक ‘बड़े साहब’ की नाराजगी की चर्चा तेज हो गई है।

बताया जा रहा है कि संबंधित अधिकारियों ने विभागीय स्तर पर अपनी पोस्टिंग को लेकर इंतजार करने के बजाय सीधे मंत्री के समक्ष अपनी बात रखी। मंत्री स्तर से आदेश जारी होने के बाद अधिकारियों को नई जगह पदस्थापना तो मिल गई, लेकिन इसके बाद कथित तौर पर विभाग के वरिष्ठ अधिकारी की नाराजगी का सामना करना पड़ रहा है।

“पोस्टिंग करवानी थी तो मुझसे मिलना था…”

विभागीय कर्मचारियों के बीच इस पूरे घटनाक्रम को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं चल रही हैं। दफ्तर की अनौपचारिक बातचीत में चुटकी लेते हुए कहा जा रहा है—“ऑर्डर मंत्री जी से करवा लिया, लेकिन नौकरी तो विभाग में ही करनी है!”

चर्चा यह भी है कि वरिष्ठ अधिकारी को इस बात पर आपत्ति है कि अधीनस्थ अधिकारियों ने पोस्टिंग के लिए विभागीय स्तर पर उनसे संपर्क क्यों नहीं किया और सीधे मंत्री के माध्यम से आदेश क्यों करवाया।

हालांकि इन चर्चाओं की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन विभाग में यह बात लगातार चर्चा का विषय बनी हुई है कि आखिर मंत्री स्तर से जारी आदेश के बाद भी संबंधित अधिकारियों को कथित तौर पर असहज परिस्थितियों का सामना क्यों करना पड़ रहा है।

मंत्री का आदेश अपनी जगह, ‘साहब’ का मिजाज अपनी जगह?

मामला यहीं तक सीमित नहीं बताया जा रहा। सूत्रों के हवाले से विभाग में यह भी चर्चा है कि संबंधित अधिकारी अब वरिष्ठ अधिकारी की नाराजगी के कारण दबाव महसूस कर रहे हैं। अधीनस्थ अधिकारियों के बीच कथित तौर पर यह असमंजस भी बना हुआ है कि प्रशासनिक व्यवस्था में उन्हें किस स्तर के निर्देश को प्राथमिकता देनी है।

विभागीय गलियारों में व्यंग्य के तौर पर यह बात भी कही जा रही है—“आदेश ऊपर से आ सकता है, लेकिन विभाग में काम कैसे करना है, यह बड़े साहब के मिजाज पर निर्भर है!”

यदि प्रताड़ना हुई तो मामला गंभीर

हालांकि इस पूरे मामले में अभी तक किसी अधिकारी की ओर से सार्वजनिक रूप से प्रताड़ना या उत्पीड़न की शिकायत सामने नहीं आई है और न ही विभाग की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान जारी किया गया है। ऐसे में चर्चाओं की वास्तविकता की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकती है।

लेकिन यदि वास्तव में किसी अधिकारी को केवल इस वजह से नाराजगी, दबाव या प्रताड़ना का सामना करना पड़ रहा है कि उसने अपनी पोस्टिंग मंत्री स्तर से करवाई, तो यह प्रशासनिक व्यवस्था और कार्यसंस्कृति से जुड़ा गंभीर सवाल होगा।

सरकारी व्यवस्था में पदस्थापना और प्रशासनिक निर्णय निर्धारित नियमों एवं सक्षम प्राधिकारी के आदेश से होते हैं। ऐसे में किसी वैध आदेश के बाद व्यक्तिगत पसंद-नापसंद या नाराजगी के आधार पर अधिकारी-कर्मचारी के साथ व्यवहार किए जाने की स्थिति निश्चित तौर पर सवाल खड़े कर सकती है।

विभाग में चर्चा का बाजार गर्म

फिलहाल संबंधित विभाग में इस पूरे घटनाक्रम को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है। कर्मचारी और अधिकारी भी पूरे मामले को लेकर खुलकर कुछ कहने से बच रहे हैं, लेकिन दफ्तर की चारदीवारी से निकलकर यह चर्चा अब विभागीय गलियारों तक पहुंच चुकी है।

और इसी बीच विभाग में सबसे ज्यादा चुटकी यही चल रही है—

“मंत्री जी ने ऑर्डर तो कर दिया साहब… लेकिन बड़े साहब को मनाना अभी बाकी है!”

अब इन चर्चाओं में कितनी सच्चाई है और संबंधित अधिकारियों के साथ वास्तव में किसी तरह का दबाव या प्रताड़ना हो रही है या नहीं, यह जांच का विषय है। यदि मामला सही पाया जाता है तो यह केवल किसी अधिकारी की व्यक्तिगत नाराजगी का मामला नहीं, बल्कि प्रशासनिक अनुशासन और अधिकारों के इस्तेमाल से जुड़ा बड़ा सवाल बन सकता है।

प्रशांत गौतम

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