*7 दिन, 4 कोशिशों के बावजूद नहीं हिली 8 फुट की हनुमान प्रतिमा, क्यों नहीं हिली हनुमान प्रतिमा! क्रेन-मशीनें फेल तो बुलाए IIT के साइंटिस्ट, बजरंगबली को मनाने भजन कीर्तन*
छत्तीसगढ़ उजाला - प्रतीक सोनी

उज्जैन (छत्तीसगढ़ उजाला)। बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन अपने मंदिरों, धार्मिक आस्था के साथ-साथ प्राचीन इतिहास और पुरातत्व से जुड़ी विरासतों के लिए दुनिया भर में मशहूर है। यह शहर लोगों का आस्था का विशेष केंद्र है। लेकिन हाल ही में यहां हनुमान मंदिर को लेकर टकराव देखने को मिल रहा है। दरअसल शहर के सती गेट के पास बड़ा सराफा मार्ग पर सड़क के बीचों बीच अति प्राचीन खड़े हनुमान का छोटा सा मंदिर है जो सड़क चौड़ीकरण की जद में आ रहा है। मंदिर का ढांचा नगर निगम की टीम ने हटा दिया, लेकिन करीब 8 फीट ऊंची हनुमान प्रतिमा 7 दिन से अभी भी अपनी जगह पर खड़ी है।
इंदौर IIT के एक्सपर्ट ने की प्रतिमा की जांच
नगर निगम की टीम द्वारा प्रतिमा को हटाने के लिए सप्ताह भर में 4 प्रयास किए जा चुके हैं। मशीनों और तकनीकी प्रयासों के बावजूद प्रतिमा को हटाया नहीं जा सका। जिसके बाद आईआईटी इंदौर की टीम उज्जैन पहुंची और दो घंटे तक जांच की। टीम अपने साथ लाई उपकरणों से प्रतिमा की गहराई की जांच की। अब टीम अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। हनुमान मंदिर की तकनीकी जांच को लेकर उज्जैन नगर निगम कमिश्नर अभिलाष मिश्रा ने कहा, ”एक्सपर्ट की राय ली जा रही है। IIT इंदौर से जांच करवाई गई है। ASI व IIT की रिपोर्ट आने के बाद आगे का निणर्य लेंगे.”
7 दिन में हिली तक नहीं 8 फुट की खड़े हनुमान की प्रतिमा लोगों ने माना चमत्कार, टेंट लगा भगवान को मनाने में जुटे
काफी कोशिशों के बावजदू प्रतिमा नहीं हटने की घटना को स्थानीय लोग हनुमान जी का चमत्कार मान बैठे हैं। जिसके वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर सर्कुलेट किए जा रहे हैं। जिसकी वजह से देश दुनिया में अब यह मंदिर चर्चा का विषय बन गया है। महाकाल दर्शन करने आने वाले श्रद्धालु खड़े हनुमान के दर्शन को भी पहुंच रहे हैं। मंदिर के पास भक्तों की भीड़ देखी जा रही है जो ढोल बाजों के साथ भजन कीर्तन कर भगवान को मनाते नजर आ रहे हैं। इस दौरान लोगों ने प्रतिमा को टेंट में रखा है। बताया जाता है कि कई मुस्लिम परिवार भी हनुमान जी के भक्त हैं। उनके दर पर मन्नतें मांगने आते हैं।
दरअसल, उज्जैन में 2028 में होने वाले सिंहस्थ को देखते हुए शहर में कई बड़े विकास कार्य किए जा रहे हैं। इसी क्रम में कोयला फाटक से कंठाल, सती गेट होते हुए छत्री चौक तक करीब 1.13 किलोमीटर लंबी सड़क का चौड़ीकरण किया जा रहा है। सड़क को करीब 15 मीटर चौड़ा किया जाना है। इस पूरे प्रोजेक्ट की लागत करीब 15 करोड़ रुपये बताई जा रही है। इस मार्ग पर कुल 4 धार्मिक स्थल चौड़ीकरण की जद में आए हैं। प्रशासन के अनुसार, इनमें से 3 धार्मिक स्थलों का व्यवस्थापन किया जा चुका है। जबकि खड़े हनुमान मंदिर को लेकर तकनीकी प्रक्रिया अभी जारी है।
तकनीकी रिपोर्ट के बाद हुआ फैसला
नगर निगम के अपर आयुक्त संतोष टैगोर ने मिडिया से चर्चा में बताया, “मंदिर को लेकर पुजारी की ओर से बताई गई तकनीकी बातों और इंजीनियरिंग टीम की रिपोर्ट के आधार पर परीक्षण कराया जा रहा है। परीक्षण पूरा होने के बाद पुजारी से चर्चा की जाएगी और तकनीकी रिपोर्ट के आधार पर ही जनभावना को ध्यान में रखते हुए आगे की कार्रवाई तय होगी। यह मार्ग बाबा महाकाल की राजसी सवारी के प्रमुख मार्गो में शामिल है। ऐसे में सवारी के सुचारू संचालन और श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए सड़क विकास कार्य को समय पर पूरा करना प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण था, जिसे पूरा किया भी गया। लेकिन मंदिर अभी भी चुनौती बना हुआ है। मंदिर के लिए पास में ही टंकी चौक क्षेत्र में स्थान उपलब्ध करवाया गया है। जहां टकसाली गणेश की प्रतिमा भी स्थापित की जाएगी.”
खड़े हनुमान: आस्था, इतिहास और विकास
170 साल पुराना हनुमान मंदिर, 5 पीढ़ियों से परिवार कर रहा सेवा
खड़े हनुमान मंदिर के पुजारी हवन बैरागी पिता महेश बैरागी के अनुसार, ”मंदिर में स्थापित खड़े हनुमान की प्रतिमा का इतिहास 170 वर्ष से भी अधिक पुराना है। उनके परिवार की 5 से अधिक पीढ़ियां लगातार मंदिर की सेवा पूजा अर्चना करती आ रही हैं। मंदिर से जुड़ी स्थानीय मान्यताओं के अनुसार यहां आने वाले श्रद्धालुओं को भगवान का प्रसाद और तावीज दिया जाता है। भक्तों की मान्यता है कि इससे उनकी परेशानियां और रोग दूर होते हैं। संतान प्राप्ति और विवाह संबंधी परेशानी से छुटकारा पाने की मनोकामनाओं के लिए भी श्रद्धालु आते हैं। इन्हीं मान्यताओं के कारण खड़े हनुमान का मंदिर लंबे समय से स्थानीय श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है.”
लोग मान रहे हनुमानजी का चमत्कार तस्वीरें देखकर मथुरा से चले आए श्रद्धालु
मंदिर और प्रतिमा को हटाने की कोशिशों की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर सर्कुलेट हुए हैं। जिसके बाद दूर दूर से भक्तों का उज्जैन आने का सिलसिला जारी है। उत्तर प्रदेश के मथुरा से अपनी पत्नी के साथ दर्शन करने पहुंचे श्रद्धालु सुनील पंजवानी ने मिडिया से चर्चा में कहा, ”उन्होंने सोशल मीडिया पर मंदिर और हनुमान प्रतिमा को हटाए जाने की जानकारी देखी थी। इसके बाद उनके मन में यहां आकर दर्शन करने की इच्छा हुई और वह पहुंचे.”
उनका कहना है, ”जब प्रतिमा यहां से हट नहीं रही तो उसे जबरदस्ती क्यों हटाया जा रहा है। प्रतिमा को इसी स्थान पर रहना चाहिए जहां पर वह स्थापित है। यह सिर्फ मंदिर का मामला नहीं आस्था से जुड़ा विषय है.”

मंदिर हटाने को लेकर पुनर्विचार की उठी मांग
विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के जिला धर्म प्रचार प्रमुख शैलु यादव ने भी खड़े हनुमान मंदिर के संभावित विस्थापन पर आपत्ति जताई। शैलु यादव के अनुसार ”लोगों की आस्था में खड़े हनुमान बाबा का विशेष महत्व है क्योंकि उन्हें बीमारियों से राहत दिलाने वाला डॉक्टर भी माना जाता है। यह मंदिर गरीब और जरूरतमंद लोगों की आस्था का केंद्र है। ऐसे में इसे हटाने से बड़ी संख्या में श्रद्धालु प्रभावित हो सकते हैं। मध्य प्रदेश शासन पुनर्विचार कर मंदिर को इस स्थान पर बनाए रखें। क्योंकि प्रतिमा को दूसरी जगह स्थापित किया जाता है तो इसकी दिशा भी बदल जाएगी। जो जगह दी गई है वहां यह दक्षिण से उत्तर मुखी हो जाएगी। ऐसे में किसी भी विस्थापन से पहले धार्मिक आस्था के साथ तकनीकी और अन्य पहलुओं का बारीकी से अध्ययन किया जाए.”
मंदिर का ढांचा हटा लेकिन नहीं हिली प्रतिमा राजा भोज के काल की है प्रतिमा!
सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय के पुराविद प्रोफेसर डॉ. रमण सोलंकी ने मिडिया से बातचीत में बताया कि, ”प्राचीन सनातनी परंपरा में हनुमान जी का विशिष्ट देवतुल्य महत्व है। किसी प्रतिमा की स्थापना और प्राण प्रतिष्ठा का धार्मिक दृष्टि से विशेष महत्व होता है। मैं जब मौके पर गया और देखा तो प्रतिमा पर सिंदूर का लेपन होने के कारण उसकी मूल भाव-भंगिमा को स्पष्ट रूप से पहचानना मुश्किल हो गया। हालांकि प्रतिमा के पीछे दिखाई देने वाला प्रस्तर मालवा क्षेत्र में पाए जाने वाले बेसाल्ट पत्थर जैसा प्रतीत हुआ।
जो मालवा में राजा भोज के काल में करीब 1000 साल पुराने समय में बेसाल्ट पत्थर पर प्रतिमाएं बनाई जाने की परंपरा रही है। जिससे पत्थर की प्रकृति और प्रतिमा की संरचना इसके प्राचीन महत्व की संभावना पैदा कर रही है। तकनीकी दृष्टि से प्रस्तर प्रतिमा को विशेषज्ञों की निगरानी में स्थानांतरित और पुनर्स्थापित किया जा सकता है। लेकिन इसके लिए उचित वैज्ञानिक प्रक्रिया और विशेषज्ञों की सलाह जरूरी है.”

भजन कीर्तन कर भगवान को मनाने में जुटे लोग जिस जमीन पर खड़े हनुमान है वह प्राचीन उज्जयिनी का हिस्सा
पूराविद प्रोफेसर डॉ. रमण सोलंकी के अनुसार, ”केवल प्रतिमा ही नहीं बल्कि जिस क्षेत्र में यह मंदिर स्थित है उसका भी ऐतिहासिक महत्व है। बड़ा सराफा, छोटा सराफा, नमक मंडी, गोपाल मंदिर और दानी गेट जैसे क्षेत्र प्राचीन उज्जयिनी के ऐतिहासिक परिक्षेत्र से जुड़े रहे हैं। इन क्षेत्रों में अलग-अलग कालखंडों में स्थापत्य और धार्मिक गतिविधियों का विस्तार हुआ है।
राजा भोज के काल से लेकर, मुगलों, सिंधिया राजवंश, ब्रिटिश काल और स्वतंत्र भारत तक यह इलाका उज्जैन के ऐतिहासिक विकास का साक्षी रहा है। यहीं पास स्थित चौबीस खंभा और सती गेट जैसे ऐतिहासिक स्थापत्य इस क्षेत्र के महत्व को और बढ़ाते हैं। ऐसे में खड़े हनुमान मंदिर या प्रतिमा से जुड़ा कोई भी निर्णय केवल वर्तमान सड़क निर्माण की जरूरत के आधार पर नहीं, बल्कि पुरातात्विक, ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए.”
170 साल पुराना है हनुमान मंदिर, 5 पीढ़ियों से परिवार कर रहा सेवा, ASI और पुरातत्व विभाग की विशेषज्ञता क्यों महत्वपूर्ण?
विशेषज्ञों के अनुसार, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ASI और मध्य प्रदेश पुरातत्व विभाग के पास प्राचीन प्रतिमाओं मंदिरों और स्थापत्य संरचनाओं के संरक्षण तथा पुनर्स्थापना के लिए विशेषज्ञ टीमें और निर्धारित प्रक्रियाएं हैं। ऐसे में यदि तकनीकी परीक्षण के बाद प्रतिमा को स्थानांतरित करना आवश्यक पाया जाता है तो विशेषज्ञ संस्थाओं की निगरानी में प्रक्रिया अपनाई जा सकती है। हालांकि प्राण-प्रतिष्ठित प्रतिमा के धार्मिक महत्व और स्थानीय आस्था को ध्यान में रखते हुए किसी भी निर्णय से पहले सभी पहलुओं का गंभीरता से अध्ययन जरूरी है।
तीन बार नाकाम, चौथी बार में ASI की लेना पड़ी मदद
खड़े हनुमान की प्रतिमा को हटाने की कोशिशें ने पिछले 7 दिनों में पूरे मामले को नया मोड़ दे दिया है। जब तीन कोशिशों के बाद प्रतिमा हिली नहीं तो चौथी कोशिश में गुप्त रूप से एएसआई की टीम मौके पर पहुंची और प्रतिमा को किस तरीके से सुरक्षित करना है इसको लेकर जांच की। इस दौरान 7 सितंबर सोमवार बाबा महाकाल की राजसी सवारी का समय आ गया और प्रशासन ने आगे की कार्रवाई को तकनीकी रिपोर्ट आने तक रोक दिया। अब राजसी सवारी भी निकल चुकी है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि तकनीकी रिपोर्ट आने के बाद प्रशासन का अगला कदम क्या होगा?
विशेषज्ञों ने चमत्कार से किया इंकार
किसी आधिकारिक वैज्ञानिक या तकनीकी रिपोर्ट ने इसे चमत्कार नहीं बताया है। विशेषज्ञों के अनुसार, प्रतिमा का आधार जमीन में गहराई तक हो सकता है। उसकी नींव बेहद मजबूत हो सकती है या प्रतिमा किसी विशेष तकनीकी तरीके से स्थापित की गई हो सकती है। ऐसे में भारी मशीन से सीधे खींचने का प्रयास प्रतिमा को नुकसान पहुंचा सकता है। चार प्रयासों के बाद मामले में सबसे महत्वपूर्ण बदलाव यही आया है कि पांचवी बार में अब केवल मशीन की ताकत के आधार पर प्रतिमा हटाने के बजाय तकनीकी जांच और विशेषज्ञों की राय पर जोर दिया जाएगा।
विकास के साथ जन भावना को बनाए रखना बना चुनौती
पहले सवाल था प्रतिमा कैसे हटेगी? अब सवाल है प्रतिमा को नुकसान पहुंचाए बिना क्या करना चाहिए और यही बदलाव इस पूरे मामले को गंभीर बनाता है। प्रशासन के लिए सबसे बड़ी चिंता यही है की प्रतिमा को खरोच भी ना आए खरोच आई तो जन-भावनाएं आहत हो सकती है। आगामी सिंहस्थ महापर्व 2028 की तैयारी के लिए यातायात व्यवस्था भी जरूरी है। जन भावना का सम्मान भी जरूरी है।




