छत्तीसगढ

*●सियासत●* विभाग में अफसरों की पोस्टिंग व नाराजगी…….,मंत्री ने व्यवसायी को बनाया सर्वेसर्वा……. हाईकमान तक पहुचने लगी मंत्रियों की शिकायत….

छत्तीसगढ़ उजाला रायपुर●

●सियासत●

छत्तीसगढ़ की नई सरकार में नई पदस्थापना को लेकर गहमागहमी बनी हुई है।पोस्टिंग को लेकर भाजपा के कई बड़े नेताओ सहित मंत्री भी नाराज बताये जा रहे है।इन सभी ने अपनी नाराजगी मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय सहित पार्टी के संगठन को भी जाहिर कर दी है।वही अब तक डीजीपी व पीसीसीएफ को नही बदलने की भी बाते होने लगी है।भाजपा के एक बडे नेता एक  कलेक्टर को हटाने के लिए अमादा हैं।नेता जी ने अपनी नाराजगी पार्टी हाईकमान तक भी पंहुचा दी है।चर्चा इस बात की भी है कि बहुत जल्द कई जिलों में कलेक्टर बदले जाएंगे।कुछ दिन पूर्व तबादले की एक सूची जारी हुई थी जिस पर अब बहुत सी बातें शुरू हो गयी है। जनसंपर्क में एक आईपीएस को बैठालना भी पार्टी नेताओं को सही नही लग रहा है।पार्टी के एक बड़े नेता का कहना है कि सरकार में काम सही तरीके से नही हो पा रहा है।जनसंपर्क जैसे महत्वपूर्ण विभाग में आईपीएस को नियुक्त करना समझ से परे है।जनता की सुरक्षा में कार्य करने वाले अफसर को जनसंपर्क में बैठालना कही से उचित नही है।आईपीएस जनता की सुरक्षा में लगे तो सही होता।इसके अलावा आईपीएस को मुख्यमंत्री का ओएसडी बनाकर सरकार क्या करना चाह रही है यह अपने आप मे अनुचित फैसला है।वैसे भी आईएएस और आईपीएस का विवाद वर्षों से संचालित होता रहा है।

जनसंपर्क विभाग बना विवाद विभाग


जनसंपर्क जैसे महत्वपूर्ण विभाग में भी अब विवाद की बाते सामने आ रही है।कांग्रेस सरकार के समय मलाई खाने वालों को इस सरकार में भी अच्छी जगह पोस्टिंग दी जा रही है। अफसर की पोस्टिंग किसके इशारे में हो रही है इस पर भी हाई कमान तक शिकायते जानी शुरू हो गयी है।जनसंपर्क संचालक के पद पर अजय अग्रवाल की नियुक्ति की गई. अजय अग्रवाल बिलासपुर में जिला पंचायत के सीईओ से सीधे जनसंपर्क के साथ ही संवाद व परिवहन में आ गए।2008 बैच के राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारी हैं. जनसंपर्क अधिकारी संघ के साथ ही कई लोग इस का विरोध कर रहे है।कम पे स्केल के अफसर को ज्यादा पे स्केल पर कैसे नियुक्त किया जा रहा है। कनिष्ठ अधिकारी की नियुक्ति किसके द्वारा की जा रही है।सरकार के इन फैसलों का विरोध शुरू हो गया है। सरकार की योजनाओं का प्रचार-प्रसार करने वाले अफसर का जिम्मा सोच समझकर करना था पर साय सरकार में काम बड़ा ही सुस्त सा नजर आ रहा हैं. पार्टी संगठन तक शिकायते जानी शुरू हो गयी है।कनिष्ठ अफसर की नियुक्ति भूपेश बघेल सरकार में भी होती थी अब नई सरकार भी उसी तर्ज पर गलतियां कर रही है।अधिकारियों की योग्यता पर सवाल उठेगा।

मंत्री ने व्यवसायी को सौपा अपना विभाग

प्रदेश के एक मंत्री की आज कल राजधानी में बड़ी चर्चा बनी हुई है।नेता जी को बड़ी मुश्किल से मंत्री पद मिला पर मंत्री जी एक बड़े व्यवसायी पर बहुत ज्यादा मेहरबान है।कहने वाले कहते है कि मंत्री बनने के पहले यह व्यवसायी नेता जी की बहुत सेवा करता था।नेता जी का सारा खर्च इसी व्यवसायी के कंधे पर था अब नेता जी मंत्री बन गए तो अहसान चुकाने का भी समय आ गया।सो मंत्री जी ने अपने विभाग की सप्लाई का पूरा मामला इसी बड़े व्यवसायी को सौप दिया।मंत्री जी और व्यवसायी दोनो इस फैसले से खुश नजर आ रहे है।मंत्री की सेवा का फायदा इस बड़े व्यापारी को अंततः मिल ही गया।मंत्री के इस फरमान से विभाग के अफसरों में भी नाराजगी दिख रही है।एक अफसर ने नाम नही छापने की शर्त पर हमको काफी सारी बाते बताई।इस अफसर का कहना है कि अब हम विभाग के काम से मंत्री जी के बंगले जाए या ऐश्वर्या में जाए?वैसे अब हमारे मंत्री तो यह व्यवसायी ही हो गए है।अब सेठ जी जिस फर्म के नाम को ओके करेंगे काम उसको ही देना पड़ेगा।

अब यह सब बात कैसे छुपेगी।अंदरखाने की बाते बाहर आ ही जाती है।अब इस बड़े व्यवसायी व मंत्री के खेला की शिकायत दिल्ली दरबार तक भी पहुँच गयी है।मंत्री जी को बहुत जल्द हाईकमान बुलावा भी भेज सकता है।मंत्री जी वैसे भी अपने अलग एटीट्यूड से भी चर्चा में बने रहते है।शपथ ग्रहण के समय भी मंत्री जी के एटीट्यूड का वीडियो भी खूब वाइरल हुआ था।अब इस मामले से प्रदेश की सरकार में क्या क्या बदलाव होगा यह देखना बाकी है।

Anil Mishara

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