बिलासपुर

नवीनीकरण की आड़ में एपीएल को बीपीएल में बदलकर बीते दो साल से लाखों क्विंटल चावल व शक्कर की हेराफेरी के मामले ने पकड़ा तूल, कलेक्टर के निर्देश के वाबजूद अभी तक मामला दर्ज नहीं ?

छत्तीसगढ़ उजाला

 

बिलासपुर (छत्तीसगढ़ उजाला)। नवीनीकरण की आड़ में एपीएल को बीपीएल में बदलकर बीते दो साल से लाखों क्विंटल चावल व शक्कर की हेराफेरी करने के मामले ने तूल पकड़ लिया है।
जानकारों का कहना है कि 2022 में जब नवीनीकरण हुआ उस दौरान करीब दो लाख एपीएल कार्ड को बदलकर बीपीएल कर दिया गया है। गड़बड़ी की परत धीरे-धीरे खुल रही है। पड़ताल में सामने आया है कि एक ही दुकान से एक दर्जन से भी अधिक फर्जी बीपीएल कार्ड मिले हैं, जिनके पुराने कार्ड नंबर को विलोपित कर दिया गया है। खाद्य विभाग की ओर से जनवरी 2022 से अक्टूबर 2023 के बीच बीपीएल कार्डधारियों के राशन कार्ड का नवीनीकरण किया गया था। इसकी आड़ में करीब दो लाख हितग्राहियों के एपीएल कार्ड के नंबर को विलोपित कर बीपीएल में बदल दिया गया और हितग्राहियों को इसकी भनक तक नहीं लगी।

इसी कार्ड के जरिए हर माह लाखों क्विंटल चावल की हेराफेरी हो रही है। शुरुआती जांच में विनोबा नगर की माता दी खाद्य सुरक्षा पोषण एवं उपभोक्ता सेवा सहकारी समिति मर्यादित और डीपूपारा में संचालित संस्कृति महिला समूह की राशन दुकानों में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी सामने आई थी।

मामले की शिकायत के बाद खाद्य विभाग ने इसकी जांच कराई। इसमें विनोबा नगर की दुकान को सस्पेंड कर दिया गया है। एक विक्रेता ने दावा किया है कि सिंधी कालोनी, रेलवे क्षेत्र, टिकरापारा समेत शहर के कई वार्डों में करीब दो लाख फर्जी बीपीएल कार्ड बनाकर सरकारी राशन की बंदरबांट की जा रही है। खबर तो यह भी है कि टिकरापारा क्षेत्र में एक गोदाम भी है, जहां सरकारी चावल को डंप किया जाता है। यहां से इसे बाजार में खपाया जाता है।

इन कार्डों पर शक :-

223755423196, 223752411400, 223752514338, 223753457175, 223753464490, 223758456500, 223759033403

इसलिए हो रही है आशंका कि खाद्य विभाग की ओर से 2022 में नवीनीकरण किया गया। इसमें नया कार्ड नंबर जारी किया गया। यह प्रक्रिया एपीएल और बीपीएल दोनों राशन कार्ड में अपनाई गई थी। जिन कार्डों का नवीनीकरण हुआ है उस कार्ड का नया नंबर जारी हुआ है। जिन एपीएल कार्डों को गुपचुप तरीके से बीपीएल में बदला गया है उनके पुराने कार्ड को विलोपित कर नया नंबर से कार्ड बनाया गया है। इन कार्डों में भी पुराने कार्ड नंबर को विलोपित कर दिया गया है।

रेलवे क्षेत्र की राशन दुकानों में भी बड़े पैमाने पर गड़बड़ी होने की जानकारी मिली है। एकता प्राथमिक सहकारी उपभोक्ता भंडार में कुछ एपीएल कार्ड को बीपीएल में बदलकर सरकारी चावल की गड़बड़ी की जा रही है। जानकारी यह भी मिल रही है कि कुछ बीपीएल कार्डधारी रेलवे में नौकरी कर रहे हैं। वहीं उनकी पत्नियों के नाम पर बीपीएल कार्ड जारी कर दिया गया है। जांच में गड़बड़ी उजागर हो सकती है।

सरकारी राशन घोटाला सामने आने के बाद खाद्य विभाग के नियंत्रक अनुराग भदौरिया ने जांच टीम का गठन किया था। इसमें सहायक नियंत्रक अजय मौर्य और खाद्य निरीक्षक धीरेंद्र कश्यप शामिल थे। जांच टीम की ओर से 15 हितग्राहियों के बयान दर्ज किए गए हैं। इनमें से चार हितग्राहियों ने माना है कि उन्हें कार्ड बनने की जानकारी नहीं थी। वहीं 11 हितग्राहियों ने बीपीएल कार्ड बनने की पुष्टि की है।

नियम के अनुसार राशन कार्ड नंबर को फूड कंट्रोलर की आइडी से ही डिलीट किया जा सकता है। इससे जाहिर है कि फूड कंट्रोलर की जानकारी में ही एपीएल कार्ड के नंबर को विलोपित कर नया नंबर जारी कर बीपीएल बना दिया गया। इसमें नगर निगम, सरकारी राशन दुकानदार, विक्रेता के अलावा खाद्य विभाग के अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध है।

जांच रिपोर्ट पर उठ रहे सवाल

गड़बड़ी सामने आने के बाद खाद्य विभाग ने इसकी जांच कराई। इसमें सिर्फ एक विक्रेता को पूरे मामले में दोषी पाया गया है। उन्होंने अपनी रिपोर्ट कलेक्टर को सौंपी है। इसमें विक्रेता पर एफआईआर की अनुशंसा की गई है। रिपोर्ट में कई ऐसे बिंदु हैं जिन पर टीम ने जांच ही नहीं की।

मसलन, एपीएल को बीपीएल बनाने आवेदन/दस्तावेज किसने सौंपा, बीपीएल कार्ड के लिए सौंपे गए दस्तावेजों में हस्ताक्षर संभ्रांत परिवार की महिलाओं ने किया है या किसी जालसाज ने ?, बीपीएल कार्ड च्वाइस सेंटर में बनाया गया है या नगर निगम कार्यालय/ कैंप में ?, जिस कर्मचारी या च्वाइस सेंटर संचालक ने बनाया है, उसकी पहचान जॉंच दल ने की या नहीं ?, कूट रचित दस्तावेजों/जाली हस्ताक्षरों का मिलान हैंड राइटिंग एक्सपर्ट से संभव है.. तो क्या हस्ताक्षर मिलान के लिए हेंड राइटिंग एक्सपर्ट की मदद ली गई या ली जाएगी।

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