छत्तीसगढ

*सियासत* *राम आयेंगे, आयेंगे, राम आयेंगे……* *भाजपा की झोपड़ी के भाग खुल जायेंगे…*

*सियासत*

रायपुर। अयोध्या में जन्मभूमि पर नवनिर्मित भव्यतम मंदिर में रामलला विराजमान हो जाएंगे। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने घर घर दिवाली मनाने का आग्रह किया है। भाजपा एवं समस्त राष्ट्र वादी संगठन 22 जनवरी पर ठीक वैसा दृश्य संयोजित करने में जुटे हुए हैं, जैसा लंका विजय के बाद श्री राम के अयोध्या आगमन पर उपस्थित हुआ था। सारे देश में अभूतपूर्व उत्साह हिलोरें मार रहा है। छत्तीसगढ़ भगवान राम का ननिहाल है तो स्वाभाविक है कि यहां उत्साह चरम पर है। अभी अभी छत्तीसगढ़ ने भाजपा को राम मंदिर निर्माण के लिए विधानसभा चुनाव में आशीर्वाद दिया है और रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के प्रतिफल में लोकसभा चुनाव में शुभाशीष मिलने का भाजपा को सौ प्रतिशत विश्वास है। छत्तीसगढ़ में भाजपा के सभी दिग्गज नेता 22 जनवरी के महोत्सव के लिए माहौल बना रहे हैं। भाजपा महिला मोर्चा अपने मोर्चे पर तैनात है। रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के संदर्भ में छत्तीसगढ़ भाजपा महिला मोर्चा की अध्यक्ष शालिनी राजपूत ने कहा है कि 22 जनवरी को अयोध्या में भगवान श्री राम जी का मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा के साथ एक बार फिर से विराजमान हो रहे हैं। जिसको लेकर भाजपा महिला मोर्चा में भारी उत्साह है और महिला मोर्चा की बहनें घर घर जाकर लोगों को प्राण प्रतिष्ठा का आमंत्रण दे रही हैं। अक्षत कलश यात्रा निकाल कर प्रदेश को राम नाम से प्रफुल्लित कर रही हैं।

22 जनवरी को देश में एक बार फिर से दीवाली जैसा माहौल होगा क्योंकि भगवान श्री राम अयोध्या में विराजमान हो रहे हैं। इस दिन अपने घर में रंगोली बना कर, दीपक जला कर भगवान श्री राम का स्वागत करें। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व वाली छत्तीसगढ़ की भाजपा सरकार द्वारा श्री रामलला दर्शन (अयोध्या धाम) योजना प्रारंभ करने से राम के ननिहाल वाले निहाल होंगे। श्री रामलला दर्शन योजना का यह निर्णय भी भाजपा के संकल्पों पर क्रियान्वयन का सूचक है। वैसे भगवान राम के अयोध्या में विराजमान होने की प्रतीक्षा में एक भक्ति गीत इन दिनों पूरे देश में धूम मचा रहा है। सारे रोमांटिक सांग नेपथ्य में चले गए हैं। जाने कितने गायक कलाकार अपनी मधुर आवाज में अलग-अलग अंदाज में इसे गा रहे हैं। संगीतकार सुमधुर धुनों से सजा रहे हैं और सुनने वाले भी इसे भक्ति भाव से गा रहे हैं। इस भक्ति गीत के बोल हैं- राम आएंगे, आएंगे, राम आएंगे। राम आएंगे तो अंगना सजाऊंगी, दीप जला के मैं अंगना सजाऊंगी। मेरी झोपड़ी के भाग आज खुल जाएंगे, राम आएंगे। मेरे जन्मों के पाप मिट जाएंगे, राम आएंगे। यह राजनीतिक स्तम्भ है तो राजनीति पर बात अपरिहार्य है। भाजपा खुशी से झूम रही है। गा रही है। विरोधियों से भी कह रही है कि आज मेरे संग नच लो, आज मेरे संग गा लो। राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा का न्योता भाजपा के परम राजनीतिक विरोधियों को भी भेजा गया है लेकिन उन्हें यह रास नहीं आ रहा। इस पर जबरदस्त राजनीति चल रही है। भाजपा के विरोधी इसे लेकर भी बयानबाज़ी से बाज नही आ रहे है।

यह बात भाजपा के लिए हाथों में मकर संक्रांति के लड्डू होने के जैसी है। वह भी कह रही है कि आना है तो आओ, मनाएंगे नहीं। विरोधियों के राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह से दूरियां बना लेने से भाजपा का कोई नुकसान नहीं होने वाला। कुछ धर्माचार्य भी अपनी नाराजगी व्यक्त कर रहे हैं तो इससे भी कोई फर्क नहीं पड़ने वाला। क्योंकि धर्म से बढ़कर कोई धर्म आचार्य नहीं होता। आस्था से बढ़कर कोई भी नहीं होता। देश की आस्था राम के प्रति है तो इससे किसी आचार्य का, किसी राजनीतिक दल अथवा किसी भी संगठन का विमुख होना कोई मायने नहीं रखता। जब जनसाधारण 22 जनवरी को रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के आयोजन से जुड़ रहा है, इससे देश का आध्यात्मिक धार्मिक वातावरण बदल रहा है। इसके साथ ही राजनीतिक वातावरण भी बदलकर चरम पर पहुंचना स्वाभाविक है। भारत का राजनीतिक वातावरण तो लालकृष्ण आडवाणी की रथ यात्रा रोके जाने के बाद से ही बदल गया था। भाजपा 2 से 100 पर पहुंच गई। कालांतर में उसने गठबंधन की सरकार बनाई और आज उस ऊंचाई पर है, जिसकी कल्पना कभी किसी ने नहीं की होगी। ऊंचाई अभी और बढ़ने की उम्मीद है।

दावे होने लगे हैं कि इस बार लोकसभा चुनाव में भाजपा उस मुकाम को छूने वाली है, जो कल्पनातीत रहा है। लेकिन यह संभव हो सकता है। क्योंकि जब रामलला हम आएंगे, मंदिर वहीं बनाएंगे के उद्घोष पर भाजपा संसद में 300 के पार आ सकती है तो अयोध्या में रामलला का मंदिर बन जाने और प्राण प्रतिष्ठा संपन्न हो जाने के बाद वह कहां तक जा सकती है, इसका अंदाज भाजपा के राजनीतिक विरोधियों को यदि नहीं है तो हो जाना चाहिए। यदि बात इन दिनों पूरे देश में छाए भक्ति गीत की की जाए कि मेरी झोपड़ी के भाग आज खुल जाएंगे तो भाजपा की झोपड़ी के भाग तो उसी दिन खुल गए, जिस दिन राम लला को टाट से निकाल कर ठाट से स्थापित करने के लिए संघर्ष का श्री गणेश किया गया।

Anil Mishara

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