छत्तीसगढ

दवा के दानव : छत्तीसगढ़ के सरकारी अस्पतालों में मरीजों को खिला दी गईं 8 लाख बेअसर दवाएं, मरीजों की जान पर आई आफत, CGMSC मामला दबाने में जुटा

छत्तीसगढ़ उजाला●

दवा के दानव आम जनता के जीवन से खेलने का काम कर रहे है।इन पर सरकार को लगाम लगाने की आवश्यकता है।प्रदेश में नई सरकार तो आ गयी पर इन दानवों पर कोई भी फर्क आज तक नही पड़ा है।दवा के नाम से जहर देकर अपनी काली कमाई में लगे अफसरों को कौन सजा देगा।अब तक इन पर कोई कार्यवाही नही होने से इनके हौसले बुलंद है।सीजीएमएससी को क्या भंग करना ही सही होगा।

*सेंट्रल ड्रग्स स्टेंडर्ड कंट्रोल आर्गनाइजेशन वेस्ट जोन मुंबई की जांच से खुला मामला*

*स्वास्थ्य मंत्री ने कहा, मामला संज्ञान में जांच के लिए कहा गया है*

सेफोडॉक्सिम (एंटीबायोटिक) और लिवो स्ट्रीजिन (एंटी एलर्जी) दवा को लेकर भी शिकायत, सैंपल जांच को लैब भेजे गए

*CGMSC में पहले भी सामने आ चुका है नकली दवाओं का बड़ा खेल*

*भाजपा का बयान : कांग्रेस प्रवृत्ति के अधिकारी सुधार जाएं, नहीं तो उल्टा लटका दिया जाएगा*

रायपुर छत्तीसगढ़ उजाला। छत्तीसगढ़ मेडिकल कारपोरेशन (CGMSC) द्वारा घटिया दवा सप्लाई का खेल सामने आया है। दरअसल CGMSC द्वारा राज्य के सरकारी अस्पतालों में सप्लाई की गई पेंटाप्रजोल (गैस की दवा) अमानक पाई गई है। यानी जो दवा सरकारी अस्पतालों में मरीजों को बांटी गई, वह किसी काम की नहीं थी। जब दवा के अमानक होने की बात सामने आई। तब तक 8 लाख दवाएं मरीजों को खिला दी गई थी। अब कितने मरीजों को साइड इफेक्ट हुआ, उनके जान पर बन आई। यह विभाग को पता ही नहीं है। ना इसपर किसी तरह की कार्रवाई हुई।

इधर सरकारी अस्पतालों में CGMSC द्वारा सप्लाई की गई सेफोडॉक्सिम (एंटीबायोटिक) और लिवो स्ट्रीजिन (एंटी एलर्जी) दवा को लेकर भी शिकायत हुई है। इसके बाद सैंपल जांच के लिए लैब भेजे गए हैं। पूरे मामले को अधिकारी दबाने में लगे हैं। मामले की सही जांच हुई तो सब स्टेंडर्ड दवाओं का बड़ा खेल सामने आएगा। जो सीधे करोड़ों रुपए के कमीशनखोरी से जुड़ा हुआ है। इसमें कई अधिकारी जेल तक जा सकते हैं।

अब सबसे बड़ा सवाल है, कि अमानक दवा सप्लाई कर लाखों मरीजों को खतरे में डालने वाले दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई। यह सब वही अधिकारी है, जो कांग्रेस सरकार में घपलेबाजी कर खूब मलाई खाए हैं।  हालांकि CGMSC की एमडी पद्मिनी भोई साहू ने जांच की बात कही है। लेकिन जिस तरह से मामला आता है। इसका रफादफा करने भरपूर कोशिश चल रही है।

*ऐसे खुला मामला…*
दरअसल दवा को लेकर शिकायत मिलने पर इसकी जांच हुई। सेंट्रल ड्रग्स स्टेंडर्ड कंट्रोल आर्गनाइजेशन वेस्ट जोन मुंबई ने डॉक्टर भीमराव आंबेडकर अस्पताल के सेंट्रल स्टोर को 27 दिसंबर को पत्र जारी किया। जो 12 जनवरी को अस्पताल प्रबंधन को मिला। इसमें दवा के सब स्टेंडर्ड होने की बात कही गई। मामले की जानकारी CGMSC को होने के बाद आनन फानन में सभी सरकारी अस्पतालों को दवा वापस करने के लिए पत्र लिखा गया।

*कंपनी को ब्लैक लिस्ट करने की तैयारी*
CGMSC के अधिकारी बताया कि यह दवा मान फार्मा कंपनी की है। जुलाई में करीब 10 लाख पेंटाप्रजोल दवा को राज्य के अस्पतालों में सप्लाई की गई थी। दवा अमानक पाई गई है, कंपनी को ब्लैक लिस्ट करने की कार्रवाई कर रहे हैं।

वर्जन :
अमानक दवा को लेकर हमने अधिकारी से कहा है जांच करें। जो भी दोषी पाया जाएगा। उनपर कार्रवाई होगी। मैंने अस्पतालों का दौरा किया है। सरकारी अस्पतालों में बेहतर सेवाएं मिले, यह सुनिश्चित करेंगे।
श्याम बिहारी जयसवाल, स्वास्थ्य मंत्री

वर्जन :
दवा का अमानक पाया जाना बेहद गंभीर लापरवाही है। पहले भी इस तरह के मामले आए हैं। दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई हो। CGMSC में पारदर्शिता की आवश्यकता है। ताकि मरीजों के लिए बेहतर दवाएं मिल सके।
राकेश गुप्ता, अध्यक्ष, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन, रायपुर छत्तीसगढ़

वर्जन :
अमानक दवाएं बीमारी पर असर नहीं करती। इसके साइड इफेक्ट भी होते है। यह मरीजों के लिए घातक हो सकता है। इसलिए दवाओं की गुणवत्ता पर ध्यान देना जरूरी है। जो नहीं हो पा रहा है।
-डॉक्टर विनय वर्मा, चीफ मेडिकल ऑफिसर, आंबेडकर अस्पताल

वर्जन : जो अमानक दवाएं खरीद रहे ऐसे अधिकारी सचेत हो जाएं, यह कांग्रेस की सरकार नहीं है। जो भी भ्रष्टाचार करेगा, उसे उल्टा लटका दिया जाएगा। सरकार दोषियों पर कार्रवाई जरूर करेगी।
नलनेश ठोकने, प्रवक्ता, भाजपा

Anil Mishara

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