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बीजेपी की मंथन बैठक में खुली सरकार-संगठन के तालमेल की जमीनी तस्वीर, कार्यकर्ताओं के काम नहीं होने और बिजली बिल पर नाराजगी

रायपुर(छत्तीसगढ़ उजाला)-छत्तीसगढ़ बीजेपी की दो दिवसीय मंथन बैठक के पहले दिन जिलों से आए फीडबैक ने सरकार और संगठन के बीच जमीनी स्तर पर तालमेल को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए। जिलाध्यक्षों, जिला पदाधिकारियों, विधायकों और संगठन से जुड़े नेताओं ने प्रभारी मंत्रियों के सामने कार्यकर्ताओं के काम नहीं होने, अधिकारियों की अनदेखी, मंत्रियों के जिलों में नियमित दौरे नहीं होने और बिजली बिल को लेकर जनता में बढ़ती नाराजगी जैसे मुद्दे प्रमुखता से उठाए।

बीजेपी ने संगठनात्मक कसावट के साथ सरकार के कामकाज की जमीनी समीक्षा के लिए यह दो दिवसीय बैठक आयोजित की है। बैठक के पहले दिन 16 जिलों की रिपोर्ट संगठन के सामने रखी गई। प्रदेश संगठन महामंत्री अजय जामवाल और प्रदेश संगठन महामंत्री पवन साय ने प्रभारी मंत्रियों के साथ जिलाध्यक्षों, संभाग प्रभारी-सह प्रभारी, जिला प्रभारियों और विधायकों से सीधे फीडबैक लिया।

कार्यकर्ताओं की सबसे बड़ी शिकायत—काम नहीं हो रहे

सूत्रों के मुताबिक, अधिकांश जिलों से एक जैसी शिकायत सामने आई कि सरकार बनने के बाद भी संगठन से जुड़े कार्यकर्ताओं के काम अपेक्षित गति से नहीं हो रहे हैं। कई पदाधिकारियों ने कहा कि वे स्थानीय समस्याएं लेकर अधिकारियों के पास जाते हैं, लेकिन उनकी बात को गंभीरता से नहीं लिया जाता।

अधिकारियों के रवैये को लेकर भी कई जिलों से नाराजगी सामने आई। कुछ विधायकों ने बैठक में यह बात रखी कि मंत्रियों को बार-बार पत्र लिखने के बावजूद कई मामलों में अपेक्षित कार्रवाई नहीं होती। इससे कार्यकर्ताओं में असंतोष बढ़ रहा है और इसका असर संगठन की जमीनी पकड़ तथा जनता के बीच पार्टी की छवि पर पड़ने की आशंका जताई गई।

प्रभारी मंत्रियों के दौरे पर भी सवाल

बैठक में प्रभारी मंत्रियों के अपने-अपने जिलों में नियमित दौरे नहीं होने का मुद्दा भी उठा। पदाधिकारियों का कहना था कि अगर प्रभारी मंत्री लगातार जिलों में पहुंचें, कार्यकर्ताओं से सीधा संवाद करें और स्थानीय समस्याओं को समझें, तो कई शिकायतों का समाधान मौके पर ही किया जा सकता है।

प्रदेश संगठन महामंत्री अजय जामवाल ने प्रभारी मंत्रियों से स्पष्ट तौर पर कहा कि वे अपने प्रभार वाले जिलों में नियमित रूप से जाएं और वहां की जमीनी परिस्थितियों को समझें। संगठन की कोशिश है कि मंत्री और कार्यकर्ताओं के बीच सीधा संवाद मजबूत हो, ताकि सरकार के कामकाज और योजनाओं का वास्तविक फीडबैक संगठन तक पहुंच सके।

बिजली बिल ने बढ़ाई जनता की नाराजगी

बैठक में बिजली बिल से जुड़ी शिकायतों को भी गंभीरता से उठाया गया। जिलों से आए पदाधिकारियों ने बताया कि बिजली बिल को लेकर आम लोगों में नाराजगी की स्थिति है। संगठन के सामने यह मुद्दा इसलिए भी महत्वपूर्ण माना गया, क्योंकि जनता से जुड़े ऐसे मुद्दों का सीधा असर पार्टी की जमीनी छवि पर पड़ता है।

मुख्यमंत्री भी पहुंचे, जिलों का रिपोर्ट कार्ड हुआ पेश

मंगलवार शाम कुशाभाऊ ठाकरे परिसर स्थित बीजेपी के प्रदेश कार्यालय में हुई बैठक में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय भी पहुंचे। केंद्रीय बीजेपी के निर्देश पर आयोजित इस मंथन में जिलों की राजनीतिक और संगठनात्मक स्थिति, सरकार के कामकाज, कार्यकर्ताओं की समस्याओं और जनता से जुड़े मुद्दों पर फीडबैक लिया गया।

खास बात यह है कि करीब दो महीने पहले मुख्यमंत्री निवास में भी सरकार और संगठन के बीच समन्वय को लेकर इसी तरह की बैठक हुई थी। अब एक बार फिर संगठन ने मंत्रियों और जिलों का रिपोर्ट कार्ड तैयार करने की कवायद शुरू की है। इससे साफ है कि पार्टी नेतृत्व सरकार और संगठन के बीच तालमेल को लेकर जमीनी स्थिति को गंभीरता से परख रहा है।

दूसरे दिन भी जारी रहेगा मंथन

बैठक का उद्देश्य केवल संगठनात्मक समीक्षा तक सीमित नहीं है। बीजेपी यह भी जानना चाहती है कि सरकार के कामकाज को लेकर कार्यकर्ताओं और आम जनता की वास्तविक राय क्या है और किन स्तरों पर समस्याएं सामने आ रही हैं।

दो दिवसीय मंथन के दूसरे दिन भी सरकार और संगठन के बीच समन्वय, कार्यकर्ताओं की शिकायतों, अधिकारियों के रवैये और जनता से जुड़े मुद्दों पर चर्चा जारी रहेगी। अब नजर इस बात पर है कि जिलों से मिले इस फीडबैक के बाद संगठन और सरकार के स्तर पर क्या सुधारात्मक कदम उठाए जाते हैं।

प्रशांत गौतम

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