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आदिवासी क्षेत्रों में विकास योजनाओं को मिलेगी रफ्तार, जमीन विवाद और पेसा उल्लंघन पर सख्ती के संकेत

प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा ने विभागीय योजनाओं की समीक्षा कर अधिकारियों को दिए जमीनी स्तर पर काम तेज करने के निर्देश; छात्रावासों में अन्य वर्गों का कोटा 10 से बढ़ाकर 20 प्रतिशत करने का फैसला

रायपुर(छत्तीसगढ़ उजाला)-आदिवासी बहुल और दूरस्थ क्षेत्रों में विकास योजनाओं की धीमी रफ्तार, आदिवासी जमीन से जुड़े विवाद, पेसा कानून के कथित उल्लंघन और छात्रावासों में सीमित सीटों की समस्या को लेकर सरकार ने गंभीर रुख अपनाया है। प्रमुख सचिव आदिम जाति विकास, अनुसूचित जाति विकास, अन्य पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण सोनमणि बोरा ने विभागीय योजनाओं की समीक्षा के दौरान अधिकारियों को जमीनी स्तर पर काम तेज करने और पात्र हितग्राहियों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने के निर्देश दिए।

समीक्षा बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत में प्रमुख सचिव ने कहा कि आदिवासी हितों से जुड़े मामलों को लेकर शासन गंभीर है। खासकर आदिवासी जमीन के उपयोग, जमीन से जुड़े विवाद और पेसा के उल्लंघन की शिकायतों को गंभीरता से लिया जाएगा। ऐसे मामलों की जांच और आवश्यक कार्रवाई के लिए गठित मुख्यमंत्री टास्क फोर्स के स्तर पर भी प्रकरणों को रखा जाएगा।

आदिवासी जमीन और पेसा उल्लंघन पर होगी निगरानी

आदिवासी क्षेत्रों में जमीन के उपयोग और कथित फर्जीवाड़े से जुड़े सवाल पर सोनमणि बोरा ने कहा कि यह गंभीर विषय है। उन्होंने बताया कि पेसा के अलावा आदिवासी हितों की रक्षा से जुड़े मामलों के लिए मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में टास्क फोर्स गठित है।

उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों को टास्क फोर्स के संज्ञान में लाया जाएगा। संबंधित जिलों के कलेक्टरों से भी जानकारी और रिपोर्ट ली जाएगी। तथ्यों की जांच के बाद नियमानुसार उचित कार्रवाई की जाएगी।

प्रमुख सचिव ने स्पष्ट किया कि विकास कार्यों के नाम पर आदिवासी हित प्रभावित नहीं होने चाहिए। प्रशासन की प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि आदिवासी क्षेत्रों में रहने वाले पात्र लोगों को शासन की योजनाओं का वास्तविक लाभ मिले और उनके अधिकारों की रक्षा हो।

दूरस्थ इलाकों में योजनाओं की पहुंच बढ़ाने पर जोर

सोनमणि बोरा ने माना कि राज्य के आदिवासी क्षेत्रों में विकास योजनाएं लगातार पहुंच रही हैं, लेकिन अभी भी कुछ दूरस्थ इलाकों में बुनियादी सुविधाओं की कमी है। ऐसे क्षेत्रों की पहचान कर विकास कार्यों को गति देने के निर्देश अधिकारियों को दिए गए हैं।

उन्होंने कहा कि योजनाओं की सफलता केवल स्वीकृति, बजट या कागजी प्रगति से तय नहीं होगी। असली मूल्यांकन यह है कि योजना का लाभ पात्र व्यक्ति तक पहुंचा या नहीं।

मैदानी अधिकारियों को नियमित निगरानी करने और सामने आने वाली समस्याओं का तत्काल समाधान करने के निर्देश दिए गए हैं।

PMGSY से दूरस्थ गांवों तक पहुंचेंगी सड़कें

दूरस्थ आदिवासी क्षेत्रों में सड़क संपर्क को लेकर प्रमुख सचिव ने कहा कि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के तहत तेजी से काम किया जा रहा है। बिलासपुर जिले में भी सड़क निर्माण की प्रगति को उन्होंने रेखांकित किया।

उन्होंने कहा कि जिन दूरस्थ गांवों तक अभी सड़क सुविधा नहीं पहुंची है, वहां जरूरत और पात्रता के आधार पर सड़क संपर्क बढ़ाने के प्रयास जारी रहेंगे।

हाल ही में विभिन्न क्षेत्रों का सर्वेक्षण भी किया गया है। सर्वे के दौरान ऐसे छोटे गांवों और पात्र परिवारों की पहचान की जा रही है, जो अब तक किसी न किसी योजना के लाभ से छूट गए हैं। इन्हें आवास, सड़क, बिजली और अन्य बुनियादी सुविधाओं से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा।

छात्रवृत्ति के लिए समय पर आवेदन कराने के निर्देश

विभागीय समीक्षा बैठक में छात्रवृत्ति योजना भी प्रमुख एजेंडे में रही। प्रमुख सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि विद्यार्थियों को निर्धारित समय-सीमा में आवेदन करने में किसी तरह की परेशानी नहीं होनी चाहिए।

इसके लिए संस्था प्रमुखों के साथ बैठक कर पूरी प्रक्रिया स्पष्ट करने और नए प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों से भी समय पर आवेदन कराने के निर्देश दिए गए हैं।

उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष छात्रवृत्ति के क्षेत्र में बेहतर परिणाम मिले हैं। इस वर्ष भी अधिक से अधिक पात्र विद्यार्थियों को योजना से जोड़ना विभाग का लक्ष्य है।

महाविद्यालय और विश्वविद्यालय स्तर के विद्यार्थियों के आवेदन की प्रक्रिया के लिए संबंधित संस्थानों के प्रमुखों को जिम्मेदारी दी गई है। वहीं निजी संस्थानों से जुड़े मामलों में जिला स्तर पर आवश्यक प्रक्रिया पूरी कराने के निर्देश दिए गए हैं।

छात्रावासों में सीटों का असंतुलन होगा दूर

आदिवासी छात्रावासों में प्रवेश के लिए सीमित सीटों की समस्या पर भी प्रमुख सचिव ने बड़ा निर्णय बताया। उन्होंने कहा कि कुछ स्थानों पर छात्रावासों में विद्यार्थियों की मांग काफी अधिक है, जबकि कुछ छात्रावासों में संबंधित वर्ग के विद्यार्थियों की संख्या कम होने के कारण सीटें खाली रह जाती हैं।

इस असंतुलन को दूर करने के लिए अन्य वर्गों के विद्यार्थियों के लिए निर्धारित कोटा 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 20 प्रतिशत करने का निर्णय लिया गया है।

इससे ऐसे छात्रावास जहां संबंधित वर्ग के पर्याप्त विद्यार्थी उपलब्ध नहीं हैं, वहां अन्य वर्गों के पात्र विद्यार्थियों को भी प्रवेश मिल सकेगा। इससे छात्रावासों की खाली क्षमता का बेहतर उपयोग होगा और जरूरतमंद विद्यार्थियों को आवासीय सुविधा उपलब्ध कराई जा सकेगी।

जिला और संभाग मुख्यालयों में बनेंगे नए छात्रावास

प्रमुख सचिव ने बताया कि जिला और संभाग मुख्यालयों में छात्रावासों की बढ़ती मांग को देखते हुए नए छात्रावासों के निर्माण पर भी काम किया जा रहा है।

इसके साथ ही सरकार ऐसी व्यवस्था लाने की तैयारी में है, जिसके तहत पात्र विद्यार्थियों को उनकी आवश्यकता के अनुसार सरकारी या निजी छात्रावास में रहने की सुविधा मिल सकेगी। निर्धारित पात्रता के आधार पर छात्रावास के किराये का भार शासन द्वारा उठाने की व्यवस्था किए जाने की तैयारी है।

इस व्यवस्था के लागू होने से उन विद्यार्थियों को भी राहत मिलने की उम्मीद है, जिन्हें सरकारी छात्रावासों में सीट नहीं मिल पाती है।

जलभराव और बुनियादी समस्याओं का होगा समाधान

समीक्षा के दौरान छात्रावासों में जलभराव समेत अन्य बुनियादी समस्याओं का मुद्दा भी सामने आया। प्रमुख सचिव ने माना कि कुछ छात्रावासों में ऐसी समस्याएं हैं।

उन्होंने अधिकारियों को इन समस्याओं का प्राथमिकता के आधार पर निराकरण करने के निर्देश दिए। छात्रावासों में रहने वाले विद्यार्थियों को सुरक्षित और बेहतर वातावरण उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया।

PM जनमन से एकलव्य विद्यालय तक योजनाओं की समीक्षा

बैठक में आदिवासी कल्याण से जुड़ी कई महत्वपूर्ण योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की गई। इनमें पीएम जनमन योजना, धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान, आदर्श ग्राम योजना, एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय, प्रयास आवासीय विद्यालय समेत छात्र-छात्राओं के लिए संचालित कोचिंग योजनाएं शामिल रहीं।

इसके अलावा विद्यार्थियों को पठन सामग्री, गणवेश और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की स्थिति की भी समीक्षा की गई।

प्रमुख सचिव ने अधिकारियों से कहा कि योजनाओं की प्रगति केवल फाइलों और रिपोर्ट तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। मैदानी स्तर पर इसकी वास्तविक स्थिति दिखाई देनी चाहिए।

कागजों में नहीं, जमीन पर दिखे योजनाओं का असर”

सोनमणि बोरा ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि शासन की योजनाओं का वास्तविक लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी योजना की सफलता इस बात से तय होगी कि पात्र व्यक्ति को उसका लाभ मिला या नहीं।

उन्होंने मैदानी अधिकारियों को नियमित निरीक्षण, निगरानी और समस्याओं के तत्काल समाधान पर विशेष ध्यान देने को कहा।

प्रमुख सचिव ने माना कि राज्य के दूरस्थ आदिवासी क्षेत्रों में अभी भी बहुत कुछ किया जाना बाकी है। ऐसे क्षेत्रों में विकास योजनाओं की पहुंच बढ़ाने के साथ-साथ सड़क, आवास, बिजली और शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं का विस्तार लगातार प्राथमिकता में रखना होगा।

सरकार का फोकस अब आदिवासी क्षेत्रों में योजनाओं की स्वीकृति और कागजी प्रगति से आगे बढ़कर उनके वास्तविक और जमीनी असर पर है।

प्रशांत गौतम

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