छत्तीसगढ़ टीएलपीएस 2025 रिपोर्ट जारी: शुरुआती शिक्षा में सुधार के लिए शिक्षण पद्धतियों पर फोकस, कक्षा 1-2 की पढ़ाई का हुआ गहन विश्लेषण
रायपुर(छत्तीसगढ़ उजाला)-छत्तीसगढ़ में प्रारंभिक शिक्षा की गुणवत्ता को बेहतर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए लैंग्वेज एंड लर्निंग फाउंडेशन (LLF) ने टाटा ट्रस्ट और राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT), छत्तीसगढ़ के सहयोग से ‘टीचिंग एंड लर्निंग प्रैक्टिसेज सर्वे (TLPS) 2025’ रिपोर्ट जारी की। रिपोर्ट का विमोचन जुलाई 2026 में एससीईआरटी रायपुर के कॉन्फ्रेंस हॉल में आयोजित कार्यक्रम के दौरान किया गया।
यह सर्वे कक्षा 1 और 2 में शिक्षण की वास्तविक स्थिति, कक्षा के माहौल और बच्चों को पढ़ाने के तरीकों का आकलन करने के उद्देश्य से किया गया है। रिपोर्ट के निष्कर्ष ‘निपुण भारत मिशन’ के तहत बुनियादी साक्षरता एवं संख्यात्मक ज्ञान (FLN) को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
शिक्षा जगत के विशेषज्ञ रहे मौजूद
रिपोर्ट विमोचन कार्यक्रम में एससीईआरटी के अतिरिक्त संचालक जे. पी. रथ, एलएलएफ के राष्ट्रीय सलाहकार (बहुभाषी शिक्षा) पद्मश्री महेंद्र कुमार मिश्रा, शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, विभिन्न जिलों के DIET प्राचार्य, समग्र शिक्षा के प्रतिनिधि, राज्य संसाधन समूह (SRG) के सदस्य और शिक्षा विशेषज्ञ शामिल हुए।
100 कक्षाओं का किया गया अध्ययन
टीएलपीएस 2025 सर्वे नवंबर 2024 से मार्च 2025 के बीच कबीरधाम और नारायणपुर जिलों की 100 प्राथमिक कक्षाओं में किए गए विस्तृत अवलोकन पर आधारित है।
एलएलएफ के सीनियर एकेडमिक स्पेशलिस्ट अजय गुप्ता ने सर्वे की रूपरेखा और प्रक्रिया प्रस्तुत की, जबकि सीनियर स्पेशलिस्ट (बहुभाषी शिक्षा) संजय गुलाटी ने रिपोर्ट के प्रमुख निष्कर्ष साझा किए।
‘बिना डर के सीखने वाला माहौल सबसे जरूरी’
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए एससीईआरटी के अतिरिक्त संचालक जे. पी. रथ ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल उत्तर याद कराना नहीं, बल्कि बच्चों में सीखने की जिज्ञासा विकसित करना है।
उन्होंने कहा-“जिस दिन कोई बच्चा बिना डर के अपनी गलती स्वीकार कर लेता है, उसी दिन उसके भीतर वास्तविक सीखने की प्रक्रिया शुरू होती है। अच्छा शिक्षक जवाब देने के बजाय ऐसे सवाल छोड़ता है जो जीवनभर सीखने की प्रेरणा दें।”
84% स्कूलों में बहुस्तरीय कक्षाएं
टाटा ट्रस्ट की डिप्टी हेड ऑफ प्रोग्राम्स एवं हेड ऑफ एजुकेशन अमृता पटवर्धन ने कहा कि रिपोर्ट केवल योजनाओं की जानकारी नहीं देती बल्कि यह भी बताती है कि कक्षा में शिक्षक और बच्चे पढ़ाई की प्रक्रिया को किस प्रकार अनुभव करते हैं।
उन्होंने बताया कि—84% स्कूलों में एक ही कक्षा में अलग-अलग स्तर के बच्चों को पढ़ाया जा रहा है।इससे शिक्षकों के सामने नई चुनौतियाँ आती हैं, लेकिन बेहतर शिक्षण की संभावनाएँ भी बनती हैं।बहुभाषी शिक्षा, स्थानीय भाषाओं के उपयोग और बहुस्तरीय कक्षाओं के लिए विशेष रणनीतियों की आवश्यकता है।
टीएलपीएस 2025 रिपोर्ट में कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए—66% शिक्षक बच्चों की मातृभाषा से परिचित पाए गए।82% कक्षाओं में शिक्षक समूह या व्यक्तिगत गतिविधियों के दौरान बच्चों की नियमित निगरानी नहीं कर रहे थे।70% कक्षाओं में बच्चों के सीखने के स्तर के अनुसार शिक्षण पद्धति में बदलाव नहीं देखा गया।
रिपोर्ट में मातृभाषा के प्रभावी उपयोग, बच्चों की सक्रिय भागीदारी बढ़ाने और गतिविधि आधारित शिक्षण को प्राथमिकता देने की सिफारिश की गई है।
‘नीतियां तभी सफल होंगी जब असर कक्षा में दिखे’
कार्यक्रम में शिक्षा विशेषज्ञों ने कहा कि केवल नीतियाँ बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनका प्रभाव कक्षा में दिखाई देना चाहिए।
डाइट जशपुर के प्राचार्य एम. ज़ेड. यू. सिद्दीकी ने कहा कि अच्छी नीतियाँ और पर्याप्त संसाधन तभी सार्थक हैं जब उनका सीधा लाभ बच्चों की सीखने की प्रक्रिया में दिखाई दे।
वहीं, एससीईआरटी की राज्य स्रोत समूह (SRG) की सदस्या पुष्पा शुक्ला ने कहा कि बच्चों के सीखने के परिणामों में सुधार के लिए कक्षा की शिक्षण प्रक्रिया में बदलाव आवश्यक है।
एलएलएफ संस्थापक बोले – हर बच्चे को ‘निपुण’ बनाना लक्ष्य
एलएलएफ के संस्थापक एवं एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर डॉ. धीर झिंगरन ने कहा कि छत्तीसगढ़ की भाषाई और सामाजिक विविधता उसकी कक्षाओं में स्पष्ट दिखाई देती है।
उन्होंने कहा कि यह रिपोर्ट समझने में मदद करती है कि बच्चे किस प्रकार सीखते हैं, शिक्षक अलग-अलग भाषाई और शैक्षणिक आवश्यकताओं के अनुसार कैसे पढ़ाते हैं और किन क्षेत्रों में सुधार की आवश्यकता है।
उन्होंने जोर देकर कहा कि शिक्षकों और मेंटर्स को लगातार शैक्षणिक सहयोग उपलब्ध कराया जाना चाहिए ताकि राज्य का हर बच्चा ‘निपुण’ बन सके।
एलएलएफ क्या है?
वर्ष 2015 में स्थापित लैंग्वेज एंड लर्निंग फाउंडेशन (LLF) एक गैर-लाभकारी संस्था है, जो सरकारी प्राथमिक विद्यालयों में बुनियादी साक्षरता एवं संख्यात्मक ज्ञान (FLN) को मजबूत करने के लिए सरकारों के साथ काम करती है।
संस्था मुख्य रूप से तीन क्षेत्रों में कार्य करती है शिक्षकों एवं मेंटर्स का पेशेवर विकास,जिला स्तर पर डेमोंस्ट्रेशन कार्यक्रम,शिक्षा व्यवस्था को संस्थागत रूप से मजबूत बनाना
एलएलएफ का विशेष फोकस बहुभाषी शिक्षा (Multilingual Education) पर है, जिससे बच्चों को उनकी मातृभाषा के माध्यम से बेहतर सीखने का अवसर मिल सके।
एलएलएफ अब तक देश के 10 राज्यों में कार्य कर चुकी है।
2.18 करोड़ बच्चों तक पहुंच
11.8 लाख शिक्षकों का प्रशिक्षण
14 लाख बच्चों के सीखने के परिणामों में जिला स्तर पर सुधार
संस्था का उद्देश्य है कि “कोई भी बच्चा सीखने की दौड़ में पीछे न रहे।”



