छत्तीसगढरायपुर

साय सरकार में निगम-मंडलों की नियुक्तियों पर बढ़ी चर्चा, सैकड़ों पद अब भी खाली:राजनीतिक नियुक्तियों का इंतजार कर रहे भाजपा कार्यकर्ता, संगठन के भीतर बढ़ रही बेचैनी

रायपुर(छत्तीसगढ़ उजाला)-vishnu Deo Sai सरकार के कार्यकाल का तीसरा वर्ष शुरू हो चुका है, लेकिन प्रदेश के कई महत्वपूर्ण निगम-मंडल, आयोग, प्राधिकरण और बोर्ड आज भी बिना नियुक्तियों के संचालित हो रहे हैं। राज्य में करीब 300 से अधिक राजनीतिक पद लंबे समय से रिक्त पड़े हैं, जिससे भाजपा कार्यकर्ताओं और नेताओं के बीच इंतजार और असंतोष की स्थिति बनती जा रही है।

इन पदों पर अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सदस्य और विभिन्न श्रेणियों की नियुक्तियां होनी हैं। माना जाता है कि इन संस्थाओं में राजनीतिक नियुक्तियों के जरिए पार्टी अपने अनुभवी नेताओं, चुनाव में सक्रिय रहे कार्यकर्ताओं और सामाजिक समीकरणों को साधने वाले चेहरों को जिम्मेदारी देती है।

पार्टी से जुड़े कई वरिष्ठ नेता, चुनाव हार चुके दिग्गज, क्षेत्रीय प्रतिनिधि और संगठन के सक्रिय कार्यकर्ता लंबे समय से अपनी नियुक्ति की उम्मीद लगाए बैठे हैं। लेकिन नियुक्तियों में हो रही लगातार देरी अब संगठन और सत्ता दोनों के भीतर चर्चा का विषय बनने लगी है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि सरकार को जनता के बीच अपनी पकड़ और संगठनात्मक संतुलन मजबूत बनाए रखने के लिए जल्द नियुक्तियां करनी होंगी। वहीं कार्यकर्ताओं का कहना है कि लंबे समय से मेहनत कर रहे लोगों को जिम्मेदारी मिलने से संगठन में ऊर्जा और उत्साह बढ़ेगा।
इन संस्थाओं में अध्यक्ष पद अब भी खाली
योग आयोग
महिला आयोग
छत्तीसगढ़ केश शिल्पी बोर्ड
राज्य उर्दू अकादमी
दीनदयाल शोधपीठ
कबीर शोधपीठ
स्वामी विवेकानंद शोधपीठ
पं. सुंदरलाल शर्मा शोधपीठ
उपाध्यक्ष पदों पर भी नहीं हुई नियुक्ति
श्रम कल्याण मंडल
सिविल सप्लाई कॉर्पोरेशन
अंत्यावसायी निगम
हस्तशिल्प बोर्ड
गौ सेवा आयोग
आरडीए
कृषक कल्याण परिषद
पर्यटन मंडल
अरपा विकास प्राधिकरण
क्रेडा
सदस्य पदों पर भी कई जगह रिक्तियां
बीज विकास निगम
शाकंभरी बोर्ड
भवन एवं सन्निर्माण मंडल
माटी कला बोर्ड
हज कमेटी
मदरसा बोर्ड
हाउसिंग बोर्ड
पीएससी
सरकार के गठन के बाद से अब तक इन पदों पर नियुक्तियां नहीं होने से कार्यकर्ताओं में मायूसी देखी जा रही है। संगठन के भीतर भी यह चर्चा तेज हो गई है कि आखिर राजनीतिक नियुक्तियों पर फैसला कब लिया जाएगा। अब सभी की नजर पार्टी हाईकमान और सरकार के अगले निर्णय पर टिकी हुई है।

प्रशांत गौतम

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