
आधी रात का टेंडर! समग्र शिक्षा के तहत टेबल खरीदी पर उठे गंभीर सवाल
रायपुर(छत्तीसगढ़ उजाला)-छत्तीसगढ़ में जैम पोर्टल के जरिए सरकारी खरीदी एक बार फिर सवालों के घेरे में है। इस बार मामला स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा समग्र शिक्षा योजना के तहत बड़ी संख्या में टेबल खरीदने के टेंडर से जुड़ा है। टेंडर प्रक्रिया में समय को लेकर उठे सवालों ने पारदर्शिता पर बहस छेड़ दी है।
दरअसल, विभाग ने 27 मार्च 2026 को टेंडर जारी किया, लेकिन हैरानी की बात यह है कि इसे रात 11 बजकर 52 मिनट पर कॉल किया गया। जबकि निविदा भरने के लिए 4 मई 2026 तक, यानी लगभग 38 दिनों का लंबा समय दिया गया है। ऐसे में यह सवाल उठना लाज़मी है कि जब पर्याप्त समय उपलब्ध था, तो टेंडर आधी रात को जारी करने की क्या जरूरत थी।
टेंडर का विवरण:
Bid No.: GEM/2026/B/7398617
वस्तु: Composite Office Tables (IS 8126 V2 के अनुरूप)
मात्रा: 42,858
विभाग: स्कूल शिक्षा विभाग, छत्तीसगढ़
बिड प्रारंभ: 27-03-2026, रात 11:52 बजे
बिड समाप्ति: 04-05-2026, दोपहर 1:00 बजे
टेंडर के समय को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं—
क्या उस समय सरकारी दफ्तर खुला था?
क्या सक्षम अधिकारियों की अनुमति से देर रात यह प्रक्रिया पूरी की गई?
या फिर टेंडर किसी निजी स्थान से जारी किया गया?
क्या यह किसी खास फर्म को लाभ पहुंचाने की कोशिश है?
व्हिसिल ब्लोअर नरेश गुप्ता ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यह स्पष्ट होना चाहिए कि टेंडर किस परिस्थिति में और किसके निर्देश पर जारी किया गया।
छत्तीसगढ़ में जैम पोर्टल से खरीदी पहले भी विवादों में रही है—
आदिवासी विकास विभाग द्वारा स्टील का जग 32,000 रुपये में खरीदे जाने का मामला सामने आया, जबकि बाजार मूल्य 400 से 1000 रुपये के बीच है।
महासमुंद के एक कॉलेज में उच्च शिक्षा विभाग द्वारा करीब 1.06 करोड़ रुपये की अनियमितता उजागर हुई।
सरगुजा में अनुसूचित जाति-जनजाति विभाग द्वारा एक टीवी 1 लाख रुपये से अधिक में खरीदा गया।
जग सप्लाई का ठेका पाने वाली “श्रीराम सेल्स” का अस्तित्व ही संदिग्ध पाया गया।
स्वास्थ्य विभाग में 104 दवाओं की खरीदी में 75 करोड़ रुपये के महंगे सौदे को लेकर विवाद जारी है।
ई-टेंडरिंग सिस्टम भले ही 24 घंटे सक्रिय रहता हो, लेकिन संवेदनशील और बड़े वित्तीय मामलों में समय का चयन भी पारदर्शिता का अहम हिस्सा होता है। ऐसे में आधी रात को टेंडर जारी करना संदेह को जन्म देता है।
अब देखना यह होगा कि सरकार इस मामले में क्या रुख अपनाती है और क्या जांच के जरिए इन सवालों के जवाब सामने आ पाते हैं या नहीं।




