मरवाही वनमंडल में गड़बड़ियों पर पर्दा? अनियमितताओं में घिरे कर्मचारियों को दूसरे बीट का प्रभार, DFO की भूमिका पर उठे गंभीर सवाल

गौरेला-पेंड्रा-मरवाही(छत्तीसगढ़ उजाला)
मरवाही वनमंडल इन दिनों लगातार विवादों के केंद्र में है। वन विभाग के भीतर अनियमितताओं और कथित भ्रष्टाचार के मामलों के बीच अब कर्मचारियों को दिए जा रहे प्रभार को लेकर भी बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि जिन बीट गार्डों और कर्मचारियों के नाम विभिन्न अनियमितताओं और अवैध गतिविधियों में सामने आए हैं, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के बजाय उन्हें एक स्थान से हटाकर दूसरे बीट या क्षेत्र का प्रभार सौंप दिया जा रहा है।
स्थानीय लोगों और विभागीय सूत्रों का कहना है कि यह महज प्रशासनिक व्यवस्था नहीं, बल्कि गड़बड़ियों पर पर्दा डालने की कोशिश प्रतीत होती है। ऐसे कर्मचारियों को हटाने या निलंबित करने के बजाय दूसरी जगह जिम्मेदारी देना पूरे तंत्र की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहा है।
मरवाही वनमंडल पहले से ही अवैध लकड़ी कटाई, पौधारोपण योजनाओं में गड़बड़ी, गोबर खाद खरीदी और ग्रीन क्रेडिट जैसी योजनाओं में अनियमितताओं के आरोपों को लेकर चर्चा में रहा है। ऐसे में संदिग्ध कर्मचारियों को नए क्षेत्रों का प्रभार मिलने से यह आशंका भी जताई जा रही है कि अवैध गतिविधियों का दायरा और बढ़ सकता है।
इस पूरे मामले में वनमंडल के शीर्ष अधिकारी, विशेषकर DFO की भूमिका को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं। सवाल उठ रहे हैं कि क्या यह सब उनकी जानकारी में हो रहा है या फिर किसी स्तर पर संरक्षण दिया जा रहा है। यदि अनियमितताओं में शामिल कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई नहीं होती, तो विभाग की साख पर भी सवाल खड़े होना स्वाभाविक है।
मरवाही वनमंडल में लगातार सामने आ रहे विवादों ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर विभाग में चल क्या रहा है—क्या यह सिर्फ लापरवाही है या फिर किसी बड़े संरक्षण के कारण कार्रवाई से बचने का खेल? अब सभी की निगाहें शासन और उच्च अधिकारियों के अगले कदम पर टिकी हुई हैं।




