गौरेला पेंड्रा मरवाहीछत्तीसगढ

कोटमी में आधार कैंप पर गंभीर सवाल: निजी परिसर से संचालन, हितग्राहियों से अवैध वसूली के आरोप


गौरेला–पेंड्रा–मरवाही(कोटमी)
कोटमी क्षेत्र में संचालित आधार पंजीयन एवं संशोधन शिविर को लेकर गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। स्थानीय ग्रामीणों ने कैंप संचालन की प्रक्रिया, स्थान चयन और शुल्क वसूली को लेकर नाराज़गी जताते हुए प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग की है।
गांव–गांव शिविर की जिम्मेदारी, पर संचालन पर सवाल
जानकारी के अनुसार, महिला एवं बाल विकास विभाग से अधिकृत आईडी प्राप्त संचालक अंकुश गुप्ता को क्षेत्र में गांव–गांव शिविर लगाकर आधार पंजीयन एवं संशोधन कार्य करने की जिम्मेदारी दी गई है। नियमानुसार ऐसे शिविर सार्वजनिक स्थल, पंचायत भवन या शासकीय कार्यालय में निर्धारित प्रावधानों के तहत संचालित किए जाने चाहिए, ताकि अधिक से अधिक हितग्राही आसानी से लाभ उठा सकें।
निजी परिसर से संचालन का आरोप
ग्रामीणों का आरोप है कि शिविर को निर्धारित सार्वजनिक स्थल पर न लगाकर कोटमी में एक निजी दुकान/परिसर से संचालित किया जा रहा है। इससे विशेषकर आदिवासी ग्रामीणों, महिलाओं, बुजुर्गों और छोटे बच्चों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी अनुमति से संचालित शिविर का निजी स्थान से संचालन पारदर्शिता और नियमों पर सवाल खड़े करता है।
आधार सेवाओं पर मनमानी वसूली की शिकायत
हितग्राहियों ने यह भी आरोप लगाया है कि आधार कार्ड बनाने और संशोधन के नाम पर प्रति व्यक्ति मनमाना शुल्क लिया जा रहा है। आर्थिक रूप से कमजोर एवं आदिवासी परिवारों से भी राशि वसूले जाने की शिकायत सामने आई है।
ग्रामीणों का कहना है कि कई आधार सेवाएं शासन द्वारा निर्धारित दरों पर या निशुल्क उपलब्ध कराई जानी चाहिए, लेकिन यहां तय प्रावधानों का पालन नहीं हो रहा है।
संचालक का पक्ष
मामले में संबंधित संचालक से संपर्क करने पर उन्होंने कथित रूप से बताया कि निजी परिसर से संचालन उच्चाधिकारियों के निर्देश पर किया जा रहा है। हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि यदि ऐसा कोई लिखित आदेश है, तो उसे सार्वजनिक किया जाना चाहिए, ताकि स्थिति स्पष्ट हो सके और भ्रम की स्थिति समाप्त हो।
प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर आवश्यक कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि यदि शिविर निर्धारित स्थल पर, पारदर्शिता के साथ और शासन द्वारा तय शुल्क नियमों का पालन करते हुए संचालित हो, तो आमजन को बड़ी राहत मिल सकती है।
ग्रामीणों का यह भी कहना है कि शासन की मंशा आंगनबाड़ी के छोटे बच्चों, महिलाओं और जरूरतमंद परिवारों को सुविधा प्रदान करने की है, लेकिन वर्तमान व्यवस्था में कई परिवार आधार पंजीयन और संशोधन के लिए भटकने को मजबूर हैं।
फिलहाल क्षेत्र में असंतोष का माहौल है और लोग प्रशासन से शीघ्र हस्तक्षेप की अपेक्षा कर रहे हैं।

प्रशांत गौतम

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