छत्तीसगढबिलासपुर

हाई-प्रोफाइल आयोजन में लापरवाही का ज़हर
SECR ऑफिसर्स मीट का भोजन बना स्वास्थ्य संकट—25 से ज्यादा वरिष्ठ अधिकारी व परिजन बीमार, मामला अपोलो तक पहुंचा, प्रशासन खामोश

बिलासपुर(छत्तीसगढ़ उजाला)
दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे (SECR) के एक हाई-प्रोफाइल आधिकारिक आयोजन में गंभीर प्रशासनिक लापरवाही सामने आई है। ऑफिसर्स स्पोर्ट्स एंड कल्चरल मीट के समापन के बाद परोसे गए भोजन से 25 से अधिक वरिष्ठ रेलवे अधिकारी और उनके परिजन फूड पॉइजनिंग का शिकार हो गए, जिससे रेलवे की निगरानी व्यवस्था और जवाबदेही पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं।
कार्यक्रम समाप्ति के बाद जैसे ही अधिकारियों और उनके परिवारजनों ने भोजन किया, कुछ ही घंटों में उल्टी, दस्त और तेज पेट दर्द की शिकायतें सामने आने लगीं। देर रात रेलवे अस्पताल से लेकर निजी अस्पतालों तक अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
सूत्रों के अनुसार, एसडीजीएम मनोज गुरुमुखी की हालत सबसे ज्यादा गंभीर बताई जा रही है, जिन्हें तबीयत बिगड़ने पर अपोलो अस्पताल में भर्ती कराया गया। उनके परिजन भी अस्वस्थ बताए जा रहे हैं। इसके अलावा एपीओ रंजन, एडीआरएम सहित कई मंडलीय अधिकारी भी इलाज के लिए अस्पताल पहुंचे।
भोजन की गुणवत्ता पर सवाल
जानकारी के मुताबिक, आयोजन के लिए शहर के एक नामी होटल से करीब 300 प्लेट भोजन का ऑर्डर दिया गया था। रविवार रात लगभग 100 लोगों ने ही भोजन किया, इसके बावजूद बड़ी संख्या में अधिकारियों के बीमार पड़ने से भोजन की गुणवत्ता, स्वच्छता और भंडारण व्यवस्था पर गंभीर संदेह गहराता जा रहा है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि—क्या भोजन ताजा था या पहले से तैयार कर रखा गया?
प्रशासन की चुप्पी चिंता बढ़ाने वाली
इतनी गंभीर घटना के बावजूद रेलवे प्रशासन की ओर से अब तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। न यह स्पष्ट किया गया कि भोजन की जांच कराई गई या नहीं, और न ही यह बताया गया कि जिम्मेदारी किसकी तय की जाएगी।
चिंता इस बात को लेकर भी है कि इसी होटल को 22 जनवरी को होने वाली सांसदों की बैठक के लिए भी भोजन की जिम्मेदारी दी गई है। ऐसे में बिना जांच-पड़ताल उसी होटल पर दोबारा भरोसा करना, एक बड़े जोखिम से कम नहीं माना जा रहा।
अब सवाल सीधे तौर पर सिस्टम से हैं—
क्या अधिकारियों और उनके परिजनों की सेहत से बड़ा कोई आयोजन है?
क्या इस मामले में जिम्मेदारों पर कार्रवाई होगी?
या फिर यह मामला भी अन्य फाइलों की तरह दबा दिया जाएगा?
SECR जैसे बड़े संस्थान में हुई यह घटना केवल फूड पॉइजनिंग का मामला नहीं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही, कमजोर निगरानी और जवाबदेही की कमी का स्पष्ट उदाहरण है—जहां स्वाद, सुविधा और सुरक्षा, तीनों मोर्चों पर व्यवस्था फेल नजर आती है।

प्रशांत गौतम

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