गौरेला पेंड्रा मरवाहीछत्तीसगढ

पेंड्रा BEO ऑफिस में अराजकता हावी: प्रभारी BEO ऐसा कि न निगरानी, न जिम्मेदारी; कर्मचारी मनमर्जी पर उतरे, नशे में काम करने तक के आरोप


पेंड्रा(छत्तीसगढ़ उजाला)-ब्लॉक शिक्षा अधिकारी (BEO) कार्यालय पेंड्रा इन दिनों अव्यवस्था, लापरवाही और अनुशासनहीनता का केंद्र बना हुआ है। कार्यालय की पूरी व्यवस्था पटरी से उतर चुकी है और इसकी सबसे बड़ी वजह बताया जा रहा है—प्रभारी BEO ऐसा कि जैसे दफ्तर की व्यवस्था, अनुशासन और कार्यप्रणाली से उनका कोई सरोकार ही नहीं।

प्रभारी BEO ऐसा… कि दफ्तर अपने हाल पर छोड़ दिया गया

सूत्रों और कर्मचारियों के अनुसार, प्रभारी BEO दफ्तर में तो आते हैं, लेकिन सिर्फ उपस्थिति भर देने तक ही सीमित रहते हैं।
न कामकाज की निगरानी,
न कर्मचारियों पर नियंत्रण,
न समस्याओं पर ध्यान—
ऐसे प्रभारी BEO की निष्क्रियता ने पूरे कार्यालय को अव्यवस्थित कर दिया है।

जब नेतृत्व निष्क्रिय हो, तो कर्मचारियों की कार्यशैली अपना आप बिगड़ जाती है। यही कारण है कि पेंड्रा BEO ऑफिस आज मनमानी का केंद्र बनता जा रहा है।

कर्मचारियों की मनमानी: फाइलें रुकीं, काम लटका, शिथिल रवैया

कार्यालय में कुछ कर्मचारी खुले तौर पर मनमानी कर रहे हैं।
शिक्षकों और कर्मचारियों का कहना है कि

समय पर काम नहीं किया जाता

फाइलें जानबूझकर अटकी रहती हैं

शिक्षकों को बार-बार चक्कर लगाने पड़ते हैं

अनुशासन का कोई दबाव नहीं


जब प्रभारी BEO ऐसा हो, तो कर्मचारियों पर नियंत्रण किससे होगा?
यही सवाल कार्यालय आने वाले लोग पूछ रहे हैं।

नशे में काम करने तक के गंभीर आरोप

कार्यालय के माहौल को लेकर सबसे गंभीर आरोप यह है कि कुछ कर्मचारी शराब के नशे में कार्यालय में काम करते देखे गए।
हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन शिक्षकों और स्थानीय लोगों में इस बात की चर्चा तेज है कि कार्यालय में ऐसी गतिविधियाँ हो रही हैं और कोई अधिकारी ध्यान नहीं दे रहा।

यह प्रश्न लोगों के बीच बड़ा मुद्दा बन गया है कि—
“प्रभारी BEO ऐसा हो तो आखिर दफ्तर में अनुशासन कौन संभालेगा?”

इंटरनेट महीनों से ठप—कामकाज लगभग बंद

इसके अलावा कार्यालय का इंटरनेट भी माहों से बंद है। परिणामतः—

सेवा अभिलेख अपडेट नहीं

प्रमाणीकरण कार्य लंबित

वेतन और अवकाश संबंधी कार्य प्रभावित

शिक्षक रोज़ाना परेशान


कर्मचारी निजी मोबाइल डेटा से काम चलाने को मजबूर हैं, लेकिन इस समस्या पर भी प्रभारी अधिकारी की कोई सक्रियता नजर नहीं आती।

उच्च अधिकारियों से हस्तक्षेप की जोरदार मांग

अब हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि शिक्षक, अभ्यर्थी और कर्मचारी स्पष्ट कह रहे हैं कि—
“प्रभारी BEO ऐसा होते हुए इस दफ्तर में सुधार असंभव है। जब तक उच्च अधिकारी हस्तक्षेप नहीं करेंगे, पेंड्रा BEO ऑफिस ठीक होना मुश्किल है।”

प्रशांत गौतम

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