छत्तीसगढ

शासकीय भूमि पर अवैध कब्जे का आरोप:शहर के नामी डॉक्टर के खिलाफ जांच तो शुरू, लेकिन कार्रवाई अब भी शून्य—प्रशासन की निष्पक्षता पर सवाल


बैैकुण्ठपुर(छत्तीसगढ़ उजाला)-शहर में शासकीय भूमि पर अवैध कब्जे का एक बड़ा मामला सामने आने के बाद भी कार्रवाई न होने से लोगों में नाराज़गी बढ़ती जा रही है। खसरा नंबर 781, रकबा 0.240 हेक्टेयर भूमि, जो राजस्व अभिलेखों में शासकीय दर्ज है, उस पर शहर के एक प्रसिद्ध डॉक्टर द्वारा कथित रूप से अतिक्रमण कर भवन निर्माण कर लेने का आरोप लगा है। शिकायत मिलते ही प्रशासन ने जांच प्रक्रिया शुरू कर दी, मगर अब तक किसी प्रकार की ठोस कार्रवाई न होने से प्रशासन की निष्पक्षता पर सवाल उठने लगे हैं।

राष्ट्रीय राज्यमार्ग से लगी जमीन पर वर्षों से निर्माण

सूत्रों के अनुसार, विवादित भूमि नगर सीमा के बाहर राष्ट्रीय राज्यमार्ग से सटी हुई है। बताया जा रहा है कि इस जमीन पर लंबे समय से निजी निर्माण किया गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इतनी बड़ी सरकारी संपत्ति पर बिना रोक-टोक कब्जा होना प्रशासनिक ढिलाई को दर्शाता है।

गरीबों पर बुलडोजर, रसूखदारों पर “जांच”—लोगों में बढ़ा आक्रोश

स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन पर दोहरे रवैये का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि गरीब और आम लोगों द्वारा थोड़ी-सी भी सरकारी जमीन पर झोपड़ी बना लेने पर भी तुरंत बुलडोजर चल जाता है, लेकिन जब मामला प्रभावशाली या संपन्न व्यक्ति का होता है, तो कार्रवाई “जांच” में ही अटक जाती है।
लोग कह रहे हैं—“कानून सबके लिए समान होना चाहिए। यदि गरीब का आशियाना तोड़ा जा सकता है, तो रसूखदारों के अवैध निर्माण पर भी वैसी ही कार्रवाई की जानी चाहिए।”

पटवारी को सीमांकन का आदेश, रिपोर्ट का इंतज़ार… लेकिन सवाल यह कि रिपोर्ट कब आएगी

राजस्व विभाग ने हल्का पटवारी को मौके पर जाकर सीमांकन करने और वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने के निर्देश दिए हैं। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि यदि जांच में अतिक्रमण साबित होता है, तो नियमों के तहत कार्रवाई की जाएगी।
हालांकि, स्थानीय लोगों का कहना है कि “कार्रवाई की बातें तो हर बार कही जाती हैं, लेकिन जमीनी कार्यवाही अक्सर शून्य रह जाती है।”

सोशल मीडिया पर भी मामला गरमाया

यह मुद्दा अब सोशल मीडिया पर भी तेजी से फैल रहा है। कई नागरिकों ने पोस्ट करते हुए सवाल उठाया है कि क्या इस बार प्रशासन किसी दबाव में आए बिना निष्पक्ष कार्रवाई करेगा, या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।

जनता की नजरें प्रशासन की अगली चाल पर

स्थानीय लोग याद दिला रहे हैं कि पहले भी ऐसे कई मामले सामने आए, जिनमें जांच तो शुरू हुई, लेकिन प्रभावशाली लोगों के दबाव के कारण कार्यवाही आगे नहीं बढ़ पाई।
अब सबकी निगाहें पटवारी की रिपोर्ट और जिला प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। जनता उम्मीद कर रही है कि इस बार शासकीय भूमि की सुरक्षा के लिए प्रशासन ठोस, स्पष्ट और साहसिक कदम उठाएगा।

प्रशांत गौतम

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