आयुष्मान योजना में कटघोरा के हरि कृष्णा केयर अस्पताल पर गंभीर सवाल! पंजीयन निरस्त होने के बाद अब 24 मरीजों के नाम पर भुगतान निकालने का आरोप
एक मरीज की भर्ती दिखाकर 24 मरीजों के नाम पर क्लेम लेने का दावा, मृत मरीजों के नाम पर भुगतान की आशंका भी जांच के घेरे में; सरकारी अस्पताल से निजी अस्पताल में रेफरल को लेकर भी उठे सवाल
कोरबा/कटघोरा(छत्तीसगढ़ उजाला)-गरीब और जरूरतमंद मरीजों को मुफ्त इलाज उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुरू की गई आयुष्मान भारत योजना में कथित अनियमितताओं का मामला एक बार फिर चर्चा में है। मरीजों से अतिरिक्त वसूली, अनावश्यक भर्ती और उपचार के नाम पर गलत क्लेम जैसे मामलों को लेकर स्वास्थ्य विभाग की जांच में कटघोरा स्थित हरि कृष्णा केयर अस्पताल पर भी कार्रवाई हो चुकी है। अस्पताल में अनियमितताएं सामने आने के बाद उसका आयुष्मान योजना के तहत पंजीयन निरस्त कर दिया गया है। लेकिन पंजीयन निरस्त होने के बाद भी अस्पताल की कार्यप्रणाली को लेकर नए और गंभीर आरोप सामने आ रहे हैं।
सबसे चौंकाने वाला आरोप यह है कि अस्पताल में एक मरीज को भर्ती दिखाकर कथित तौर पर 24 मरीजों के नाम पर आयुष्मान योजना से भुगतान प्राप्त किया गया। इसके अलावा ऐसे मरीजों के नाम पर भी क्लेम किए जाने की आशंका जताई जा रही है, जिनकी मृत्यु हो चुकी है। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है, लेकिन यदि जांच में इनकी पुष्टि होती है तो यह सरकारी स्वास्थ्य योजना के साथ गंभीर धोखाधड़ी का मामला बन सकता है।
प्रदेश के 19 अस्पतालों की जांच, 16 में मिली अनियमितताएं
मीडिया में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक, प्रदेश के 19 अस्पतालों की जांच के दौरान 16 अस्पतालों में अलग-अलग तरह की अनियमितताएं सामने आईं। इनमें 11 अस्पतालों में मरीजों से अतिरिक्त राशि वसूलने, 7 अस्पतालों में अनावश्यक भर्ती करने और 5 अस्पतालों में उपचार पैकेज की गलत कोडिंग करने की बात सामने आई। इसके अलावा 6 अस्पतालों में एजेंटों के माध्यम से मरीज लाने तथा दो अस्पतालों में फर्जी दस्तावेज मिलने का उल्लेख किया गया।
इन अनियमितताओं के आधार पर स्वास्थ्य विभाग ने संबंधित 16 अस्पतालों के आयुष्मान पंजीयन निरस्त करने की कार्रवाई की। इसी कार्रवाई की जद में कटघोरा का हरि कृष्णा केयर अस्पताल भी आया। अस्पताल के खिलाफ मरीजों से अतिरिक्त वसूली और अनावश्यक भर्ती से जुड़ी अनियमितताओं का उल्लेख किया गया है।
वहीं DB Star की 22 दिनों तक चली पड़ताल में कथित तौर पर एजेंट बनकर अस्पतालों से संपर्क करने पर मरीज उपलब्ध कराने के बदले इलाज की राशि का 10 से 15 प्रतिशत तक कमीशन देने की पेशकश किए जाने का मामला भी प्रकाशित हुआ था। इस खुलासे के बाद निजी अस्पतालों में मरीजों को पहुंचाने के लिए कथित कमीशन व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े हुए थे।
एक मरीज की भर्ती, 24 मरीजों के नाम पर भुगतान का आरोप
हरि कृष्णा केयर अस्पताल को लेकर सामने आया यह आरोप पूरे मामले को और गंभीर बनाता है। दावा किया जा रहा है कि एक मरीज को भर्ती दिखाकर 24 मरीजों के नाम पर आयुष्मान योजना के तहत भुगतान निकाला गया।
यदि ऐसा हुआ है तो सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिन 24 मरीजों के नाम पर क्लेम प्रस्तुत किए गए, क्या वे सभी वास्तव में अस्पताल में भर्ती हुए थे? क्या उनका उपचार किया गया था? क्या प्रत्येक मरीज का अलग भर्ती रजिस्टर, उपचार विवरण, मेडिकल हिस्ट्री और डिस्चार्ज रिकॉर्ड उपलब्ध है?
इस मामले की सच्चाई सामने लाने के लिए अस्पताल के पुराने आयुष्मान क्लेम, मरीजों के आधारभूत विवरण, भर्ती एवं डिस्चार्ज रजिस्टर और उपचार संबंधी दस्तावेजों का मिलान आवश्यक है। आयुष्मान पोर्टल पर दर्ज क्लेम और अस्पताल के वास्तविक रिकॉर्ड का स्वतंत्र ऑडिट कराया जाए तो कथित अनियमितता की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
मृत मरीजों के नाम पर भी क्लेम की आशंका, रिकॉर्ड जांचने की मांग
मामले में एक और गंभीर आशंका जताई जा रही है कि कुछ ऐसे मरीजों के नाम पर भी आयुष्मान योजना से भुगतान लिया गया हो सकता है, जो अब जीवित नहीं हैं। यदि मृत्यु के बाद किसी मरीज के नाम पर उपचार या भर्ती दर्शाकर क्लेम किया गया है तो यह बेहद गंभीर वित्तीय अनियमितता होगी।
हालांकि इस आरोप की पुष्टि के लिए ठोस दस्तावेज और आधिकारिक जांच जरूरी है। स्वास्थ्य विभाग को अस्पताल की पुरानी क्लेम हिस्ट्री, मरीजों की वास्तविक स्थिति, मृत्यु संबंधी अभिलेख और उपचार की तारीखों का मिलान कराना चाहिए। जांच में यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि संबंधित क्लेम किस तारीख को और किन दस्तावेजों के आधार पर स्वीकृत किए गए।
सरकारी अस्पताल से निजी अस्पताल में मरीज भेजने का आरोप, रेफरल व्यवस्था पर सवाल
कटघोरा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की रेफरल व्यवस्था भी अब सवालों के घेरे में है। आरोप हैं कि सरकारी स्वास्थ्य केंद्र में उपचार के लिए पहुंचने वाले मरीजों को जरूरत के अनुसार कोरबा जिला अस्पताल भेजने के बजाय निजी हरि कृष्णा केयर अस्पताल की ओर रेफर किया जाता रहा है।
अस्पताल के संचालन से जुड़े डॉ. कृष्णा कंवर की पत्नी के कटघोरा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में बीएमओ पद पर पदस्थ होने की जानकारी भी सामने आई है। ऐसे में यह जांच का विषय है कि सरकारी अस्पताल से निजी अस्पताल में मरीजों को रेफर करने की प्रक्रिया किस आधार पर संचालित होती रही।
क्या मरीजों को उनकी चिकित्सकीय स्थिति और उपलब्ध सुविधाओं के आधार पर रेफर किया जाता था या किसी निजी अस्पताल को लाभ पहुंचाने की स्थिति बन रही थी? क्या रेफरल के दौरान मरीजों को सरकारी अस्पताल में उपलब्ध उपचार के विकल्प बताए जाते थे? इन सभी बिंदुओं की निष्पक्ष जांच जरूरी है, ताकि किसी भी संभावित हितों के टकराव की स्थिति स्पष्ट हो सके।
जीवाश अस्पताल पर भी मनमानी वसूली के आरोप
कटघोरा के जीवाश अस्पताल की कार्यप्रणाली को लेकर भी मरीजों से कथित मनमानी वसूली और आर्थिक शोषण के आरोप सामने आ रहे हैं। गरीब और जरूरतमंद परिवार बेहतर उपचार की उम्मीद लेकर अस्पताल पहुंचते हैं, लेकिन यदि उनकी आर्थिक मजबूरी का फायदा उठाकर अनुचित राशि वसूली जा रही है तो यह गंभीर चिंता का विषय है।
स्वास्थ्य विभाग को जीवाश अस्पताल में मरीजों से लिए गए शुल्क, उपचार की वास्तविक लागत, आयुष्मान योजना के तहत किए गए क्लेम और मरीजों की शिकायतों की जांच करनी चाहिए। केवल शिकायतों के आधार पर निष्कर्ष निकालने के बजाय दस्तावेजों और मरीजों के बयानों के आधार पर स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए।
निजी वाहनों को एम्बुलेंस बनाकर संचालन का आरोप, कमीशन नेटवर्क की भी जांच हो
कटघोरा क्षेत्र में निजी पंजीयन नंबर वाले वाहनों को एम्बुलेंस के रूप में संचालित किए जाने के आरोप भी उठ रहे हैं। सवाल यह है कि क्या इन वाहनों के पास एम्बुलेंस संचालन के लिए आवश्यक अनुमति, फिटनेस और निर्धारित चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध हैं?
क्या इन वाहनों का उपयोग मरीजों को चुनिंदा निजी अस्पतालों तक पहुंचाने के लिए किया जा रहा है? क्या मरीजों को अस्पताल पहुंचाने के बदले किसी तरह के कमीशन का लेन-देन होता है? इन आशंकाओं की जांच के लिए स्वास्थ्य विभाग और परिवहन विभाग की संयुक्त कार्रवाई जरूरी है। वाहनों के दस्तावेज, संचालन की अनुमति और अस्पतालों से उनके संभावित संबंधों की भी पड़ताल होनी चाहिए।
सिर्फ पंजीयन निरस्त करना पर्याप्त नहीं, पूरे नेटवर्क की जांच जरूरी
हरि कृष्णा केयर अस्पताल का आयुष्मान पंजीयन निरस्त होना स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई का एक हिस्सा है, लेकिन अब सवाल यह है कि क्या जांच केवल अतिरिक्त वसूली और अनावश्यक भर्ती तक सीमित रहेगी या अस्पताल के पुराने क्लेम और रेफरल व्यवस्था की भी गहराई से पड़ताल होगी?
– हरि कृष्णा केयर अस्पताल के सभी पुराने आयुष्मान क्लेम का स्वतंत्र ऑडिट कराया जाए।
– एक मरीज के नाम पर 24 मरीजों के भुगतान संबंधी आरोपों की दस्तावेजों के आधार पर जांच हो।
– मृत मरीजों के नाम पर भुगतान की आशंका की पुष्टि के लिए क्लेम और मृत्यु रिकॉर्ड का मिलान किया जाए।
– अस्पताल के भर्ती रजिस्टर, डिस्चार्ज रिकॉर्ड और उपचार संबंधी दस्तावेजों की जांच हो।
– कटघोरा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से निजी अस्पताल में किए गए रेफरल की पूरी सूची की समीक्षा की जाए।
– जीवाश अस्पताल के खिलाफ सामने आ रहे वसूली संबंधी आरोपों की जांच हो।
– निजी वाहनों के एम्बुलेंस के रूप में संचालन और संभावित कमीशन व्यवस्था की पड़ताल की जाए।
आयुष्मान भारत योजना का उद्देश्य गरीब मरीजों को आर्थिक बोझ से बचाकर बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना है। ऐसे में यदि इसी योजना के नाम पर मरीजों का आर्थिक शोषण, फर्जी क्लेम या अनावश्यक भर्ती जैसी गतिविधियां होती हैं तो इसकी जवाबदेही तय होना जरूरी है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि स्वास्थ्य विभाग केवल अस्पतालों का आयुष्मान पंजीयन निरस्त कर कार्रवाई की औपचारिकता पूरी करेगा या फिर कथित फर्जीवाड़े की जड़ तक पहुंचकर पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश करेगा? गरीबों के इलाज के लिए बनी योजना में यदि अनियमितताओं के जरिए सरकारी धन का दुरुपयोग हुआ है, तो दोषियों पर सख्त कार्रवाई कब होगी?




