छत्तीसगढ

सियासत…..मध्यप्रदेश सरकार का करोड़ो का जेट विमान….. छत्तीसगढ़ में मंत्रियों की हवाई यात्रा….

छत्तीसगढ़ उजाला भोपाल/रायपुर•

              •सियासत•

सड़कें बन रहीं चौड़ी, मंत्रियों की उड़ानें भी ऊंची नजर आ रही है।सरकार का एक बड़ा बजट मंत्रियों की हवाई यात्रा में खर्च हो रहा है।छोटे से राज्य जहां सीमित संख्या में में मंत्री है सभी को हवाई यात्रा करने का ऐसा चस्का लगा है कि आज कल हर मंत्री अपने राज्य में एक जिले से दूसरे जिले में जाने के लिए हेलीकॉप्टर का उपभोग करते नजर आ रहे है।इसके साथ ही मध्यप्रदेश की मोहन सरकार ने करीब 350 करोड़ रुपये के नए जेट विमान को खरीदा है।इसकी चर्चा जोरो पर है।सरकार का कहना है कि नए विमान की बहुत ज्यादा आवश्यकता थी। सरकार का कहना है कि वीवीआईपी लोगो की यात्रा के लिए यह विमान खरीदा गया है।छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश की भाजपा-नीत सरकारों में मंत्रियों की हवाई यात्राओं को लेकर चर्चाएं तेज हैं। कहा जा रहा है कि कुछ मंत्रियों के लिए सड़क का रास्ता लंबा और हेलीकॉप्टर का सफर ज्यादा सुविधाजनक हो गया है। कार से यात्रा करने के बजाय आसमान का रास्ता चुनने के इस चलन ने सरकारी खर्च को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं।

मध्यप्रदेश में इन चर्चाओं को उस समय और हवा मिली, जब सरकार का नया बॉम्बार्डियर चैलेंजर 3500 जेट भोपाल पहुंचा। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, विमान की मूल कीमत करीब 268 करोड़ रुपये थी, जबकि टैक्स, बीमा और इंटीरियर सहित इसकी कुल लागत लगभग 350 करोड़ रुपये बताई गई है।एक ओर केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी देशभर में चौड़ी और बेहतर सड़कें बनाने की मुहिम में जुटे हैं, वहीं दूसरी ओर कुछ मंत्री उन्हीं सड़कों पर चलने के बजाय आसमान से मंजिल तक पहुंचते दिखाई देते हैं। सड़कें बनती रहें, यातायात सुधरता रहे—मंत्रीजी का कार्यक्रम हो तो हेलीकॉप्टर या जेट तैयार रहे! मानो सड़कें जनता के लिए और उड़ानें सत्ता के लिए हों।

हवाई यात्राओं पर सरकारी खर्च और निजी विमानन कंपनियों को किए जाने वाले भुगतान को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। जनता जानना चाहती है कि किन परिस्थितियों में हेलीकॉप्टर या चार्टर विमान की जरूरत पड़ती है और किन मामलों में सड़क मार्ग अपनाया जा सकता है। सुविधा और समय की बचत के तर्क अपनी जगह हैं, लेकिन खर्च का हिसाब और हर यात्रा की जरूरत भी सार्वजनिक होनी चाहिए।जब सड़कें बेहतर बनाने पर जोर दिया जा रहा है, तो क्या मंत्री भी कभी उन्हीं सड़कों पर चलकर उनकी हालत देखेंगे? या जनता गड्ढों से बचने के लिए रास्ता तलाशती रहेगी और हुक्मरान आसमान से अपना रास्ता बनाते रहेंगे?हवाई यात्रा का नशा कुछ ज्यादा होना कहा तक सही है इस पर सत्ता में बैठे महानुभाव लोगों को मनन करने की आवश्यकता है।

मंत्री जी की उड़ान
सड़क बनी है चौड़ी-चौड़ी, जनता उसमें जाए,
मंत्री जी का हेलीकॉप्टर आसमान में छाए।
कहते हैं—समय बचाना है, काम बहुत हैं खास,
जनता पूछे—खर्च का कौन करेगा हिसाब?
जेट नया है, शान नई है, भीतर सुख-सुविधा भारी,
बाहर सड़कें पूछ रही हैं—क्या हम हैं बेचारी?
जनता की गाढ़ी कमाई से जब उड़ता है विमान,
धरती पर भी उतरकर देखो—कैसा है जनमानस का हाल!

Anil Mishra

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