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जीपीएम में गांजे के कारोबार पर सवाल: कहीं कार्रवाई, तो कहीं खुलेआम बिक्री के आरोप; आखिर किसके संरक्षण में चल रहा अवैध धंधा?

पुलिस की कार्रवाई के बावजूद नशे के कारोबार पर लगाम लगाने की चुनौती, पुलिस-प्रशासन की भूमिका पर उठ रहे सवाल

जीपीएम (छत्तीसगढ़ उजाला)। गौरेला-पेंड्रा-मरवाही (जीपीएम) जिले में गांजे के अवैध कारोबार को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। जिले में कहीं गांजे के खिलाफ कार्रवाई की खबरें सामने आती हैं, तो कहीं खुलेआम बिक्री होने की शिकायतें चर्चा में रहती हैं। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर जिले में नशे के अवैध कारोबार पर पूरी तरह अंकुश क्यों नहीं लग पा रहा है? क्या कार्रवाई केवल कुछ मामलों तक सीमित है, या फिर उन स्थानों तक भी पुलिस की निगरानी पहुंच रही है, जहां कथित तौर पर लंबे समय से गांजे की बिक्री की शिकायतें हैं?

नशे का अवैध कारोबार केवल कानून-व्यवस्था का मामला नहीं है, बल्कि यह युवाओं और समाज के भविष्य से भी जुड़ा गंभीर विषय है। यदि किसी क्षेत्र में खुलेआम गांजा बिकने की शिकायतें मिल रही हैं, तो संबंधित पुलिस अधिकारियों की जिम्मेदारी बनती है कि वे शिकायतों की निष्पक्ष जांच कर ठोस कार्रवाई करें। वहीं, जिन स्थानों पर कार्रवाई की जा रही है, वहां यह भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि अवैध कारोबार दोबारा शुरू न हो।

कार्रवाई कहीं, सवाल कहीं और!

जिले में गांजे के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई सामने आने के बावजूद यदि अलग-अलग क्षेत्रों में बिक्री की शिकायतें बनी रहती हैं, तो यह पुलिस की निगरानी और कार्रवाई की निरंतरता पर सवाल खड़े करता है। आखिर अवैध कारोबार करने वालों तक गांजा पहुंच कैसे रहा है? इसकी आपूर्ति कहां से हो रही है? क्या स्थानीय स्तर पर इसकी बिक्री करने वालों की पहचान नहीं हो पा रही है, या फिर कार्रवाई के बाद भी यह धंधा दोबारा शुरू हो जाता है?

इन सवालों का जवाब जांच और तथ्यों के आधार पर सामने आना जरूरी है। साथ ही, यदि किसी क्षेत्र में पुलिस या प्रशासन के संरक्षण में अवैध कारोबार चलने की शिकायत मिलती है, तो उसकी भी स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। हालांकि, बिना प्रमाण किसी अधिकारी या कर्मचारी की मिलीभगत का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।

पुलिस-प्रशासन की जवाबदेही तय हो

जीपीएम जिले में नशे के अवैध कारोबार पर प्रभावी नियंत्रण के लिए केवल छिटपुट कार्रवाई पर्याप्त नहीं होगी। जिन क्षेत्रों से गांजे की बिक्री की शिकायतें मिल रही हैं, वहां नियमित निगरानी, संदिग्ध आपूर्ति शृंखला की जांच और दोषियों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई जरूरी है। साथ ही, यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि पूर्व में की गई कार्रवाइयों के बाद संबंधित क्षेत्रों में स्थिति में कितना सुधार हुआ है।

अब सवाल यह है कि जीपीएम पुलिस गांजे के अवैध कारोबार पर पूरी तरह अंकुश लगाने के लिए क्या ठोस कदम उठाएगी? क्या खुलेआम बिक्री की शिकायतों वाले क्षेत्रों की जांच होगी? क्या अवैध कारोबार के स्रोत तक पहुंचकर कार्रवाई की जाएगी? और यदि जांच में किसी जिम्मेदार व्यक्ति की मिलीभगत सामने आती है, तो क्या उसके खिलाफ भी कार्रवाई होगी?

नशामुक्त समाज की दिशा में प्रभावी कदम उठाने के लिए जरूरी है कि पुलिस-प्रशासन शिकायतों को गंभीरता से ले और कार्रवाई में किसी तरह का भेदभाव न हो। जिले के नागरिकों को भी यह जानने का अधिकार है कि नशे के इस अवैध कारोबार पर रोक लगाने के लिए जिम्मेदार विभाग क्या कर रहे हैं।

प्रशांत गौतम

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