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सिंधी समाज धर्म आधारित शासन की स्थापना के अभियान में निभाए सक्रिय भूमिका : साईं जलकुमार मसंद

लखनऊ में आयोजित सत्संग एवं सिंधी समाज के विभिन्न संगठनों की संयुक्त बैठक में किया आह्वान, सनातन वैदिक संस्कृति के संरक्षण और लोककल्याण में समाज के योगदान को किया रेखांकित

रायपुर। (छत्तीसगढ़ उजाला) देश में धर्म आधारित शासन व्यवस्था की स्थापना के लिए चल रहे अभियान में सिंधी समाज को सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। यह आह्वान रायपुर स्थित मसंद सेवाश्रम के पीठाधीश साईं जलकुमार मसंद साहिब ने लखनऊ में आयोजित एक सत्संग एवं सिंधी समाज के विभिन्न संगठनों के प्रमुख पदाधिकारियों की संयुक्त बैठक को संबोधित करते हुए किया।

साईं जलकुमार मसंद साहिब ने कहा कि भारतीय परंपरा में शासन व्यवस्था का आधार सनातन वैदिक सिद्धांत और धर्म रहा है। उनके अनुसार, भारत की सांस्कृतिक परंपरा में राजा और प्रजा के आचरण को समाज की व्यवस्था तथा लोककल्याण से जोड़कर देखा गया है। उन्होंने कहा कि भारत ने प्राचीन काल से ही विश्वकल्याण और विश्वगुरु की भूमिका निभाने का आदर्श प्रस्तुत किया है।

उन्होंने कहा कि जब समाज और शासन व्यवस्था धर्म के मूल सिद्धांतों से दूर होते हैं, तब अव्यवस्था और सामाजिक विसंगतियां बढ़ती हैं। उनके मुताबिक, वर्तमान परिस्थितियों में इन समस्याओं के समाधान और धर्म आधारित व्यवस्था की स्थापना के उद्देश्य से देश के पूज्य शंकराचार्यों तथा अनेक संतों के मार्गदर्शन में अभियान चलाया जा रहा है।

शंकराचार्यों के मार्गदर्शन में चल रहा अभियान

साईं मसंद साहिब ने बताया कि इस अभियान से भारत सहित विभिन्न देशों में रहने वाले हिंदू कार्यकर्ता जुड़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि सिंधी समाज की पहचान सनातन परंपराओं, धार्मिक आस्था और सामाजिक सेवा से जुड़ी रही है। ऐसे में समाज को भी इस अभियान में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करनी चाहिए।

उन्होंने बताया कि वे चारों शंकराचार्यों की अध्यक्षता में गठित अंतरराष्ट्रीय हिंदू संगठन ‘परम धर्म संसद 1008’ में संगठन मंत्री का दायित्व निभा रहे हैं। उनके अनुसार, इस अभियान की शुरुआत सितंबर 2012 में उनकी पहल पर हुई थी। इसका उद्देश्य देश में धर्म आधारित शासन व्यवस्था की स्थापना के लिए जनजागरण करना है।

धर्म, देश और लोककल्याण में सिंधी समाज का योगदान

बैठक को संबोधित करते हुए साईं जलकुमार मसंद साहिब ने सिंधी समाज के ऐतिहासिक योगदान का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि समाज ने हजारों वर्षों से धर्म, देश और लोककल्याण के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

उन्होंने सिंधु घाटी सभ्यता और प्राचीन व्यापारिक परंपराओं का उल्लेख करते हुए कहा कि प्राचीन काल में सिंधी व्यापारी जलमार्गों के माध्यम से विश्व के विभिन्न देशों तक पहुंचते थे। उनके अनुसार, इन व्यापारियों के साथ भारतीय जीवनशैली, धार्मिक मान्यताओं और सांस्कृतिक परंपराओं का भी प्रसार हुआ, जिससे भारत की सांस्कृतिक पहचान को व्यापक स्तर पर पहुंचाने में योगदान मिला।

साईं मसंद साहिब ने प्राचीन सिंधु घाटी सभ्यता की पाषाण लिपि तथा उसमें वैदिक परंपराओं से संबंधित कथित उल्लेखों का भी जिक्र किया। उन्होंने इसे भारतीय सभ्यता की प्राचीनता और सांस्कृतिक विरासत से जोड़कर देखा।

समाज से एकजुट होकर आगे आने की अपील

साईं जलकुमार मसंद साहिब ने सिंधी समाज के विभिन्न संगठनों के पदाधिकारियों से आह्वान किया कि वे सनातन वैदिक संस्कृति के संरक्षण, धार्मिक मूल्यों के प्रचार-प्रसार और लोककल्याण के कार्यों में अपनी भूमिका को और प्रभावी बनाएं। उन्होंने कहा कि समाज की एकजुटता और सक्रिय भागीदारी से इस दिशा में चलाए जा रहे जनजागरण अभियान को गति मिल सकती है।

उल्लेखनीय है कि लखनऊ के शिव शांति संत आसूदाराम आश्रम में आयोजित इस कार्यक्रम में भारत सहित अन्य देशों में गठित सिंधी समाज के विभिन्न संगठनों के प्रमुख पदाधिकारी शामिल हुए। कार्यक्रम में धार्मिक परंपराओं, सामाजिक दायित्वों और समाज की भावी भूमिका पर विचार-विमर्श किया गया।

प्रशांत गौतम

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