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नक्सल मोर्चे से साइबर स्पेस तक बदली पुलिसिंग, सुरक्षित छत्तीसगढ़ से निवेश और रोजगार को मिलेगी रफ्तार-जी.पी. सिंह

रायपुर(छत्तीसगढ़ उजाला)-छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई अब केवल जंगलों में सुरक्षा बलों के अभियानों तक सीमित नहीं रह गई है। सड़क, मोबाइल नेटवर्क, सरकारी सेवाओं की पहुंच, स्थानीय समुदाय का भरोसा, तकनीक और आर्थिक गतिविधियां भी राज्य की बदलती सुरक्षा रणनीति का अहम हिस्सा बन रही हैं। अब इसी सुरक्षा मॉडल को निवेश, उद्योग और रोजगार के विस्तार से जोड़ने पर भी जोर दिया जा रहा है।

विकसित छत्तीसगढ़ सम्मेलन 2026 में “सुरक्षित छत्तीसगढ़ का निर्माण, नवाचार, तकनीक और नक्सल-मुक्त भविष्य के लिए पुलिसिंग” विषय पर आयोजित संवाद में डीजी प्रशिक्षण एवं राज्य पुलिस अकादमी के निदेशक जी.पी. सिंह ने सुरक्षा और आर्थिक विकास के बीच संबंध को विस्तार से सामने रखा। उन्होंने कहा कि निवेशक केवल जमीन, बिजली और संसाधन नहीं देखता, बल्कि यह भी देखता है कि कर्मचारी, बुनियादी ढांचा, आपूर्ति श्रृंखला और कारोबार कितने सुरक्षित एवं व्यवस्थित तरीके से संचालित हो सकते हैं।

नक्सलवाद के खिलाफ रणनीति में बदलाव, सुरक्षा के साथ विकास पर जोर

जी.पी. सिंह के मुताबिक नक्सलवाद को अब केवल सशस्त्र चुनौती के तौर पर देखने के बजाय सुरक्षा, शासन, विकास और स्थानीय समुदाय को साथ लेकर रणनीति बनाई जा रही है। उन्होंने इसे “साफ करो, थामो और निर्माण करो” की रणनीति के रूप में समझाया।

इसमें खुफिया सूचना के आधार पर अभियान चलाने, सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने, नक्सलियों के आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास के साथ-साथ नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सरकारी योजनाओं और मूलभूत सुविधाओं की पहुंच बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। उद्देश्य केवल किसी क्षेत्र को सुरक्षा घेरे में लाना नहीं, बल्कि वहां सामान्य प्रशासन और विकास की स्थायी मौजूदगी सुनिश्चित करना भी है।

जहां कभी पहुंच थी चुनौती, वहां सड़क और मोबाइल नेटवर्क का विस्तार

नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सड़क और दूरसंचार नेटवर्क का विस्तार अब सुरक्षा व्यवस्था का भी महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। जी.पी. सिंह के अनुसार ऐसे क्षेत्रों में 4,000 किलोमीटर से अधिक सड़कें और 1,333 दूरसंचार टावर शुरू किए गए हैं।

सड़क बनने से केवल सुरक्षा बलों की आवाजाही आसान नहीं हुई, बल्कि डॉक्टर, शिक्षक और अन्य सरकारी कर्मचारियों की पहुंच भी उन इलाकों तक बढ़ी है, जहां पहले पहुंचना चुनौतीपूर्ण था। वहीं मोबाइल नेटवर्क के विस्तार से डिजिटल सेवाओं और शासन की पहुंच ग्रामीण क्षेत्रों तक बढ़ाने में मदद मिली है।

‘नियद नेल्लानार’ के जरिए कैंप से गांव तक पहुंचाने की कोशिश

सुरक्षा और विकास के इसी मॉडल में ‘नियद नेल्लानार’ पहल को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसके तहत सुरक्षा कैंपों के आसपास बसे गांवों में सड़क, बिजली, पानी, शिक्षा, स्वास्थ्य और आजीविका जैसी सुविधाओं को पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।

स्थानीय युवाओं की सुरक्षा बलों में भर्ती और ग्रामीणों के साथ लगातार संवाद को भी सुरक्षा व्यवस्था और समुदाय के बीच भरोसा मजबूत करने के माध्यम के रूप में देखा जा रहा है। इसका उद्देश्य सुरक्षा बलों और स्थानीय आबादी के बीच दूरी कम करते हुए विकास की गतिविधियों को गति देना है।

अब जंगल के साथ मोबाइल स्क्रीन पर भी नई चुनौती

पुलिसिंग में तकनीक का इस्तेमाल भी तेजी से बढ़ रहा है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), ड्रोन, डेटा एनालिटिक्स और डिजिटल साक्ष्य जैसे तकनीकी माध्यमों को पुलिस की क्षमता बढ़ाने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है।

जी.पी. सिंह ने स्पष्ट किया कि तकनीक मानवीय निर्णय का विकल्प नहीं है, बल्कि पुलिस की कार्यक्षमता बढ़ाने का माध्यम है। इसके लिए तकनीकी संसाधनों के साथ पुलिसकर्मियों का प्रशिक्षण और संस्थागत क्षमता मजबूत करना भी जरूरी है।

डिजिटल अर्थव्यवस्था के विस्तार के साथ साइबर ठगी, डिजिटल गिरफ्तारी के नाम पर धोखाधड़ी, यूपीआई फ्रॉड, फिशिंग और डेटा से जुड़े अपराध भी नई चुनौतियों के रूप में सामने आ रहे हैं। इसी दिशा में 15 अगस्त से 2 अक्टूबर 2026 तक ‘साइबर जागृति अभियान’ चलाया जा रहा है। इसके तहत नागरिकों को साइबर अपराधों के प्रति जागरूक करने के साथ पुलिसकर्मियों की तकनीकी क्षमता बढ़ाने और संभाग स्तर पर साइबर थानों की व्यवस्था को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है।

निवेश बढ़ेगा तो पुलिस की जिम्मेदारी का दायरा भी बढ़ेगा

जी.पी. सिंह के मुताबिक उद्योगों के लिए सुरक्षा का अर्थ केवल संयंत्र और मशीनरी की सुरक्षा करना नहीं है। कर्मचारियों की सुरक्षा, माल की निर्बाध आवाजाही, स्थानीय विवादों का समय पर समाधान और किसी भी तरह के तनाव से कारोबार को प्रभावित होने से रोकना भी सुरक्षा व्यवस्था का हिस्सा है।

इसी वजह से पुलिसिंग को केवल घटना होने के बाद प्रतिक्रिया देने वाली व्यवस्था के बजाय संभावित विवाद और टकराव की स्थिति को पहले पहचानकर उसे रोकने वाली व्यवस्था के रूप में विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है।

उन्होंने ‘व्यवसाय करना आसान’ के साथ ‘व्यवसाय चलाना आसान’ होने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। औद्योगिक गतिविधियों के लिए सुरक्षित और स्थिर वातावरण तैयार करना निवेश के साथ रोजगार और स्थानीय आर्थिक गतिविधियों के विस्तार के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

औद्योगिक सुरक्षा के लिए अलग बल की दिशा में तैयारी

राज्य में बढ़ती औद्योगिक गतिविधियों को देखते हुए राज्य औद्योगिक सुरक्षा बल तैयार करने की दिशा में भी काम चल रहा है। औद्योगिक परिसरों की सुरक्षा के साथ बुनियादी ढांचे, माल परिवहन और कारोबार की निरंतरता से जुड़े जोखिमों को भी सुरक्षा के व्यापक दायरे में शामिल किया जा रहा है।

इससे पुलिसिंग का दायरा पारंपरिक कानून-व्यवस्था से आगे बढ़कर औद्योगिक और आर्थिक गतिविधियों की सुरक्षा तक विस्तारित होने की दिशा दिखाई दे रही है।

सुरक्षा से रोजगार और अवसर तक जुड़ती पूरी कड़ी

जी.पी. सिंह ने सुरक्षा और विकास के संबंध को एक क्रम के जरिए समझाया—

सुरक्षा → कनेक्टिविटी → पहुंच → शासन → निवेश → रोजगार → अवसर।

सड़क और मोबाइल नेटवर्क से पहुंच बढ़ती है। पहुंच बढ़ने से सरकारी सेवाओं की प्रभावी मौजूदगी मजबूत होती है। बेहतर शासन और सुरक्षित वातावरण से निवेश की संभावनाएं बढ़ती हैं और निवेश के साथ रोजगार तथा स्थानीय स्तर पर आर्थिक अवसरों का विस्तार हो सकता है।

इस बदलाव का सीधा संबंध युवाओं से भी जोड़ा जा रहा है। शिक्षा, कौशल विकास, उद्यमिता और रोजगार के नए अवसर उन क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा दे सकते हैं, जो लंबे समय तक नक्सलवाद से प्रभावित रहे हैं।

नक्सल मोर्चे से साइबर स्पेस और औद्योगिक गलियारों तक पुलिसिंग

छत्तीसगढ़ में बदलती पुलिसिंग का दायरा अब केवल नक्सल प्रभावित जंगलों तक सीमित नहीं रह गया है। एक तरफ सुरक्षा बल नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में अभियान और विकास की गतिविधियों को आगे बढ़ा रहे हैं, तो दूसरी ओर पुलिसिंग साइबर स्पेस, डिजिटल अपराध और औद्योगिक सुरक्षा जैसी नई चुनौतियों पर भी केंद्रित हो रही है।

जी.पी. सिंह के अनुसार नए छत्तीसगढ़ की सुरक्षा व्यवस्था का लक्ष्य ऐसा वातावरण तैयार करना है, जहां नागरिक सुरक्षित महसूस करें, उद्योग लगातार और व्यवस्थित तरीके से काम कर सकें तथा निवेश के साथ रोजगार और अवसरों का विस्तार हो। इस दृष्टि से सुरक्षा को अब केवल कानून-व्यवस्था का विषय नहीं, बल्कि विकास, निवेश और भविष्य की आर्थिक संभावनाओं की आधारभूत जरूरत के रूप में भी देखा जा रहा है।

प्रशांत गौतम

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