राज्य कर विभाग की सीमित भर्ती पर बड़ा सवाल: 42 नियुक्तियां रद्द, उत्तर पुस्तिकाओं में भी मिली गंभीर विसंगतियां
रायपुर(छत्तीसगढ़ उजाला)-छत्तीसगढ़ में पिछली कांग्रेस सरकार के कार्यकाल के दौरान राज्य कर विभाग में हुई एक सीमित विभागीय भर्ती प्रक्रिया अब गंभीर सवालों के घेरे में है। विभागीय कर्मचारियों को राज्य कर निरीक्षक (State Tax Inspector/Commercial Tax Inspector) के पद पर पदोन्नत करने के लिए आयोजित भर्ती प्रक्रिया को लेकर जांच में कई अनियमितताएं सामने आने के बाद 42 नियुक्तियों को रद्द करने का फैसला लिया गया है।
यह मामला वर्ष 2021-22 की सीमित विभागीय प्रतियोगी परीक्षा से जुड़ा है। उपलब्ध न्यायिक रिकॉर्ड के मुताबिक, वर्ष 2022 में विभागीय अभ्यर्थियों से राज्य कर निरीक्षक के पद के लिए आवेदन मंगाए गए थे और 26 जून 2022 को लिखित परीक्षा आयोजित हुई थी। इस भर्ती में विभाग के लिपिकीय संवर्ग के कर्मचारियों को राज्य कर निरीक्षक के पद पर चयनित किया जाना था।
रोस्टर से लेकर मेरिट सूची तक उठे सवाल
जांच में भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता और नियमों के पालन को लेकर कई गंभीर बिंदु सामने आने की बात कही गई है। रिपोर्ट के अनुसार, आरक्षण रोस्टर का पालन नहीं किया गया और चयनित अभ्यर्थियों की समेकित अंक सूची भी तैयार नहीं की गई।
मामले में यह भी सवाल उठा कि चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद सीधे चयन सूची जारी कर दी गई, जबकि अभ्यर्थियों के बीच मेरिट की स्थिति स्पष्ट करने वाली सूची और प्रतीक्षा सूची को लेकर भी आपत्तियां सामने आईं। न्यायिक रिकॉर्ड में भी चयन सूची जारी होने तथा मेरिट सूची प्रकाशित नहीं किए जाने का उल्लेख है।
17 अभ्यर्थियों की उत्तर पुस्तिकाएं एक जैसी होने का दावा
जांच के दौरान उत्तर पुस्तिकाओं की जांच में भी कथित अनियमितता सामने आने की बात कही गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, 17 चयनित अभ्यर्थियों की उत्तर पुस्तिकाएं हूबहू एक जैसी पाई गईं।
इसके अलावा कुछ ऐसे अभ्यर्थियों के अंक भी पुनर्मूल्यांकन के बाद बढ़ाए जाने की बात सामने आई है, जो प्रारंभिक चयन सूची में शामिल नहीं थे। इन दावों ने पूरी चयन प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
हालांकि, इन बिंदुओं को लेकर अंतिम निष्कर्ष संबंधित जांच एवं आधिकारिक दस्तावेजों के आधार पर ही माना जाना चाहिए।
भर्ती प्रक्रिया में नियम बदलने को लेकर भी हुआ विवाद
राज्य कर निरीक्षक भर्ती का मामला पहले से ही न्यायिक विवाद में रहा है। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में दायर मामले के रिकॉर्ड के अनुसार, 28 अप्रैल 2022 को विभागीय अभ्यर्थियों के लिए विज्ञापन जारी किया गया था और 26 जून को परीक्षा हुई। इसी दौरान 19 मई 2022 को छत्तीसगढ़ वाणिज्यिक कर वर्ग-III कार्यपालिक भर्ती एवं सेवा शर्त नियम, 2022 लागू हुए।
याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि भर्ती प्रक्रिया शुरू होने के बाद नियमों में बदलाव किया गया और अंतिम चयन में नए नियमों के तहत गोपनीय प्रतिवेदन (ACR) के अंकों का इस्तेमाल किया गया। वहीं राज्य सरकार की ओर से अदालत में कहा गया कि चयन सूची तैयार होने से पहले नए नियम लागू हो चुके थे और पुराने नियमों को नए नियमों ने निरस्त कर दिया था।
हाईकोर्ट के डिवीजन बेंच ने 2026 में इस तर्क को स्वीकार नहीं किया कि भर्ती के बीच मूल चयन प्रक्रिया के नियम बदल दिए गए थे। अदालत ने कहा कि पात्रता, भर्ती का स्रोत और चयन की मूल पद्धति में बदलाव नहीं हुआ था तथा ACR के अंकों के वर्गीकरण में बदलाव को मूल चयन मानदंड बदलना नहीं माना जा सकता।
समीर विश्नोई के कार्यकाल में हुई थी प्रक्रिया
इस भर्ती प्रक्रिया का समय राज्य कर विभाग में समीर विश्नोई के आयुक्त रहने के दौर से जुड़ा रहा है। विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध दस्तावेज में 2021 में राज्य कर आयुक्त के रूप में समीर विश्नोई के हस्ताक्षर दर्ज हैं।
हालांकि, किसी अधिकारी के कार्यकाल में कोई प्रक्रिया होना अपने आप में उस अधिकारी की व्यक्तिगत संलिप्तता सिद्ध नहीं करता। भर्ती में कथित अनियमितताओं और संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी का निर्धारण जांच तथा आधिकारिक कार्रवाई के आधार पर ही किया जाना चाहिए।
42 नियुक्तियां रद्द होने से विभाग में हलचल
अब जांच में सामने आई कथित विसंगतियों के आधार पर 42 संदिग्ध नियुक्तियों को रद्द करने का निर्णय इस पूरे मामले को फिर चर्चा में ले आया है। खास बात यह है कि मामला बाहरी अभ्यर्थियों की सामान्य भर्ती का नहीं, बल्कि विभाग के भीतर कार्यरत कर्मचारियों को राज्य कर निरीक्षक के पद पर चयनित करने के लिए आयोजित सीमित विभागीय परीक्षा का था।
भर्ती में रोस्टर, मेरिट सूची, उत्तर पुस्तिकाओं की समानता और पुनर्मूल्यांकन के जरिए अंकों में बदलाव जैसे आरोपों ने चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्न खड़े किए हैं। अब निगाह इस बात पर रहेगी कि विभागीय जांच में किस स्तर पर जिम्मेदारी तय होती है और कथित अनियमितताओं के लिए आगे क्या कार्रवाई की जाती है।




