09 Nov 2019

अयोध्या मामला: अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने इस तरह कवर किया सुप्रीम कोर्ट का फैसला

By EditorTaaza Khabar

दिल्ली |

वर्षों पुराने अयोध्या-बाबरी मस्जिद विवाद पर देश की सर्वोच्च अदालत के फैसले से जुड़ी खबरें दुनियाभर के मीडिया में प्रमुखता से ऑनलाइन संस्करणों में प्रकाशित हुई हैं। अधिकांश अखबारों ने फैसले की तारीफ की है। जबकि पाकिस्तान में इसे लेकर बहुत सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं देखी गई। हालांकि अल-जजीरा ने फैसले से जुड़ी खबर के लिए पूरे होमपेज को भगवा रंग दिया है।



मंदिर के लिए रास्ता निकला : न्यूयॉर्क टाइम्स
भारतीय सर्वोच्च न्यायालय ने देश की सबसे पुरानी धार्मिक साइट पर चल रहे कानूनी विवाद में हिंदू मंदिर के निर्माण के लिए एक रास्ता निकाल लिया है। सबसे अच्छा यह हुआ है कि बहुसंख्यक बहुमत वाली सरकार के बजाय अदालत ने इस मसले पर अपना तटस्थ रुख सामने रखा।

अदालत ने मुस्लिम समुदाय को भी वैकल्पिक जमीन मुहैया कराने के आदेश दिए हैं। इसका अर्थ यह हुआ कि दोनों ही पक्षों की दलीलों को सुनने और एएसआई द्वारा रखे गए तथ्यों के आधार पर यह फैसला हुआ है। इस फैसले को लेकर मुस्लिमों को डर था कि वे देश में द्वितीय श्रेणी के नागरिक बन जाएंगे लेकिन फैसला तटस्थ रहा।
मोदी की जीत के रूप में देखा जाएगा फैसला : वाशिंगटन पोस्ट
एक दिन पहले ही अपने ओप-एड में राणा अय्यूब की अयोध्या मामले पर आपत्तिजनक टिप्पणी के बाद अखबार ने सुप्रीम फैसले की रिपोर्ट जस की तस अपनी वेबसाइट पर दी है। अखबार ने लिखा, अदालत ने फैसला दिया है कि ध्वस्त मस्जिद स्थल पर हिंदू मंदिर बन सकता है।

वर्षों की कानूनी लड़ाई के बाद यह एक ऐतिहासिक फैसला है जिसे हिंदू और मुसलमान दोनों ही समुदायों ने स्वीकार करने की बात कही थी। यह फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक बड़ी जीत के रूप में भी देखा जाएगा क्योंकि हाल ही में मई माह में उन्हें जो जनादेश मिला है उसमें यह भी एक मुद्दा शामिल था।
हिंदुओं को सौंपा गया विवादित स्थल : अल-जजीरा
अयोध्या में विवादित मंदिर स्थल को भारत की शीर्ष अदालत ने हिंदुओं को सौंप दिया है। अदालत ने मंदिर बनाने के लिए एक ट्रस्ट बनाने और मुस्लिमों को वैकल्पिक जमीन देने को भी कहा है। यह फैसला कुछ लोगों के लिए अच्छा या कुछ के लिए बुरा हो सकता है लेकिन यह एक ऐतिहासिक दिन रहा और इस फैसले का सभी ने सम्मान किया। अल जजीरा की आंचल वोहरा ने लिखा है कि मुस्लिम बुद्धिजीवी पहले ही दोनों समुदायों के लिए शांतिपूर्ण समाधान की अपील कर चुके थे ऐसे में इस फैसले को सभी ने स्वागत योग्य बताया।
सामुदायिक संघर्ष पैदा हो सकता है : डॉन
शीर्ष अदालत ने 16वीं शताब्दी की बाबरी मस्जिद 1992 में गिराने के बाद विवादित स्थल मंदिर निर्माण के लिए हिंदुओं को सौंप दिया है। अदालत ने अपने फैसले में यह भी कहा है कि 460 साल पुरानी बाबरी मस्जिद का गिराया जाना कानून और व्यवस्था का पूरी तरह से उल्लंघन था। फैसले पर मुस्लिम पक्ष के वकील ने असंतोष जताया है और सुन्नी मुस्लिम समूह ने इस मसले पर रिव्यू पिटीशन फाइल करने की बात कही है। हालांकि कोर्ट के इस फैसले का असर भारत के हिंदू-मुस्लिमों के रिश्तों में संघर्ष पैदा कर सकता है।
कड़ी सुरक्षा में आया फैसला : द येरुशलम पोस्ट
भारतीय शीर्ष अदालत ने आखिरकार वही फैसला दिया जो ऐतिहासिक तथ्यों ने साबित किया। उसने विवादित स्थल हिंदुओं को सौंप दिया। इससे पहले देश और उत्तर प्रदेश में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था बनाई गई ताकि कहीं कोई अप्रिय घटना न हो। इस फैसले का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत पूरे देश ने सम्मान किया है।
करतारपुर और राम मंदिर दोनों ही ऐतिहासिक : डायचे वेले
भारत और पाकिस्तान के बीच जहां शनिवार से करतारपुर कॉरिडोर खोलने की खुशी है वहीं भारत में राम मंदिर का रास्ता साफ होने से खुशी का माहौल है। हालांकि पाकिस्तान में भारतीय सुप्रीम कोर्ट के फैसले को बहुत अधिक संतोषजनक नहीं बताया गया है लेकिन भारतीय प्रायद्वीप में शनिवार का दिन ऐतिहासिक बन गया है।


गुंबद की जगह हिंदू पक्ष को : बीबीसी
अयोध्या पर भारत में एक बड़ा फैसला आया है। बाबरी मस्जिद के गुंबद की जगह हिंदू पक्ष को सुप्रीम कोर्ट ने सौंप दी है। इस तरह एक बड़े विवाद का 40 दिनों तक लगातार चली सुनवाई के बाद पटाक्षेप हो गया है लेकिन आने वाला वक्त बताएगा कि दोनों समुदायों में किस तरह से सौहार्द का वातावरण बनाया जाता है।

रिपोर्ट
आदेश शर्मा
नई दिल्ली

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